धरती के बेहद करीब से गुज़रा उल्का पिंड

  • 16 फरवरी 2013
Image caption इस उल्कापिंड का व्यास करीब 45 मीटर था.

एक उल्कापिंड जिसका आकार आधे फुटबॉल मैदान के आसपास था, वो धरती के निकट से गुजरा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पहली बार है कि इस आकार की कोई चीज धरती के इतने निकट से होकर गुजरी है.

इस उल्कापिंड का व्यास करीब 45 मीटर था और धरती से इसकी सबसे नजदीकी दूरी 28,000 किलोमीटर थी. यानी धरती से इस उल्कापिंड की दूरी टीवी संचार और मौसम को समझने के लिए वातावरण में छोड़े गए उपग्रहों से भी कम थी.

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस उल्कापिंड का रूस के ऊपर से गुजरे उल्कापिंड से कोई ताल्लुक नहीं है. वैज्ञानिक ये भी कह रहे हैं कि इसकी धरती से टकराने की संभावना नहीं है.

2012 DA14

इस उल्कापिंड को 2012 DA14 का नाम दिया गया है

इससे पहले रूस के ऊपर से एक दूसरे उल्कापिंड के टुकड़े गिरे थे जिससे इमारतों के शीशे टूट गए और वहाँ से 900 से ज्यादा लोगों के घायल होने की रिपोर्टें हैं. माना जा रहा है कि इस उल्कापिंड का वजन दस टन था.

2012 DA14 उल्कापिंड 7.8 किलोमीटर प्रति सेकेंड से धरती के पास से गुजर रहा है और ये धरती के नीचे से वापस ऊपर की ओर जाकर सूर्य की ओर चला जाएगा.

ये उल्कापिंड पूर्वी हिंद महासागर के ठीक ऊपर से गुजरा जिससे पूर्वी यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया से इसे साफ देखा गया.

ब्रिटेन के क्वींस विश्वविद्यालय के ऐलन फिट्जसिमंस के मुताबिक जब उल्कापिंड धरती के इतने निकट से होकर गुजरते हैं तो ये उन्हें जानने और समझने का बेहतरीन मौका होता है और इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए.

शोध का मौका

ओरिअल हियरी एक शौकिया खगोलशास्त्री हैं औऱ वो पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पर्थ शहर के पास स्थित गिंगिन ऑब्जर्वेटरी में इस उल्कापिंड की राह को समझने में मदद कर रही हैं. उन्होंने कहा, "आसमान बहुत साफ है. ये एक बेहतरीन रात है. मिल्की वे इतना साफ है कि ऐसा लग रहा है कि आप उसे छू सकते हैं. और मौसम भी उत्तम है. अभी तापमान 22 डिग्री के करीब है. इसलिए काम करने के लिए ये शाम बहुत अच्छी है."

इस उल्कापिंड को सबसे पहले फरवरी 2012 में स्पेन के खगोलशास्त्रियों ने देखा था. उन्होंने पिछली बार इस उल्कापिंड को उस वक्त देखा जब वो धरती के पास से निकला, हालाँकि उस वक्त इसकी धरती से दूरी काफी ज्यादा थी.

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