पासवर्ड याद रखने के झंझट से छुटकारा?

Image caption मुमकिन है कि अब आपको पासवर्ड याद रखने की जरूरत न पड़े.

तकनीक के बढ़ते चलन की वजह से आप अपना कोई भी काम इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कर सकते हैं. चाहे वो बैंक से भुगतान करना हो या फिर शॉपिंग.

ऑनलाइन गतिविधियों के लिए आपको विभिन्न फोरम में अपना खाता खोलना होता है, और हर खाते के साथ एक पासवर्ड भी बनाना होता है.

कई बार तो इतने तरह के अकाउंट बन जाते हैं कि उनके पासवर्ड को संभालना भी एक भारी भरकम काम हो जाता है.

लेकिन आने वाले दिनों में आपको अपने इलेक्ट्रॉनिक खातों को खोलने के लिए पासवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आप अपने दिमाग में सोचेंगे और आपका अकाउंट खुल जाएगा.

जो सोचेंगे, वही पासवर्ड

ये संभव होगा वायरलेस हेडसेट डिवाइस के जरिए. यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया के बर्कले स्कूल ऑफ़ इन्फॉर्मेशन के शोध वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो आपके दिमाग की तरंगों के जरिए ही आपकी वैधता को सत्यापित कर लेगा.

ये हेडसेट डिवाइस कंप्यूटर से ब्लूटूथ के जरिए भी जुड़ सकता है. जब आप इसे पहनेंगे तो आपके दिमाग के इलेक्ट्रॉनसेप्लोग्राम( ईईजी) तरंगों को कैच कर लेगा. इसके जरिए ही आप जो सोचेंगे वह पासवर्ड इसे मालूम हो जाएगा.

जॉन चुआंग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के दल ने इस डिवाइस को तैयार किया है जो करीब सौ डॉलर की कीमत पर उपलब्ध है.

शोध वैज्ञानिकों ने यूनिवर्सिटी की न्यूज़ रिलीज़ में बताया है, “हमने दिमाग की तरंगों को कैच किया है. इसमें बेहद सस्ता ईईजी सेंसर का इस्तेमाल किया गया है. इसके बावजूद ये काफी प्रमाणिकता के साथ आपकी वैधता की पहचान करने में सक्षम है.”

सुरक्षित रहेगा अकाउंट

Image caption एक से ज्यादा पासवर्ड याद रखना भी एक अलग समस्या है.

लेकिन आप जो सोच रहे हों, वही कोई दूसरा सोचे तब क्या होगा. तब क्या आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा.

तो परेशान मत होइए, आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा क्योंकि सोच समान होने के बाद भी दोनों के दिमाग की तरंग अलग अलग होंगी.

इस हेडसेट के शुरुआती प्रयोगों में शोध वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल करने वालों से सात तरह के मानसिक काम करने को कहा.

इसमें पहले तीन काम तो सभी के लिए एक समान थे, जिसमें सांस लेना, की बोर्ड पर उंगलियों के उतार चढ़ाव, आवाज को सुनने और उसके बाद की प्रतिक्रिया पर नजर रखी गई.

इसके बाद के चार अलग अलग तरह के मानसिक अभ्यासों के जरिए आदमी के मानसिक तंरगों को पढ़ने की कोशिश की है.

इसमें महज एक फ़ीसदी गड़बड़ी की आशंका बताई गई है.

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