इंटरनेट की लत छुड़ाने वाली क्लिनिक

 शनिवार, 12 जनवरी, 2013 को 15:11 IST तक के समाचार
बदलती डिजीटल दुनिया

डिजीटल दुनिया में आगे होने वाले बदलावों का दारोमदार बहुत हद तक मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर होगा.

आज हममें से ज्यादातर लोग खुद को सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय समझते हैं. सोशल मीडिया पर तस्वीरें, गाने और शुभकामनाएं साझा करना रोजमर्रा का हिस्सा है.

अनुमान है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले 60 फीसदी से ज्यादा लोग अपने फेसबुक प्रोफाइल पर बराबर सक्रिय रहते हैं और सोशल नेटवर्किंग आजकल इंटरनेट पर वक्त गुजारने वालों का सबसे पसंदीदा शगल है.

बीते साल में ट्विटर इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ कर लगभग एक करोड़ हो गई है. मोबाइल पर डेटा का आदान-प्रदान भी लगातार बढ़ रहा है.

तो 2013 में डिजिटल दुनिया में किस तरह के चलन देखने को मिल सकते हैं, चलिए डालते हैं एक नजर:

1. मोबाइल बटुआ

2013 में हमारा जीवन अधिक से अधिक मोबाइल से नियंत्रित होगा. बैंक कार्ड, ट्रैवल कार्ड, बोर्डिंग पास और अन्य कार्ड एक एक करके आपके बटुए से निकल कर अब तक स्मार्टफोन के सॉफ्टवेयर में समाते जा रहे हैं.

एक तरफ इससे उन्हें संभालने के झंझट से छुटकारा मिल रहा है, तो उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता भी बढ़ रही है.

लेकिन दूसरी तरफ अगर आपका मोबाइल गुम हो जाए तो एक झटके में आपकी 'जिंदगी थम सी जाती है' और स्मार्टफोन की बढ़ती चोरी किसी से छिपी नहीं है.

उम्मीद है कि ऐसे अत्याधुनिक एप्स तैयार होंगे जो आपको फोन को तलाशने में मदद कर सकें और आपके पासवर्ड और आपकी पहचान को संरक्षित रख सके.

2. मोबाइल पर विज्ञापन की बौछार

मोबाइल का बढ़ता चलन

उपभोक्ता अपना 10 प्रतिशत से ज्यादा समय मोबाइल फोन पर बिताते हैं लेकिन उस पर एक प्रतिशत विज्ञापन राशि ही खर्च की जाती है. 2013 में ये अंतर कम होगा.

मोबाइल और सोशल मीडिया वेबसाइटों के लिए विज्ञापन के नए फॉर्मेट तैयार हो सकते हैं. प्रायोजित संदेशों की संख्या भी बढ़ेगी.

बेहद निजी समझे जाने वाले इस मंच पर व्यावसायिक गतिविधियों की घुसपैठ और निजता के जुड़े कुछ सवाल भी उठ सकते हैं.

इसके लिए ऐसे सॉफ्टवेयर भी बन सकते हैं जो आपको मोबाइल पर विज्ञापनों की बाढ़ को रोकेंगे.

कम से कम एक सोशल मीडिया नेटवर्क प्रीमियर सर्विस की पेशकश करेगा जिसमें यूजर्स को कोई विज्ञापन नहीं देखना होगा.

3. सिलेब्रिटी स्पैम

अलग अलग सिलेब्रिटी और टेलैंट हंट शो मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे.

सिलेब्रिटीज पहले ही अपने चाहने वालों तक सीधे पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल की क्षमताओं का सहारा ले रहे हैं.

हो सकता है कि अब तक सिलेब्रिटी के पीछे दीवाने प्रशंसक उनके स्पैम से दूरी बनाने के तरीके तलाशें.

टीवी चैनल पहले ही ऐसे टेक्स्ट मैसेज तैयार कर रहे हैं जो टीवी कार्यक्रम के प्रसारण से पहले, उसके दौरान और प्रसारण के बाद भेजे जाएंगे. ऐसा दर्शकों को अनूठा अनुभव देने के लिए किया जा रहा है.

4. तिरछी नजर

मोबाइल और सोशल मीडिया के संगम के बाद बात चाहे असल खबर की यो कोरी गप की, सब कुछ बड़ी तेजी से दुनिया भर में फैल जाता है.

भारत समेत दुनिया भर में सरकारों की इस पर नजर है. यूपीए सरकार हमेशा सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ दुष्प्रचार से दुखी रही है.

हो सकता है कि 2013 में राजनेता और वकील इंटरनेट को काबू करने के प्रयास तेज करें.

2012 में फेसबुक और यूट्यूब जैसी वेबसाइटों पर भारत समेत कई देशों में कुछ सामग्री हटाने का दवाब रहा.

5. मोबाइल और सोशल न्यूज

समाचार पाने का जरिया बना सोशल मीडिया

बीबीसी समेत तमाम बड़ी समाचार वेबसाइटों पर आने वाले लोगों में से एक तिहाई स्मार्टफोन के जरिए आ रहे हैं और इस चलन ने खबरों के प्रकार और आकार को बदला है.

लाइव ब्लॉग ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन युवा लोग खबरों के लिए पारंपरिक वेबसाइटों तक नहीं जा रहे हैं बल्कि ट्विटर और फेसबुक के लिंकों के जरिए खबरें पा रहे हैं.

2013 में दिसन्यूजनाव जैसी सोशल वीडियो सर्विस का चलन बढ़ेगा. दिसन्यूजनाव पहली वीडियो मोबाइल सर्विस है जो छोटे-छोटे वीडियोज पर केंद्रित है.

6. डिजीटल लत छुड़ाने के क्लीनिक

सोशल मीडिया के इन सब नए चलनों के बीच ये भी महसूस हो सकता है कि आपको तो मोबाइल और सोशल मीडिया की लत ही लग गई है.

हो सकता है कि आप खाने की मेज पर बैठे हैं और खाने से ज्यादा आपकी दिलचस्पी क्रिकेट का स्कोर जानने में हो.

सोशल मीडिया की दीवानेपन के चक्कर में लोगों के बीच मौखिक संवाद घटता जा रहा है.

इस साल मोबाइल फोन निर्माता आपका ध्यान खींचने की भरपूर कोशिश करेंगे. हो सकता है कि कुछ लोगों को डिजिटल लत छुड़ाने के क्लिनिकों का सहारा लेना पड़े.

7. मोबाइल नियंत्रित एक्सेसरीज

गूगल ग्लास

इस साल फोन इस बात को भी नियंत्रित करने लग जाएगा कि हम क्या देखते हैं और क्या पहनते हैं. गूगल ग्लास और वुजिक्स ऐसे मोबाइल कंप्यूटर्स हैं जो वास्तविकता को एक नए स्तर पर ले जाते हैं.

यानी अब आपको क्रिकेट का स्कोर देखने के लिए मेज के नीचे देखने की जरूरत नहीं है, स्कोर सीधे आपकी आंखों के सामने होंगे.

ऐसे भी कपड़े तैयार हो सकते हैं जिनमें लगे इलेक्ट्रोनिक उपकरण आपसे सोशल मीडिया अपडेट्स को आपके कपड़ों पर अंकित कर देंगे.

कुल मिलाकर सोशल मीडिया और मोबाइल फोन इस साल डिजीटल प्रगति के आधार होंगे.

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