'मंगल मिशन' उड़ान की तैयारी में भारत

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ऐसे समय जब ओलंपिक जारी है, मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिए एशिया में होड़ प्रारंभ होने को है.

भारत अगले साल मंगल पर अपना अंतरिक्ष यान भेजने की तैयारी में है. कुछ लोग कह रहे हैं कि ये अंतरिक्ष में पहुंचने के लिए एशिया के मुल्कों के बीच नई प्रतिस्पर्धा की शुरूआत होगी.

केंद्रीय कैबिनेट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के उस प्रस्ताव पर विचार करने वाला है जिसमें मंगल पर एक मानवरहित अंतरिक्ष यान भेजे जाने की बात कही गई है.

एक तरह से इस मिशन के ज़रिए भारत अपनी तकनीकी क्षमता का फिर से दावा करना चाह रहा है साथ ही साथ वो उन छह देशों की क़तार में भी खड़ा हो जाएगा जिन्होंने इस जोखिम भरी यात्रा के समर्थन का ख़तरा उठाया.

चंद्रयान 1

साल 2008 में भारत ने चंद्रमा पर एक मानवरहित यान - चंद्रयान 1 - भेजा था जिसने इस बात के सबूत इकट्ठा किए थे कि वहां पानी मौजूद है.

अब भारत मंगल के लिए इसी तरह की योजना लागू करने की प्रक्रिया में है.

भारत का मंगल ग्रह मिशन नवंबर 2013 में श्रीहरिकोटा से लांच किया जा सकता है, जिसके लिए फिर से पीएसएलवी का प्रयोग होगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने बैंगलोर में कहा है कि संगठन अब पीएसएलवी जैसे रॉकेट और संचार सैटेलाइट की बजाए अग्रणी टेक्नालॉजी डेवलप करने में ध्यान केंद्रित करेगा.

उन्होंने कहा कि रॉकेट निर्माण जैसे क्षेत्र में निजी कंपनियों को लगाया जा सकता है.

भारत सरकार मंगल ग्रह मिशन के लिए चार करोड़ दस लाख डॉलर आवंटित कर दिए हैं. इसपर प्रस्तावित 11.2 करोड़ डॉलर ख़र्च आएगा.

कई लोगों ने इस बात के लिए सरकार की निंदा की है. उनका कहना है कि जब इक्कीसवीं सदी का सबसे बड़ा सूखा मुल्क के सामने है और कुछ ही दिनों पहले लगभग आधा देश अंधेरे में डूबा हुआ था.

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस तरह के तर्क 1960 से दिए जा रहे हैं कि भारत जैसे ग़रीब मुल्क को अंतरिक्ष प्रोग्रोम की ज़रूरत नहीं है.

लक्ष्य

हालांकि मंगल ग्रह मिशन की पूरी जानकारी फिलहाल उबलब्ध नहीं है लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से मिले संकेत के मुताबिक़ इसका लक्ष्य ग्रह पर जीवन, वहां की जलवायु, उत्पत्ति, विकास, भूविज्ञान और इस बात का पता लगाना है कि क्या वहां जीवन संभव है.

संगठन के एक अधिकारी का कहना है कि मिशन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक से ये साबित हो जाएगा कि भारत मंगल पर भी पहुंचने की क्षमता रखता है.

मंगल पर 42 भेजे गए मिशन में से आधे ही सफल हुए हैं. ये मिशन अमरीका, रूस, फ्रांस, चीन औक कुछ दूसरे यूरोपीय मुल्कों ने भेजे थे.

चंद दिनों में अमरीकी अंतरिक्ष यान मार्स साइंस लेबोरेटोरी मंगल पर पहुंचेगा. इसे ढाई अरब डॉलर की क़ीमत से तैयार किया गया है.

पिछले साल चीन का पहला मंगल मिशन, जिसे यिंगह्यो-1 का नाम दिया गया था, नाकाम हो गया था.

कुछ का मानना है कि भारत मंगल पर अपना मिशन पहले भेजकर अपनी बढ़त साबित करना चाहता है.

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