जानवरों की मौत के लिए ज़िम्मेदार बिल्लियां

  • 30 जनवरी 2013
अध्ययन के मुताबिक पालतू बिल्लियों से भी पक्षियों और जानवरों को खतरा होता है

एक अध्ययन के मुताबिक बिल्लियां अमरीका के वन्य जीवन के लिए सबसे बड़े ख़तरों में से एक हैं और वे हर वर्ष अरबों जानवरों को मार देती हैं.

अध्ययनकर्ताओं का अनुमान है कि बिल्लियां हर वर्ष 1.4 से 3.7 अरब पक्षियों और 6.9 से 20.7 अरब स्तनपायी जानवरों की मौत के लिए ज़िम्मेदार होती हैं.

नेचर कम्यूनिकेशंस पत्रिका के एक लेख में वैज्ञानिकों ने बताया है कि भटकी हुई और जंगली बिल्लियां सबसे ज़्यादा जानवरों को मारती हैं.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि पालतू बिल्लियों से भी पक्षियों और जानवरों को खतरा होता है और पालतू बिल्लियों के मालिकों को इस खतरे को कम करने के लिए और ज्यादा कदम उठाने चाहिए.

प्रजातियों की विलुप्ति के लिए ज़िम्मेदार

अध्ययनकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अमरीका में सड़क दुर्घटनाओं, इमारतों से टकराने और ज़हर की वजह से मरने वाले जानवरों की तुलना में बिल्लियों के पंजों से मरने वाले जानवरों की संख्या ज़्यादा है.

पालतू बिल्लियां का स्थानीय वन्यजीवन को मारने के सबूत कई द्वीपों पर मिलते हैं और इन्हें दुनिया भर में 33 प्रजातियों के विलुप्त होने के लिए ज़िम्मेदार माना गया है.

लेकिन मुख्य भूभाग पर इनके प्रभाव के सबूत जुटाना ज्यादा मुश्किल रहा है.

इस बारे में और जानकारी के लिए स्मिथसोनियन कॉन्ज़र्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट (एससीबीआई) और अमरीकी मत्स्य और वन्यजीवन सेवा के शोधकर्ताओं ने बिल्लियों की हिंसक प्रवृति पर नज़र डालने वाले पुराने अध्ययनों का पुनरीक्षण किया.

वन्यजीवन के लिए सबसे बड़ा ख़तरा

शोधकर्ताओं के विश्लेषण में ये सामने आया कि बिल्लियाँ, पुराने अध्ययनों में दिए गए आंकड़ों से कहीं ज़्यादा जानवरों की मौतों के लिए ज़िम्मेदार थीं- पुराने अनुमानों की तुलना में बिल्लियों ने चार गुना ज़्यादा पक्षियों को मारा था.

अमरीकन रॉबिन जैसे अमरीका के मूल पक्षी और स्तनपायी जीवों में चूहे, छछूंदर, मूस, गिलहरी और खरगोशों को बिल्लियों से सबसे ज़्यादा खतरा था.

एससीबीआई के डॉक्टर पीट मारा का कहना था, "हमारा अध्ययन इस ओर संकेत देता है कि बिल्लियां अमरीकी वन्यजीवन के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं."

उन्होंने आगे कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि हमारे शोध में जो इतनी बड़ी तादाद में वन्यजीवों की मौत की बात सामने आई है उससे कुछ बिल्ली मालिक अपनी बिल्लियों को अंदर रखने की ज़रूरत को समझेंगे और नीतिनिर्धारकों, वन्यजीवन से जुड़े वैज्ञानिकों व अन्य लोग सचेत हो जाएंगे."

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