क्या दोबारा उग पाएंगे कटे हाथ?

वैज्ञानिक
Image caption वैज्ञानिक इस प्रयोग में जुटे हैं कि क्या जानवरों की तरह ही इंसानों के शरीर के अंग फिर से उग सकते हैं?

स्पाइडर मैन कॉमिक्स में वैज्ञानिक कर्ट कोन्नर्स अपने कटे हुए हाथ को दोबारा उगाने के लिए छिपकली के डीएनए वाला सीरम लेते हैं.

इसके बाद वो एक मानव की शक्ल वाले विशालकाय छिपकली की तरह दिखने लगते हैं और स्वभाव से भी क्रूर हो जाते हैं.

अगर बुरे असर को नज़रअंदाज़ भी कर दें तो छिपकली की यह कहानी लंबे समय से वैज्ञानिक खोज की उस लालसा को दर्शाती है जो शरीर के अंग को दोबारा उगाने की जानवरों की असाधारण शक्ति को समझ कर मानव शरीर में इस तरह की नकल या प्रयोग करने से जुड़ी है.

पर क्या ऐसा संभव है कि इंसानी शरीर का कोई अंग कट जाने पर दोबारा उग जाए?

बोस्टन के नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में पुनर्जनन जीव विज्ञान का अध्ययन करने वाले जेम्स मोनैघन का कहना है कि मनुष्य में भी यह प्रयोग संभव है हालांकि अब तक वैज्ञानिक इसमें इतने सफल नहीं हुए है.

फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में उत्तक और इंद्रियों को उगाने के अध्ययन में जुटे ऐशली सेफर्ट का कहना है, “ये अध्ययन आसान नहीं है क्योंकि लैब में आसानी से रखे जाने वाले जानवर जैसे चूहे और मुर्गी इसके लिए सही नहीं हैं, और जिन जानवरों के अंग दोबारा उग जाते हैं उन्हें लैब में रख पाना मुश्किल है, जैसे छिपकली जैसा सैलामैंडर जिसमें इंसान के मुकाबले दस गुना डीएनए होता है.”

कैसे उगते हैं अंग?

शरीर का कोई अंग कटने पर त्वचा के सबसे बाहरी हिस्से की परत की कोशिकाएं घाव को भरने के लिए ऊपर आती हैं. यह भी दिलचस्प है कि आखिर दोबारा उग रही कोशिकाओं को कैसे पता होता है कि वह कहां उगेंगी और कैसे सही शक्ल अख्तियार करेंगी?

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में विकास जीवविज्ञानी एनरिक अमाया का कहना है, “हमारी कोशिकाओं को अंदाजा है कि उनकी जगह क्या है और वे उतने 'टिशू' को दोबारा उगाती हैं जो खत्म हुआ है.”

लेकिन अंग को दोबारा उगने के लिए शरीर के साथ और बेहतर संपर्क बनाने की ज़रूरत होती है. अगर एक सालामैंडर का पैर कट जाएगा तो उसका एक नया पैर उग भी जाएगा, घाव भी भर जाएगा और समय के साथ नई हड्डियां, मांसपेशियां, नसें और त्वचा भी तैयार हो जाएंगी.

सालामैंडर जैसे जानवर जब 'टिशू' उगाना शुरू करते हैं तो ज़ख्म के नीचे की नसों के साथ संपर्क जोड़ते हैं, साथ ही मांसपेशियां भी नसों के साथ दोबारा संबंध कायम करती हैं.

सेफर्ट का कहना है कि इंसानी शरीर को ये गठजोड़ समझने में परेशानी होती है, क्योंकि उसमें नसों की व्यवस्था बेहद जटिल है.

उनके मुताबिक, "ऐसे में इंसान के हाथ पैर को दोबारा उगाने में 15-20 साल लग सकते हैं, पर एक उंगली में ये प्रयोग शायद जल्दी नतीजे दिखाए."

कैसे हुई खोज?

इस तरह की उपचारात्मक शक्तियों की खोज 1740 में हुई थी जब यह पाया कि हरे तालाब में रहने वाले जानवर के सिर के कुछ हिस्से कट जाएं तो वे खुद ब खुद उग भी जाते हैं.

उसके बाद तो वैज्ञानिकों ने यह पाया कि कई जानवरों में अपने अंग को दोबारा उगाने की क्षमता होती है.

मिसाल के तौर पर छिपकली की कटी हुई पूंछ भी उग जाती है. स्टारफिश की टूटी भुजाएं फिर से वापस आ जाती हैं और फ्लैटवर्म एक ही कोशिका से अपने पूरे शरीर को फिर से तैयार कर सकता है.

लेकिन सदियों के शोध के बावजूद अभी यह समझने में काफी वक्त लगेगा कि आखिर जानवरों के शरीर के अंग दोबारा कैसे उगते हैं और हमारे शरीर में भी यह कमाल का प्रयोग संभव है या नहीं.

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