बच्चों के मोटापे के लिए आप तो ज़िम्मेदार नहीं?

मोटा बच्चा (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption बच्चों में बढ़ता मोटापा एक गंभीर समस्या है.

क्या आप जानते हैं कि बच्चों में मोटापे के कारण उनके स्वास्थ्य को होने वाला ख़तरा पहले जितना अनुमान लगाया गया था उससे कहीं ज़्यादा होता है. लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि अपने बच्टों के मोटापे के लिए आप ख़ुद ज़िम्मेदार हों?

ब्रिटेन के स्कूलों में नए साल की शुरूआत होते ही ये ख़बर आई कि प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अत्यधिक बड़े साइज़ के स्कूल यूनिफ़ॉर्म की मांग में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है.

एक नए शोध से यह जानकारी सामने आई है.

तो ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि आख़िर माता-पिता अपने बच्चों को मोटा क्यों होने देते हैं?

इंग्लैंड में बच्चों की लंबाई और वज़न का हिसाब रखने वाली संस्था 'नेशनल चाइल्ड मेज़रमेंट प्रोग्राम' के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 11 साल के उम्र के बच्चों में 33 फ़ीसदी और चार-पांच साल की उम्र में 22 फ़ीसदी बच्चे मोटापे के शिकार हैं.

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविधालय के ज़रिए प्रकाशित नए शोध से भी पता चला है कि सामान्य वज़न वाले बच्चों की तुलना में मोटे बच्चों को ह्रदय रोग होने की संभावना ज़्यादा है.

मोटापे का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के वज़न में बढ़ोत्तरी के लिए माता-पिता कुछ हद तक ज़िम्मेदार ज़रूर हैं लेकिन माता-पिता को कई तरह कि दिक़्क़तों का सामना भी करना पड़ता है.

'मां-बाप ज़िम्मेदार'

विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता को खाद्य पदार्थों के बारे में सही जानकारी नहीं होती, उन्हें सही तरीक़े से खाना बनाना नहीं आता है, स्वस्थ खाना ख़रीदने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं होते हैं.

Image caption ज़क फूड के कारण भी मोटापा बढ़ रहा है

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य के लिए 'हानिकारक' जंक फ़ूड बनाने वाली कंपनियां बच्चों को आकर्षित करने के लिए विशेष रूप से विज्ञापन देती हैं जिनके प्रभाव को बेअसर करना माता-पिता के लिए उतना आसान नहीं.

इसके अलावा बच्चों के जीवन शैली के कारण भी उनमें मोटापा बढ़ रहा है. पिछले सप्ताह जारी किए गए एक रिपोर्ट के अनुसार जूनियर स्कूल में पढ़ने वाले लगभग 75 फ़ीसदी बच्चे नज़दीक के पार्क में जाने के बजाए घरों में रहकर टेलीविज़न देखना ज़्यादा पसंद करते हैं.

इसी साल जुलाई में मॉन्ट्रियल विश्वविधालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि बच्चे अगर सप्ताह में एक घंटा भी ज़्यादा टीवी देखते हैं तो उससे उनके कमर की साइज़ बढ़ती है.

केटी के 15 साल के बेटे का वज़न 147 किलो हो गया था. केटी कहती हैं कि इसके लिए कुछ हद तक वो ख़ुद को ज़िम्मेदार मानती हैं लेकिन अब उन्होंने अपने और अपने बेटे के खाने पीने के तौर तरीक़े में बदलाव कर लिया है और उनके बेटे ने अपना वज़न काफ़ी कम कर लिया है.

एक बेटी की मां ट्रेसी कहती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी का वज़न बढ़ने दिया और उसे रोकने के लिए कभी कुछ नहीं किया जिसके लिए वो ख़ुद को ज़िम्मेदार मानती हैं.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ते माटापे के लिए सिर्फ़ माता-पिता को ज़िम्मेदार ठहराना ठीक नहीं.

लीड्स विश्वविधालय के प्रोफ़ेसर पॉल गेटली कहते हैं, ''निश्चित तौर पर माता-पिता की कुछ ज़िम्मेदारी है लेकिन यह मामला उन पर आरोप लगाने से कहीं ज़्यादा गंभीर है. बहुत से मां-बाप को पता ही नहीं होता कि उनके बच्चे मोटापा के शिकार हैं.''

विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत छोटी उम्र से ही बच्चों का रवैया एक ख़ास तरह का होता है जिससे वे जो चाहते हैं उसे मां-बाप से मनवा लेते हैं.

प्रोफ़ेसर गेटली के अनुसार कोई चीज़ ग़लत है इसको जान लेना बहुत आसान है लेकिन इस धरती पर शायद सारे मां-बाप ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों के ज़रिए भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल हो जाते हैं, और यह सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों में ही नहीं होता.

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