कैसे होते हैं सपनों के रंग?

Image caption वैज्ञानिक सपनों को पढ़ने वाली मशीन बना रहे हैं

बॉस से अपने अपमान का बदला सपने में लेने की सोच रहे हैं तो संभल जाइए... एक शोध के अनुसार जापान में वैज्ञानिकों ने सपनों को पढ़ने का तरीका खोज निकाला है.

‘साइंस’ जनरल में छपी रिपोर्ट के अनुसार जापान में शोधकर्ताओं ने एमआरआई स्कैन से नींद की शुरुआती अवस्था में देखी गई चीज़ों का अनुमान लगाया है.

रिपोर्ट के अनुसार ये अनुमान 60% तक सही बैठे हैं.

अब शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या मानसिक हलचलों से नींद के दौरान महसूस की गई अन्य बातों, जैसे कि भावनाओं, का भी अनुमान लगाया जा सकता है.

क्योटो में स्थित एटीआर कम्प्यूटेशनल न्यूरोसाइंस लैबोरेट्री के प्रोफ़ेसर युकियासु कामितानि कहते हैं, “मुझे पक्का यकीन है कि सपनों की व्याख्या की जा सकती है, कम से कम इसके कुछ भागों की... मैं इससे चकित नहीं हूं, बल्कि उत्साहित हूं.”

मानसिक हलचल

शोधकर्ताओं के दल ने तीन लोगों के सोते वक्त एमआरआई स्कैन से उन पर नज़र रखी.

जैसे ही इन लोगों को स्कैनर के अंदर नींद आई, उन्हें उठा दिया गया और याद करने को कहा गया कि उन्होंने क्या देखा था.

हर तस्वीर को, चाहे वह कोई मूर्ति हो या कार या बर्फ़ के टुकड़े या फिर कोई और अजीब लगने वाली चीज़, सभी को नोट कर लिया गया.

हर प्रतिभागी के साथ इस क्रिया को 200 बार दोहराया गया.

इसके बाद शोधकर्ताओं ने एक डाटाबेस बनाया. इसमें उन्होंने एक जैसी दिखने वाली चीज़ों को एक ग्रुप में रख दिया. उदाहरणार्थ, होटल, घर, बिल्डिंग को “भवन” नाम के एक ग्रुप में रख दिया गया.

इसके बाद शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों का फिर से स्कैन किया लेकिन इस बार जागते हुए और तब जब वह कंप्यूटर पर तस्वीरें देख रहे थे.

उन्हें संबंधित तस्वीर के साथ दिमाग की वैसी ही हलचल देखने को मिली.

ड्रीम मशीन

नींद के परीक्षणों के दूसरे दौर में शोधकर्ता दिमागी हलचलों को देखकर यह अनुमान लगाने में सक्षम थे कि प्रतिभागी नींद में क्या देख रहे हैं.

यह अनुमान कि जो तस्वीर प्रतिभागी देख रहा है वह किस ग्रुप की है, 60% तक सटीक रहे.

प्रोफ़ेसर कामितानि कहते हैं, “हम सपनों में देखी गई चीजों को जानने में सफल रहे और प्रतिभागियों की बात ने इसका समर्थन किया.”

अब शोधकर्ता गहरी नींद में झांकना चाहते हैं. माना जाता है कि उसमें सपने ज़्यादा सजीव होते हैं.

वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या दिमाग के स्कैन उन्हें भावनाओं, गंधों, रंगों और लोगों के व्यवहार का अनुमान लगाने में सहायता कर सकते हैं.

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में कॉग्निटिव न्यूरोसाइंटिस्ट डॉक्टर मार्क स्टोक्स इस शोध को ‘उत्साहवर्धक’ बताते हैं, जो हमें सपनों को पढ़ने वाली मशीन बनाने के करीब ले आया है.

वह कहते हैं, “हालांकि अभी लंबा रास्ता तय करना होगा, लेकिन सिद्धांत रूप में यह संभव है. मुश्किल काम तो देखी जा रही चीज़ और दिमागी हलचल को सुनियोजित ढंग से मापने का है.”

वह यह भी कहते हैं कि सपनों को पढ़ने का एक तरीका सबके लिए काम नहीं कर सकता.

डॉ स्टोक्स के अनुसार, “यह व्यक्तिगत रूप के किया जाना चाहिए. इसलिए आप ऐसा कोई सामान्य ढांचा नहीं बना सकते जो किसी के भी सपने पढ़ ले. अलग स्वभाव या प्रकृति के लोग हमेशा मौजूद रहेंगे, इसलिए लोगों की दिमागी हलचल कभी भी एक समान नहीं हो सकती.”

वह कहते हैं, “जैसे कि आप दूसरे के जाने बिना उसके विचार पढ़ने वाली कोई चीज़ कभी नहीं बना सकते.”

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