किस पर है फ़ेसबुक का भविष्य गढ़ने की ज़िम्मेदारी?

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Image caption फेसबुक जल्द ही बाज़ार में अपना ग्राफ सर्च सॉफ्टवेयर लेकर आने वाला है

लार्स रैसमसन एक ऐसे आदमी हैं जिनकी ज़िंदगी लाखों-करोड़ों रास्ता भटके लोगों को रास्ता दिखाकर बनी है.

हालांकि लार्स स्वीकारते हैं कि आमतौर पर वे खुद रास्ता ढूंढने में उतने निपुण नहीं हैं.

वे हँसते हुए कहते हैं कि, मेरा दिशा ज्ञान अच्छा नहीं है. गूगल मैप्स के साथ बिताए गए अपने वक्त को याद करते हुए वे कहते हैं, ''मैं तो कभी-कभी अपने छोटे से घर में ही खो जाता हूं.''

रैसमसन की बातें सुनकर लगता है कि गूगल मैप बनाने के लिए वो सर्वाधिक गैरमुनासिब हैं. लेकिन डेनिश मूल के रैसमसन इससे साफ तौर पर इंकार करते हैं. वे कहते हैं, ''मैपिंग करते वक्त मेरा दिशा ज्ञान बेमानी है. रास्ता ढूंढते समय मेरी ज़रुरतें कई और लोगों की ज़रुरतों की ही तरह होती हैं.''

लार्स रैसमसन दो साल पहले गूगल छोड़कर फ़ेसबुक के साथ जुड़ गए थे. उनके मुताबिक फ़ेसबुक आकर उनकी गूगल की यादें ताज़ी हो गईं.

रैसमसन कहते है “दोनों ही जगहों का माहौल लगभग एक सा है, लेकिन यहां फ़ेसबुक के दफ्तर में ज्य़ादा ताज़गी है. यहां के लोग गूगल के मुकाबले अपने काम को लेकर ज़्यादा सक्रिय रवैया रखते हैं.”

एक लाख पे-एक इंजीनियर

वे कहते हैं कि गूगल मैप में काम करते हुए उन्हें जो अनुभव मिला, वो यहां के लिए उपयुक्त है.

रैसमसन के अनुसार, ''अगर आप मेरे डेस्क को देखें तो वहां आपको सबकुछ अव्यस्थित नज़र आएगा और शायद इसी कारण मैं ढूंढने में माहिर हूं.''

लगातार विस्तार कर रहे फ़ेसबुक के लिए आने वाला समय चुनौतियों से भरा हुआ है. ये चुनौती सिर्फ फ़ेसबुक इस्तेमाल करने वालों ही नहीं बल्कि फ़ेसबुक में काम करने वालों को भी है.

रैसमसन कहते हैं, “मार्क ज़ुकरबर्ग का हर 10 लाख एक्टिव यूज़र्स बनने पर एक नया इंजीनियर रखने का फ़ार्मूला बेहद दिलचस्प है. मुझे नहीं लगता कि किसी और कंपनी का अनुपात इतना बेहतर है.”

जनवरी में शुरु किया गई 'ग्राफ़ सर्च' फ़ेसबुक की अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण योजना है. इसके ज़रिए फ़ेसबुक आपके बारे में मौजूद सारी जानकारी पर पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में है.

अगर आपने साल 2006 में अपनी कोई तस्वीर फ़ेसबुक पर लगाई थी जो कहीं गुम हो गई है उसे भी ढूंढ कर निकाला जा सकता है.

डाटा है नया तेल

विशेषज्ञों की मानें तो ‘डाटा’ या जानकारी, नया 'तेल' है तो रैसमसन किसी सऊदी शहज़ादे से कम नहीं क्योंकि इस तेल को ढूंढ निकालने की क्षमता उनके पास है.

रैसमसन इस तकनीक को और बेहतर करने का वादा करते हैं.

रैसमसन कहते हैं, ''हर दिन बड़ी संख्या में जो हज़ारों पोस्ट फ़ेसबुक के न्यूज़फीड पन्ने पर नज़र आती है वो भी एक तरह का आंकड़ा है.''

ये फ़ेसबुक का सबसे बड़ा आंकड़ों का स्रोत है. इतने बडे़ स्रोत के लिए सर्च इंडेक्स बनाना ही फ़ेसबुक के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

रैसमसन बताते है “ये सब कुछ बेहद आसान तरीके से किया जाएगा, हालांकि इसमें कुछ दिक्कतें भी आएंगी, मसलन अगर आप फ़ुटबॉल या मैनचेस्टर यूनाईटेड के समर्थकों को ढूंढना चाहते हैं तो, एक सर्च में आपको ऐसे लोग मिल जाएं जो फुटबॉल के बारे में लिखते हैं.”

