बच्चे ने बनाया शेरों को डराने का उपकरण

आजकल रिहाइशी इलाकें जंगलों की हद तक जा पहुँचे है. अकसर आपने सुना होगा कि शेर जैसे जानवर घरों पर हमला कर देते हैं जिससे लोग खौफज़दा रहते हैं. अब कीनिया में 11 साल का लड़का एक ऐसा उपकरण बनाने में कामयाब हो गया है जिससे शेर जैसा खूँखार जानवर भी डरता है.

कीनिया में रहने वाले रिचर्ड टुरेरे ने बिना किसी मैकेनिकल या तकनीकी ट्रेनिंग के रिचर्ड ने सिर्फ़ 11 साल की उम्र में शेरों को प्रभावी ढंग से दूर रखने वाली ‘शेर लाइट’ बनाने में सफ़लता हासिल कर की है.

रिचर्ड का ये उपकरण 500 रुपये से भी कम कीमत में तैयार हो गया. इस ‘शेर लाइट’ को रिचर्ड ने टूटी हुई टॉर्च के एलईडी बल्बों, पुरानी कार बैट्री, एक सोलर पैनल और मोटरसाइकिल के लाइट इंडिकेटर बॉक्स से तैयार किया है.

इंडिकेटर बॉक्स से बल्ब टिमटिमाते हैं और रुक-रुक जलने की यही विशेषता ‘शेर लाइट’ को ख़ास बनाती है.

कीनिया वन्य जीव सेवा में परभक्षी मामलों के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ चार्ल्स मुस्योकी कहते हैं, “ दरअसल स्थिर लाइट से शेर नहीं डरते लेकिन कई स्रोतों से आने वाली टिमटिमाती रोशनी को वो ऐसा ‘गंभीर खतरा’ मानते हैं.

'शेर लाइट'

Image caption स्थानीय स्तर पर 'शेर लाइट' की नकल बनाई जा रही हैं.

उपकरण के इस्तेमाल के बाद शेरों के पालतू पशुओं पर हमले कम हुए हैं जिससे कीनिया वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच तनाव भी घटा है.

रिचर्ड का अविष्कार भले ही महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि न हो लेकिन इसकी बेहद कम कीमत, पूरी तरह स्थानीय संसाधनों से निर्माण और शेरों को प्रभावशाली ढंग से दूर रखने की काबिलियत ने व्यापक प्रभाव डाला है.

रिचर्ड अपने आस-पड़ोस में सात ‘शेर लाइट’ लगा चुके हैं और कीनिया में लोग उनके उपकरण की नकल बनाने लगे हैं.

वाइल्ड लाइफ़ डायरेक्ट की सीईओ और कीनियाई संरक्षणवादी पाउला काहुम्बु कहती हैं कि कई बार ‘शेर लाइट’ जैसे स्थानीय, घर में बनाए गए उपकरण ही सबसे बढ़िया काम करते हैं.

खौफ़ कम हुआ

Image caption रिचर्ड 11 साल की उम्र में ही 'शेर लाइट' बनाने में कामयाब हो गए थे.

पिछली जुलाई की एक घटना में अंधेरा छंटा तो नैरोबी के बाहरी इलाके में घास के मैदान में छह शेर मरे हुए मिले.दर्जन भर से ज़्यादा स्थानीय मसाई लोगों ने भालों से उनकी हत्या कर दी थी.

चैरिटी मुटुनकेई की चार बकरियों को शेर मार चुके हैं. वो कहते हैं, “हम उन्हें मारते हैं क्योंकि हमारे पास कोई और चारा नहीं है, शेर बार-बार हमला जो करते हैं.”

शेर रात में निकलकर आसानी से पकड़ में आ जाने वाले पालतू पशुओं को शिकार बनाते हैं.

कई लोगों के लिए पालतू पशु ही उनकी जीविका का आधार हैं और इन्हें बचाने के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं- चाहे इसमें शेर जैसे परभक्षी का शिकार ही क्यों न शामिल हो.

आदमी और शेर के इस संघर्ष का परिणाम ये है कि कीनिया में हर साल 100 शेरों का शिकार हो रहा है और अब वहां सिर्फ़ 2,000 शेर ही बचे हैं.

संबंधित समाचार