अकेलापन आपको वाकई खा जाएगा

  • 24 फरवरी 2013
Image caption अकेलेपन की समस्या पूरी दुनिया में बढ़ रही है, ख़ासकर बुजुर्गों में

अपने परिवार और दोस्तों से आप कितना मिलते हैं, ये आपकी सेहत को काफ़ी प्रभावित करता है. अकेलापन आपको बीमार कर देता है और सिर्फ़ मानसिक रूप से नहीं, शारीरिक रूप से भी.

डॉक्टर पहले से ये जानते हैं कि अकेलेपन से अवसाद, तनाव, व्याकुलता और आत्मविश्वास में कमी जैसी मानसिक दिक्कतें होती हैं.

लेकिन ऐसे तथ्य मिले हैं कि अकेलेपन से शारीरिक बीमारियां होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं.

ये भी कहा जा रहा है कि इससे कुछ बीमारियों के होने और उनके खतरनाक बनने की आशंका होती है.

शोधकर्ता ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अकेलापन शरीर पर ऐसा क्या असर डालता है जो बीमारी और मौत की तरफ़ धकेलता है.

कैसे करता है बीमार ?

2006 में स्तन कैंसर की शिकार 2800 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन से पता चला कि ऐसी मरीज़ जो तुलनात्मक रूप से परिवार या दोस्तों से कम मिलती थीं, उनकी बीमारी से मौत की आशंका पांच गुना ज़्यादा थी.

शिकागो विश्वविद्यालय में मनोवैज्ञानिकों ने देखा कि सामाजिक रूप से अलग-थलग लोगों की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव हो जाता है. ये बदलाव उन्हें स्थायी सूजन और जलन की ओर धकेलता है.

किसी घाव या संक्रमण के ठीक होने के लिए अल्पकालिक सूजन और जलन ज़रूरी होती है. लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक रहती है तो हृदयवाहिनी के रोग और कैंसर की वजह बन सकती है.

विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों ने पाया कि अकेले लोग रोज़मर्रा के कामों को ज़्यादा तनावकारी पाते हैं.

उन्होंने बड़ी संख्या में स्वस्थ लोगों में सुबह और शाम के वक्त कोर्टिसोल की मात्रा की जांच की.

तनाव का हार्मोन

कोर्टिसोल तनाव के वक्त पैदा होने वाला एक हार्मोन है.

अकेले लोगों में ज़्यादा कोर्टिसोल पाया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि इतना ज़्यादा हार्मोन सूजन और जलन और बीमारी का कारण बनता है.

ओहियो राज्य विश्वविद्यालय के ताजा शोध में अकेले लोगों में तनाव की प्रतिक्रिया में सूजन और जलन को देखा गया.

डॉ लीसा जारेम्का ने स्वस्थ स्वयंसेवियों के साथ उन महिलाओं की तुलना की जो ब्रेस्ट कैंसर से बच गई थीं.

उन्होंने सभी प्रतियोगियों को एक जाने-माने तनाव-परीक्षण, ट्रीर सोशल स्ट्रेस टेस्ट, में रखा. इसमें सभी को बिना किसी तैयारी के सपाट चेहरे वाले लोगों के पैनल को ये समझाना था कि वो नौकरी के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार क्यों हैं.

इसके बाद उन्हें उसे उसी पैनल के आगे दिमागी अंकगणित की एक समस्या हल करनी थी.

Image caption 75 साल की उम्र के आधे लोग ब्रिटेन में अकेले रहते हैं

अकेलेपन की जांच और खून के नमूनों से पता चला कि दोनों ग्रुप में अकेले लोगों में सूजन और जलन की मात्रा अधिक थी.

मदद की ज़रूरत

डॉ जारेम्का कहती हैं, “अगर आप अकेले हैं तो स्थायी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के बावजूद आपकी सूजन और जलन बढ़ सकती है.“

“लंबे वक्त तक डॉक्टरों को ये समझने में दिक्कत हुई कि अकेलेपन का स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ता है. अब हम जानते हैं कि मरीज़ के सामाजिक बर्ताव को समझना कितना ज़रूरी है.”

अकेले लोगों की संख्या पूरी दुनिया में बढ़ रही है. इनमें से ज़्यादातर बुजुर्ग हैं जिनके परिवार दूर चले गए हैं.

75 साल की उम्र के आधे लोग ब्रिटेन में अकेले रहते हैं और दस में से एक गंभीर रुप से अकेलेपन का शिकार है.

डॉ जारेम्का कहती हैं, “अकेले होने का मतलब शारीरिक रूप से अकेले होना नहीं बल्कि जुड़ाव महसूस न होना या परवाह न किया जाना है.”

वो कहती हैं, “हमें अकेलेपन के शिकार लोगों की मदद का तरीका ढूंढना होगा. दुर्भाग्य से हम सबको ये नहीं कह सकते कि बाहर निकलो और कोई चाहने वाला ढूंढो. हमें इसके सहायक नेटवर्क बनाने की ज़रूरत है.”

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