मासूम बच्चे, पर हैं शातिर हैकर

  • 9 फरवरी 2013
Image caption यह मज़ेदार है

सिर्फ़ 11 वर्ष के हैकर्स गेमिंग साइट्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे इन साइट्स को हैक करने के लिए खतरनाक कंप्यूटर प्रोग्राम बना रहे हैं.

एंटी वायरस कंपनी एवीजी की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है.

एक मामले में तो शोधकर्ता ऐसे ही खतरनाक प्रोग्राम को तोड़कर एक बच्चे तक जा पहुंचे. 11 साल का यह बच्चा कनाडा में रहता था.

खेल-खेल में बना रहे वायरस

शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों के बीच पसंद किए जाने वाले कंप्यूटर गेम्स पर ऐसे हमले बहुत ज़्यादा हो रहे हैं.

एवीजी में मुख्य तकनीकी अधिकारी युवाल बेन-इट्ज़हैक का कहना है कि ये तो समस्या की शुरूआत भर है.

इट्ज़हैक कहते हैं, “कई स्कूल बच्चों को प्रोग्राम बनाना सिखा रहे हैं. ये बच्चे नहीं जानते कि जो प्रोग्राम वो बना रहे हैं वो सही हैं या गलत.”

बच्चों के बनाए ये प्रोग्राम ज़्यादातर कंप्यूटर की शुरूआती भाषा, विज़ुअल बेसिक या सी शार्प में बनाए जा रहे हैं.

खतरनाक प्रोग्राम बनाने के खतरों से अनजान बच्चे इनमें ऐसे संकेत छोड़ देते हैं जिनसे उनकी पहचान ज़ाहिर हो सकती है. पेशेवर हैकर ऐसी गलती कभी नहीं करते.

इट्ज़हैक की टीम ने 200 मिलियन से ज़्यादा खिलाड़ियों वाले एक ऑन लाइन गेम रनएस्केप में एक खतरनाक प्रोग्राम पकड़ा.

टीम को पता चला कि ये प्रोग्राम लोगों के आंकड़े चुराकर एक ख़ास ईमेल एड्रेस पर भेज रहा है. यह ईमेल एड्रेस कनाडा के एक बच्चे का था.

सही-गलत भी बताओ

इट्ज़हैक मानते हैं कि ऐसे बच्चों को प्रोग्रामिंग के साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए क्या सही है और क्या ग़लत.

वह कहते हैं, “ आप अपने बच्चों को सिखाते हैं कि बिना पैसे दिए खिलौना नहीं उठा सकते. इसी तरह की शिक्षा सॉफ्टवेयर बनाने के बारे में भी दी जानी चाहिए.”

दुनिया भर में कई स्कूल अपने पढ़ाने का तरीका बदल रहे हैं।

ये बच्चों को सिर्फ़ कंप्यूटर का इस्तेमाल करना ही नहीं सिखा रहे। ये स्कूल बच्चों को कंप्यूटर के लिए प्रोग्राम बनाना भी सिखा रहे हैं.

ब्रिटेन में स्कूल के बाद बच्चों को प्रोग्रामिंग सिखाने वाले कई क्लब हैं.गूगल और याहू जैसी कंपनियां ऐसी कोशिशों को प्रोत्साहित भी करती हैं

लिंडा सैंडविक ऐसे ही एक क्लब “कोड क्लब” की सह-संस्थापक हैं.

लिंडा कहती हैं, “एवीजी की रिपोर्ट में बच्चों की प्रोग्रामिंग के खतरों को बहुत बढ़ चढ़ा कर बताया गया है.”

उनके अनुसार हम जब हम पढ़ाई शुरू करते हैं, तो हम पढ़ना सीखते हैं, फिर लिखना भी सीखते हैं. ऐसा ही डिजिटल तकनीक के साथ है.

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