रोबोटिक कठपुतलियों की डिजिटल सफारी

डिजिटल कठपुतली
Image caption अमित द्रोरी की डिजिटल कठपुतलियां किसी अजूबे से कम नहीं हैं.

अमित द्रोरी के लिए यह किसी रोबोट वाली कविता की तरह ही है. कंप्यूटर जैसा बर्ताव करती उनकी डिजिटल कठपुतलियां पहली नजर में हमें जिंदा मशीनों का एहसास कराती हैं और फिर हमें एक नए किस्म के सफारी पर ले जाती हैं.

येरूशेलम में विज़ुअल थियेटर पढ़ाने वाले अमित ने डिजिटल कठपुतलियों का ऐसा संसार रचा है जिनकी रूह रोबोट है.

अमित कहते हैं कि कठपुतलियों के खेल में तकनीक के इस्तेमाल के अपने खतरे हैं. क्योंकि लोगों को यह लगता है यह आम कठपुतलियों के खेल से अलग होगा और यह कभी नहीं हो पाएगा.

डिजायनर नोआम डोवर के साथ मिलकर अमित ने हाथ से बनी पारंपरिक कठपुतलियों में मशीनो की जान डाल दी है.

इसके लिए अमित सारी दुनिया में मशहूर भी हो गए हैं.

वजन और संतुलन

रोबोटिक कठपुतलियों की अपनी कोशिश के बारे में अमित ने बताया, “मैंने इसके लिए मैंने बहुत कुछ सीखा है. गति करने के जानवरों के तौर तरीके पर गहरी नजर रखी है. कई प्रयोग किए हैं. हर जानवर में यह अलग-अलग होता है. हमने इसकी डिजाइनिंग उनकी हरकतों के हर फ्रेम के हिसाब से की है ताकि हम इसकी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकें.”

अमित कहते हैं, “हमें एक चलता हुआ हाथी बनाने में डेढ़ साल लग जाते हैं. हमने उसके वजन और संतुलन को समझने के लिए तीन नमूने बनाए थे. तब जाकर वह स्टेज पर पेश करने लायक हो पाया.”

अमित बताते हैं कि एक बार यह साकार हो जाने के बाद हम कई चीजें सीख पाए. हमने समझा कि इस तरीके से और भी कई जानवर बनाए जा सकते हैं.

इस काम में अमित अकेले नहीं है बल्कि कठपुतली के खेल में माहिर लोगों की एक पूरी टीम उनके साथ है.

शौकिया इंजीनियरों में तब्दील हो चुकी अपनी टीम के साथ अमित ने दुनिया भर में स्टेज शो किए हैं.

संबंधित समाचार