दिल की धड़कनों से चलेगा पेसमेकर

पेसमेकर
Image caption प्रयोग कामयाब रहे तो पेसमेकर की बैटरी को बदलने के लिए बार- बार ऑपरेशन नहीं करना पड़ेगा

अमरीकी शोधकर्ताओं ने एक ऐसा यंत्र तैयार किया है जो दिल की धड़कन का इस्तेमाल पेसमेकर को चलाए रखने में करेगा.

अभी इस यंत्र का परीक्षण किया जा रहा है. वैसे असली दिल पर इसका प्रयोग होना बाकी है.

फिलहाल पेसमेकर की बैटरी को बदलने के लिए बार-बार ऑपरेशन करना पड़ता है.

इस यंत्र पर किए गए परीक्षणों में सामने आया है कि यह यंत्र पेसमेकर के लिए जरूरत से दस गुना अधिक ऊर्जा पैदा कर सकता है.

परीक्षण जरुरी

हालांकि ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि यह उपकरण मरीजों के लिए सुरक्षित है या नहीं, यह पता लगाने के लिए पहले परीक्षण किए जाने जरुरी हैं.

उपकरण का पिएजोइलेक्ट्रिक मैटेरियल आकार बदलने की स्थिति में इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा करता है. इन इलेक्ट्रिक चार्ज को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलने के लिए कुछ माइक्रोफोंन्स का इस्तेमाल किया गया है.

मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इस यंत्र के परीक्षणों को आधार बना कर दिल की धड़कन का इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत के रूप में करने में लगे हैं.

प्रयोग के दौरान पाया गया कि यह उपकरण पेसमेकर को चलाने के लिए काफी बिजली पैदा कर सकता है. शोधकर्ता अब इस यंत्र का टेस्ट असली दिल पर करने के अलावा इसे बाजार में मिलने वाले पेसमेकर में लगा कर देखना चाहते हैं.

डॉक्टर अमीन करामी ने अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन को बताया कि पेसमेकर की बैटरी को बदलने के लिए तकरीबन हर सात साल बाद ऑपरेशन करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, “पेसमेकर का इस्तेमाल करने वाले अधिकतर मरीज बच्चे हैं. इन सभी को पेसमेकर के साथ कई वर्ष तक जीना पड़ता है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें कितने ऑपरेशन के गुजरना पड़ेगा.”

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मेडिकल डॉयरेक्टर प्रोफेसर पीटर वेसबर्ग ने कहा कि आधुनिक तकनीक के आने के बाद पेसमेकर की बैटरी को बार-बार नहीं बदलना पड़ता. ऐसे में यह नया उपकरण इस दिशा में एक और बड़ा कदम हो सकता है.

वेसबर्ग ने कहा, “अगर शोधकर्ता उपकरण की टेक्नोलॉजी को और थोड़ा सुधार दें और असली दिल पर यह टेस्ट में खरा उतरता है तो यह बैटरी को बदलने की जरुरत को और कम कर देगा.”

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