साँस के जरिए पता लग सकेगा आँत के कैंसर का

  • 12 दिसंबर 2012
कैंसर
Image caption शुरुआती दौर में कैंसर का पता बहुत मुश्किल से चल पाता है

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने कैंसर के परीक्षण का एक ऐसा तरीका ईजाद किया है जो कि आँत के कैंसर के बारे में काफी सही जानकारी दे सकता है.

'ब्रीद टेस्ट' नामक ये परीक्षण सांस लेने के जरिए किया जाता है और फिर सांस को बाहर निकालने पर उसमें मौजूद रसायनों में ट्यूमर बनाने की क्षमता के आधार पर मरीज का परीक्षण किया जाता है.

ब्रिटिश जर्नल ऑफ सर्जरी ने इस परीक्षण को 76 प्रतिशत तक सही बताया है.

वैज्ञानिक सांस लेने वाले परीक्षणों को दूसरी बीमारियों जैसे- टीबी, कैंसर और मधुमेह के लिए भी इस्तेमाल करने पर काम कर रहे हैं.

कैंसर की पहचान यदि आरंभिक अवस्था में हो जाती है और इसका सही इलाज होता है तो इसके ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

मौजूदा तकनीक

मौजूदा समय में आँत के कैंसर की जांच के लिए मल के साथ आने वाले खून का सहारा लिया जाता है. लेकिन इससे आँत के केवल कुछ हिस्सों में मौजूद कैंसर का ही पता चल पाता है.

'ब्रीद टेस्ट' तकनीक इस विचार पर आधारित है कि ट्यूमर्स की प्रकृति ऐसी होती है कि वे कुछ खास किस्म के अस्थिर यौगिक का निर्माण करते हैं.

ये यौगिक मरीज की सांस के साथ कुछ मात्रा में बाहर आ जाते हैं. शुरुआती अध्ययन से पता चलता है कि इनके परीक्षण के लिए कुत्तों को प्रशिक्षित किया जा सकता है.

दक्षिणी इटली के शहर बारी से आई डॉक्टरों की एक टीम ने आँत के कैंसर वाले 37 मरीजों की साँसों और 41 सामान्य लोगों की सांसों का तुलनात्मक अध्ययन किया.

शुरुआती दौर में ये परीक्षण करीब 85 प्रतिशत तक सही पाए गए. यहां तक कि जब उसके बाद भी परीक्षण किया गया तब भी इनकी शुद्धता 76 प्रतिशत थी.

शोधकर्ताओं के लिए ये परिणाम काफी उत्साहजनक थे.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये परीक्षण उन मरीजों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है जिनमें इलाज के बाद कैंसर दोबारा दिखने लगता है.

इस परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यापक पैमाने पर इसके इस्तेमाल के लिए अभी और काम करने की जरूरत है.

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