आप इस चतुराई पर दाद दे सकते है लेकिन रैसमसन की समस्या इसके बाद आरंभ होती है.

रैसमसन कपते है “लोगों की भावनाओं का विश्लेषण करने की तकनीक विकसित करने की ज़रुरत है, लेकिन हम अभी तक ऐसी तकनीक बनाने में सफल नहीं हो पाए हैं.”

निजता की चिंता

अगर आप इसे पढ़ रहे हैं और सोच रहे हैं कि आपको अब तक फ़ेसबुक सर्च ग्राफ क्यों नहीं मिला है तो इसकी एक वजह है.

चूंकि इससे किसी की भी निजता खतरे में पड़ सकती है, इसलिए इसे एक ख़ास वर्ग के लोगों यानि पत्रकारों को ही दिया गया है.

तो क्या फ़ेसबुक इसे लेकर पाठकों की प्रतिक्रिया पर चिंतित है.

लार्स रैसमसन कहते हैं, ''हाँ बिलकुल.''

मतलब साफ है. ग्राफ़ सर्च के बाद आपको अपनी जानकारी पब्लिक करने से पहले लाख बार सोचना होगा, क्योंकि आपकी जो जानकारी पहले काफ़ी मुश्किल से मिलती थी अब कोई भी आसानी से पा सकता है.

लार्स रैसमसन के अनुसार, ''हम फ़ेसबुक ग्राफ धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचा रहे हैं, ताकि लोग इसके बारे में बात करें, लेकिन अपनी जानकारी छापने से पहले वे सतर्क भी हो जाएं.''

इस सॉफ़्टवेयर के लॉंच होने के बाद फ़ेसबुक के पन्ने पर कुछ ऐसे खोज भी की गई हैं जो काफ़ी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं.

मसलन, ''वे शादीशुदा लोग जो वेश्यायों को पसंद करते हैं, अविवाहित महिलाएं जिन्हें शराब और पुरुषों में दिलचस्पी है या तेहरान में रह रहे ऐसे मुसलमान पुरुष जो अन्य पुरुषों में दिलचस्पी रखते हैं.''

Image caption लार्स रैसमूसन दो साल पहले गूगल छोड़कर फेसबुक से जुड़े थे

ऐसे कहानियां किसी को शर्मिंदा कर सकती हैं लेकिन ये बेहद ज़रूरी भी है, क्योंकि तभी लोग आपको पढ़ने आएंगे.

लार्स रैसमसन के अनुसार, ''एक चीज़ जिसने फ़ेसबुक को इतना सफल किया है वो है लोगों का पहली बार अपनी वास्तविक पहचान के साथ इंटरनेट पर आना. उसके पहले सबकुछ छिपा होता था.''

रैसमसन ज़ोर देकर कहते हैं ''ये एक ऐसा वातावरण तैयार करने की बात है, जहां लोगों के लिए अपनी निजी बातों को अपने दोस्तों के साथ बाँटना सुरक्षित होता है.''

निराशा की लहर

रैसमसन के लिए ये सब कुछ इतना आसान भी नहीं था. उनके नाम के साथ कुछ असफलता भी जुड़ी है.

तीन साल पहले लॉंच किया गया 'गूगल वेव' सॉफ़्टवेयर शुरुआती सफलता के बाद बुरी तरह से असफल हो गया था. 'गूगल वेव' को पिछले साल अप्रैल में बंद करना पड़ा था.

रैसमसन के अनुसार, ''मेरे लिए वो निजी तौर पर काफ़ी निराशाजनक था. मैंने उसपर काफ़ी मेहनत की थी. मुझे लगा था कि उसमें काफी संभावनाएँ थीं लेकिन वो चला नहीं.''

रैसमसन को लगता है कि मैप या ग्राफ़ सर्च की तुलना में वे सॉफ्टवेयर तैयार करने में ज्य़ादा बेहतर हैं.

उनके मुताबिक, ''अगर आप मेरी ज़िंदगी को ध्यान से देखें तो पाएंगे कि मैं अपना बहुत समय बातचीत करने, मिलने-जुलने और संपर्क स्थापित करने में लगाता हुं. मैं एक बहुत बड़े इंजीनियरों के समूह का नेतृत्व करता हूं. मैं इसमें काफी अच्छा हूं.''

इसके बाद भी मेरा इस तरह का सॉफ़्टवेयर बनाने की कोशिश में असफल होना एक विंडबना है.

रैसमसन ने इससे सीख ली है. वो कहते हैं कि भविष्य में वो केवल ऐसे ही क्षेत्रों में ही काम करेंगे जहां वो अपने आपको पूरी तरह से आत्मसात कर पाएं.

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