बीमारियों से कैसे बचाता है सेक्स का चरम सुख

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Image caption वैज्ञानिकों का कहना है कि यौन कुंठा कई तरह की समस्याओं की जड़ बनती है.

“मस्तिष्क के तार झंकृत होना” या फिर “शानदार आतिशबाजी का नजारा”. ये कुछ जुमले हैं जिनका इस्तेमाल वैज्ञानिक सेक्स के दौरान चरम सुख पाने की स्थिति को बयान करने के लिए करते हैं.

एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन बताता है कि इस चरम सुख का अहसास न सिर्फ मिलन को सफल बनाता है, बल्कि इससे कई तरह की मानसिक और शारीरिक बीमारियों से दूर रहने में भी मदद मिलती है.

सेक्स से संबंधित मनोविज्ञान की विशेषज्ञ स्पेन की मगदालेना सालामांसा ने बीबीसी को बताया कि यौन सुख की अनुपस्थिति में कई तरह की बीमारियां और मानसिक विकृतियां पैदा हो सकती हैं.

वह कहती हैं, “ये महत्वपूर्ण है क्योंकि यौन क्रिया का चरम सुख सबसे अहम इंसानी सहज प्रवृत्तियों में से एक ही संतुष्टि है.”

वो बताती हैं कि बहुत सी सामाजिक या पेशेवर समस्याएं यौन असंतुष्टि से जुड़ी हैं. उनके मुताबिक, “मिसाल के तौर पर, चिंता ऐसी विकृति है जो चरम सुख न मिलने से जुड़ी है.”

मनोविज्ञानी अना लुना का कहना है, “मानसिक तौर पर जिन समस्याओं से इंसान का वास्ता पड़ता है, वो कहीं न कहीं चरम सुख से जुड़ी हैं.”

मानसिक सक्रियता

कुछ महीनों पहले अमरीकी राज्य न्यू जर्सी के रटगर्स विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों ने पाया कि चरम सुख की स्थिति में दिमाग के 80 अलग अलग हिस्से सक्रिय हो जाते हैं.

अना लुना सेक्स के दौरान चरम सुख के फायदों के बारे में बताती हैं, “इसके बहुत से फायदे हैं क्योंकि इससे रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है और रक्त प्रवाह भी बेहतर होता है और वो सभी अंगों तक पहुंचता है.”

रटगर्स विश्वविद्यालय के अध्ययन में मगदालेना सालामांसा की इस बात की पुष्टि होती दिखती है कि शारीरिक और मानसिक सेहत का यौन क्रिया के दौरान चरम सुख से सीधा नाता है.

अना लुना का भी मानना है कि चरम सुख स्वस्थ व्यक्तितत्व का अहम हिस्सा है.

उनके मुताबिक यौन सुख न मिलने से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, उदासी, तुनकमिजाजी बढ़ती हैं और यहां तक उसे मुस्कराने के लिए भी प्रयास करना पड़ता है.

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