क्या ‘ब्लैकबेरी 10’ आरआईएम को बचा पाएगा?

ब्लैकबेरी-10
Image caption आरआईएम को अपने नए उत्पाद ब्लैकबेरी-10 से बहुत उम्मीदें हैं.

कनाडा की कंपनी ‘रिसर्च इन मोशन’ (आरआईएम) आने वाले सालों में ब्लैकबेरी श्रृंखला के नए मॉडल ‘बीबी-10’ के जरिए बाजार की दौड़ में एक बार फिर से लौट सकती है.

‘बीबी-10’ पहली नजर में ब्लैकबेरी के पुराने हैंडसेट्स की तरह ही मालूम देता है.

लेकिन सच इससे अलग है, क्योंकि पुराने सॉफ्टवेयर से पूरी तरह से अलग नए प्लेटफॉर्म पर इस मॉडल को पेश किया जाना है.

आरआईएम ने साल 2010 में यह तकनीक हासिल की थी.

तकनीक में बदलाव का यह सफर ब्लैकबेरी के लिए बेहद मुश्किल भरा रहा है.

देरी कई वजहों से हुई और इसका कंपनी को इसका खामियाज़ा शेयरों में गिरावट और प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों के पलायन के तौर पर चुकाना पड़ा.

हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर में कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके उपभोक्ता भी कम हो रहे हैं.

उम्मीदें बरकरार

हांलाकि खबरों में इस बात की भी आशंका जताई जा रही थी कि दशक पहले अपना पहला स्मार्टफोन बाजार में उतारने वाली कंपनी मुमकिन है कि अपना आखिरी मॉडल पेश कर सकती है.

लेकिन,महीने भर में ही कंपनी के पास सकारात्मक होने के लिए कई वजहें हैं.

तकनीक के जानकारों ने ‘बीबी-10’ की सराहना की है. खासकर उस फीचर की बहुत बात की जा रही है जिसमें इसे इस्तेमाल करने वाला मैसेज और एप्लीकेशन्स के दौरान ही आसानी से अपनी पसंद चुन और बदल सकता है.

कंपनी की शेयर कीमतों में भी उछाल दर्ज किया गया है. पिछले सितंबर के निचले स्तर 337 रुपए की तुलना में यह बढ़कर 838 रुपए हो गया है.

इस उछाल से उत्साहित कंपनी ने कहा है कि वह अपने ब्लैकबेरी वर्ल्ड स्टोर में भी सुधार करेगी. उसकी योजना अपने उपभोक्ताओं को 70 हज़ार से भी ज्यादा एप्लीकेशन्स, सिनेमा और संगीत मुहैया कराने की है.

आरआईएम और बीबी-10

बीबीसी ने निवेशकों, संभावित खरीददारों, तकनीक के मुरीदों और कॉरपोरेट उपभोक्ताओं के रुझानों के मद्देनजर ‘बीबी-10’ की कामयाबी की संभावनाओं की पड़ताल करने की कोशिश की.

Image caption ब्लैकबेरी को लेकर कॉरपोरेट उपभोक्ताओं में अच्छा रुझान देखा गया है.

इस सिलसिले में नोमुरा सिक्यूरिटीज के विश्लेषक स्टुअर्ट जेफरी संदेह जताते हैं कि ब्लैकबेरी के प्रशंसकों और कॉरपोरेट उपभोक्ताओं के बीच मल्टीमीडिया खूबियों वाले ब्लैकबेरी मॉडल्स की मांग भी है.

जेफरी कहते हैं, "दूसरी कंपनियां स्मार्टफोन के अलग-अलग विकल्पों के बीच प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश में हैं जबकि आरआईएम ऐप्पल की तरह ही अपने आप में अलग अस्तित्व रखता है".

इसका मतलब यह हुआ कि आरआईएम को बाज़ार में कामयाबी हासिल करने के लिए अपने बड़े प्रतिद्वंदियों ऐप्पल और सैमसंग से डिजाइन और उनके एप्लीकेशन्स की बराबरी करनी होगी.

साथ ही आई-फोन, एंड्रायड और विंडोज़ मोबाइल के लिए एप्लीकेशन बनाने वालों को भी अपनी ओर आकर्षित करना होगा.

और यह सब तुलनात्मक रूप से सीमित बजट को ध्यान में रखते हुए करना होगा.

अगर आरआईएम इन चुनौतियों से निपटने में नाकाम होता है तो बहुत हद तक संभावना है कि इसकी बिक्री तुलनात्मक रूप से छोटे कॉरपोरेट बाजार तक सिमट कर रह जाएगी.

मुनाफे का गणित

स्टुअर्ट ने यह भी अनुमान लगाया कि आरआईएम ब्लैकबेरी के उपभोक्ता शुल्क में कमी कर सकती है और इससे कंपनी को अगले दो सालों में अपने कुल लाभ में 53 अरब रुपए तक का घाटा सहना पड़ सकता है.

घाटे में कमी की भरपाई करने के लिए कंपनी को अपनी बिक्री में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी करनी होगी. तभी कंपनी के मुनाफे में इजाफा हो पाएगा.

स्टुअर्ट कहते हैं कि बीबी-10 से शुरू में भले ही कंपनी की शेयर कीमतों में उछाल हो रहा है लेकिन भविष्य में तस्वीर चुनौतीपूर्ण ही होगी.

सीसीएस इनसाइट के टेलीकॉम सलाहकार बेन वुड कहते हैं कि नाचने-गाने वाले स्मार्टफोन्स के मामले में ब्लैकबेरी के उपभोक्ताओं को भले ही लगता हो कि वे पिछड़ गए हों लेकिन ब्लैकबेरी मैसेजिंग की आकर्षक ई-मेल सेवा के बेहतरीन अनुभव ने उन्हें इसके उत्पाद का वफादार बनाए रखा है.

वुड कहते हैं कि इससे पहले कि ये उपभोक्ता किसी और उत्पाद को चुनें आरआईएम को अपने इनपर पकड़ बनाए रखनी होगी.

बहुत से ऐसे उपभोक्ता भी हैं जिन्होंने दूसरा विकल्प चुन लिया है और कंपनी को उन्हें भी वापस लाने के लिए रिझाना होगा.

संबंधित समाचार