घुसपैठियों से लड़ेगा तस्मानियाई डेविल

तस्मानियाई दानव
Image caption तस्मानियाई दानव एक तरह के कैंसर के शिकार हैं, जिससे उन्हें बचाना होगा.

ऑस्ट्रेलिया में बिल्लियां, लोमड़ियां और खरगोश जैसे जीवों की तादाद में बेतहाशा वृद्धि एक बड़ी समस्या रही है. लेकिन इनसे निपटने में ऑस्ट्रेलिया का एक बिगड़ैल जीव तस्मानियन डेविल कारगर साबित हो सकता है.

तेजी से फैलते ये जीव न सिर्फ वहां के पर्यावरण, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की मौलिक प्रजातियों के लिए खतरा माने जाते हैं. ऑस्ट्रेलिया में जाकर बसने वाले ब्रितानी कभी अपना मन बहलाने के लिए इन जीवों को वहां ले गए थे, लेकिन अब ये एक बड़ी चुनौती बन गए हैं.

ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी द्पीय राज्य तस्मानिया में पाया जाने वाला जीव तस्मानियन डेविल यानी तस्मानियाई डेविल देखने में तो चूहे जैसा लगता है लेकिन आकार में वो छोटे कुत्ते के बराबर होता है.

मेलबर्न के डीकेन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि तस्मानियाई डेविल और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले जंगली कुत्ते मिल कर तेजी से फैल रही बिल्लियों और लोमड़ियों को नियंत्रित कर सकते हैं.

तस्मानियाई डेविल से उम्मीद

परिस्थितिकी-विज्ञानी यूआन रिची का कहना है कि इस बात के प्रमाण मिले हैं कि तस्मानियन डेविल बाहरी जानवरों की आबादी को नियंत्रित करता है.

वो कहते हैं, “तस्मानिया में पहले भी कई बार लोमड़ियों को रखने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन वो यहां स्थापित नहीं हो पाईं और इसकी वजह हैं तस्मानियाई डेविल. लेकिन दुर्भाग्य से एक खास तरह के ट्यूमर की वजह से ये जानवर खत्म हो रहे हैं. और इसीलिए तस्मानियों के ऐसे हिस्सों में लोमड़ियों की तादाद बढ़ने लगी है यहां वो पहले कभी नहीं पाई जाती थीं. इससे पता चलता है कि तस्मानियाई डेविल अब तक इन्हें नियंत्रित कर रहे थे.”

लोमड़ियों को नियंत्रित करने का दारोमदार ज्यादातर पारंपरिक तरीकों पर रहा है जिनमें जहर देना, बाड़ तैयार करना या उन्हें गोली मारना शामिल हैं

लोमड़ियां जैसे जानवरों को पहली उन्नीसवीं सदी में ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया था, ताकि वहां बसने वाले ब्रितानी लोग उनके शिकार का लुत्फ उठा सकें. लेकिन देखते देखते ही लोमडियां ऑस्ट्रेलिया के ज्यादातर हिस्से में फैल गईं.

ऑस्ट्रेलिया में अब इन अवांछित जीवों की संख्या करोड़ों में हैं और वे पर्यावरण के लिए संकट बनते जा रहे हैं.

डेविल को बचाना होगा

प्रोफेसर रिबेका स्पिंडलर जिनका संबंध सिडनी के तारोंगा चिड़ियाघर से है. वह कहती है कि करोड़ों बरसों के दौरान ऑस्ट्रेलिया में जमीन की उपजाऊ क्षमता धीरे धीरे घटती जा रही है. इस कारण वन्य जीवों के लिए हालात मुश्किल हो रहे हैं.

Image caption लोमड़ियों को ऑस्ट्रेलियाई बाहरी जीव माना जाता है जिनकी तादाद तेजी से बढ़ रही है.

लोमड़ियों और जंगली बिल्लियों को रोकने में अगर ऑस्ट्रेलिया की पुलिस को तस्मानियाई डेविल की मदद चाहिए तो उस रहस्यमीय कैंसर की बीमारी से बचाना होगा जो दक्षिण द्वीप तस्मानिया में उनके बसेरे में ही उन्हें खत्म कर रहा है.

वरिष्ठ संरक्षक निक दे वोस का कहना है, “अगर आप वहां तस्मानियाई डेविल को नहीं ऱखेंगे तो फिर वहां लोमड़ी और जंगली बिल्ली जैसे जानवरों का बोलबाला कायम हो जाएगा.

अगर ऐसा होता है तो अभी तस्मानिया में पाए जाने वाले दूसरे बहुत से छोटे छोटे जीव भी आगे चल कर खत्म हो जाएंगे.”

जंगली कुत्ते भी तेजी से फैलते बाहरी जीवों की बढ़ती तादाद को काबू करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि भेड़ पालने वाले किसान इसका विरोध करेंगे.

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ऑस्ट्रेलिया को स्थानीय जीवों को लुप्त होने से बचाना होगा, इसके लिए कड़े कदम उठाने होंगे.

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