दिखेगा पड़ोस से गुज़रता हुआ उल्कापिंड

गुज़रते उल्कापिंड
Image caption खगोलशास्त्रियों का कहना है कि इस उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने का कोई अंदेशा नहीं है.

एक वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक़ ओलंपिक में इस्तेमाल लाए जाने वाले स्वीमिंगपूल के आकार का एक उल्कापिंड पृथ्वी के बेहद नज़दीक से गुजरेगा.

उल्कापिंड आज पृथ्वी 27700 किलोमीटर की दूरी से निकलेगा. वो पृथ्वी के नज़दीक से निकलने वाला अब तक के सबसे बड़े उल्कापिंडों में से एक है.

इस दूरी का अंदाज़ इस बात से लागाया जा सकता है कि पृथ्वी से मानव द्वारा छोड़े गए कई उपग्रह इससे ज़्यादा दूरी पर पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं. खगोलशास्त्रियों का कहना है कि इस उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने का कोई अंदेशा नहीं है.

कब और कहाँ

यह उल्कापिंड भारतीय समयानुसार शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि को 12.55 मिनट पर पृथ्वी से सबसे नज़दीक के स्थान पर होगा.

पृथ्वी के जिन इलाकों में उस समय अंधेरा होगा और बादल साफ़ होंगे इसे किसी भी अच्छी दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से देखा जा सकेगा.

यह उल्कापिंड भी पृथ्वी की तरह ही सूर्य की परिक्रमा कर रहा है और लगभग पृथ्वी की तरह ही यह अपनी कक्षा में परिक्रमा पूरी करने में 368 दिन लेता है. बस इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा से अलग है.

खगोलशास्त्रियों के हिसाब से यह उल्कापिंड 7.8 किलोमीटर प्रतिकिलोमीटर की रफ़्तार से सफ़र कर रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पृथी के "नीचे" से गुजर कर "ऊपर" सूर्य की तरफ चला जाएगा.

सीधा प्रसारण

यह पूर्वी हिन्द महासागर के ऊपर से गुजरेगा और इसे एशिया ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी यूरोप के इलाकों से सबसे अच्छी तरह देखा जा सकेगा.

पर दुनिया में हर तरफ मौजूद उन लोगों के लिए जिन्हें इसे देखने की बहुत तमन्ना है उनके लिए नासा और भी कई एजेंसियां भारतीय समयानुसार इसका 12.30 से सीधा प्रसारण करेंगे. (सीधा प्रसारण देखने के लिए यहाँ क्लिक करें).

'2012 डीए 14' नाम के इस उल्कापिंड को सबसे पहले फरवरी 2012 में स्पेन के ला सागरा से देखा गया था. ब्रिटेन के बेलफास्ट विश्विद्यालय में एलन फित्ज़सिमोंस का कहना है कि यह कोई खो देने वाली मौक़ा नहीं है. वो कहते हैं " जब कोई उल्कापिंड पृत्वी के इतना नज़दीक गुज़रता है तो उनका अध्यन करने के कई मौके होते हैं यह इतना चमकदार होगा कि इसे पढ़ना आसान होगा."

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