क्या एचआईवी का इलाज संभव है?

  • 5 मार्च 2013
Image caption अमरीका में एचआईवी पीड़ित एक बच्ची का इलाज कर उसे ठीक कर लिया गया है.

अमरीका में एक जन्मजात एचआईवी संक्रमित बच्ची का इलाज कर उसे ‘ठीक’ कर लिया गया है. इस कामयाबी से उस बच्ची का जीवन अब पूरी तरह बदल जाएगा.

अब न तो उसे जीवनभर दवाएं लेनी होंगी, न ही सामाजिक दुर्भाव झेलनी होगी और न ही अपने दोस्तों और परिवार को बताने या न बताने की चिंता झेलनी होगी.

लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई इस कामयाबी से एचआईवी का इलाज संभव हो गया है?

अमरीका में मिली इस कामयाबी के साथ विशेष परिस्थितियां जुड़ी हुई हैं. पहले तो डॉक्टरों ने बच्ची में एचआईवी का पहले पता लगा लिया और शुरुआत में ही वायरस पर करारा हमला किया. लेकिन वयस्कों में इस तरह इलाज संभव नहीं क्योंकि उनमें एचआईवी का पता लगने में महीनों और कई बार तो वर्षों लग जाते हैं.

ब्रिटेन में जहां एचआईवी के संभावित ख़तरे वाले समूहों, जिनकी मुफ्त नियमित जांच की जाती है, उनमें चार में से एक व्यक्ति को पता नहीं होता कि वो एचआईवी पीड़ित हैं. जब तक उन्हें पता लगता है तब तक वायरस पूरी तरह फैल चुका होता है और प्रतिरोधी तंत्र में जड़ें जमा चुका होता है जिसका इलाज संभव नहीं हो पाता.

'किलर' नहीं

तो क्या एचआईवी का इलाज संभव नहीं?

सबसे पहले ध्यान देने वाली बात ये है कि एचआईवी अब पहले की तरह ‘घातक’ नहीं रहा.

इसके बारे में पहली बार 20वीं सदी की शुरुआत में अफ्रीका में पता चला और 1980 तक आते-आते ये वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गया.

शुरुआती दिनों में इसका कोई इलाज नहीं था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पिछले तीन दशकों में इस जानलेवा वायरस ने ढाई करोड़ से ज़्यादा लोगों की जान ले ली है.

नब्बे के दशक के मध्य में इस वायरस के खिलाफ़ ऐसी थेरेपी विकसित हुई जिसकी वजह से एचआईवी-एड्स से होने वाली मौत की संख्या में नाटकीय कमी आई.

उसके बाद पता चला कि एचआईवी से संक्रमित लोगों का अगर सही इलाज किया जाए तो उनका जीवन काल सामान्य लोगों की तरह हो सकता है. लेकिन सही इलाज की शर्त इसके मरीज़ों पर बहुत भारी पड़ती है क्योंकि एचआईवी संक्रमित लोगों का 70 फ़ीसदी सब सहारन अफ्रीका में रहता है जहां दवाओं की बहुत किल्लत है.

'कमज़ोर कड़ी'

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉक्टर जॉन फ्रेटर ने बीबीसी को बताया, “हम हमेशा सोचते थे कि एचआईवी की रोकना असंभव है. लेकिन हमने वैसी चीज़ों की खोज शुरू की जिसके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी. और अब लगता है कि ये नहीं कहा जा सकता कि एचआईवी का इलाज असंभव है.”

जब किसी व्यक्ति को पहली बार एचआईवी का संक्रमण होता है तो ये तेज़ी से फैलता है और पूरे शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है.

उसके बाद वायरस डीएनए के भीतर छुप जाता है जहां उसे छुआ नहीं जा सकता.

लेकिन अब ऐसी प्रायोगिक दवाएं मौजूद हैं जो वायरस को शरीर से बाहर निकाल सकती हैं और उसे बेअसर कर सकती हैं.

डॉक्टर फ्रेटर कहते हैं, “दवाओं से वायरस कोशिका के भीतर सक्रिय हो जाता है और प्रतिरक्षी तंत्र में नज़र आने लगता है, जहां टीके की मदद से उस पर हमला किया जा सकता है.”

हालांकि इस प्रक्रिया से इलाज के लिए ऐसी दवाओं की ज़रूरत होती है जो वायरस को सक्रिय बना सके और ऐसे टीके की ज़रूरत होती जो प्रतिरक्षी तंत्र को इसे ख़त्म करने का प्रशिक्षण दे सके.

Image caption क्या एड्स से आज़ाद दुनिया संभव है?

डॉक्टर फ्रेटर कहते हैं, “सच्चाई ये है कि हम इस स्तर तक पहुंचने के अभी काफ़ी दूर हैं.”

एक और विकल्प ये हो सकता है कि इलाज के क्रम में एक ऐसे म्यूटेशन यानी जेनेटिक बदलाव का प्रयोग किया जाए जिससे लोग एचआईवी संक्रमण से सुरक्षित हो जाएं.

साल 2007 में टिमोथी रे ब्राउन पहले ऐसे व्यक्ति बने जिनका एचआईवी वायरस के संक्रमण से पूरी तरह इलाज संभव हो सका. रक्त कैंसर के इलाज के क्रम में पहले उनके प्रतिरक्षी तंत्र को नष्ट किया गया, उसके बाद म्यूटेशन वाले एक मरीज़ के स्टेम सेल को उनमें ट्रांसप्लांट किया गया.

मरीज़ के अपने प्रतिरक्षी तंत्र को मज़बूत बनाने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद ली जा सकती है उसे वायरस के हमले से सुरक्षित किया जा सके लेकिन ये फिलहाल संभव होता नज़र नहीं आ रहा.

'अनिश्चय'

ब्रिटेन में इंपीरियल कॉलेज के एड्स वैक्सीन प्रोग्राम के प्रमुख प्रोफ़ेसर जोनाथन वेबर कहते हैं, “परिपक्व संक्रमण के मामलों में हमें कुछ जानकारी है लेकिन ये सब अभी प्रायोगिक दवाओं के स्तर पर ही है. अभी तक इस क्षेत्र में सर्वसम्मति नहीं बन सकी है और न ही कोई सीधा रास्ता नज़र आता है.”

लंदन के होमर्टन अस्पताल की कंसल्टेंट प्रोफ़ेसर जेन एंडरसन कहती हैं कि अमरीकी बच्ची के इलाज के मद्देनजर इस बारे में अभी सावधानी बरतने की जरूरत है.

प्रोफ़ेसर एंडरसन के मुताबिक,“ये बेहद खुशी का मौक़ा है लेकिन इससे आज की एचआईवी संक्रमित दुनिया का चेहरा बदला नहीं जा सकता.”

माताओं से बच्चे में संक्रमण के मामलों को दवाओं और शल्य चिकित्सा से रोका जा सकता है. लेकिन वयस्कों में ज्यादातर मामले असुरक्षित सेक्स की वजह से होते हैं.

एचआईवी एक संक्रमण है जहां बचाव इलाज से ज़्यादा आसान है.

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