ख़तरे में है मोटे लोगों की किडनी

  • 13 अप्रैल 2013
मोटापा
Image caption मोटापे का असर लीवर पर भी हो सकता है.

पेट पर ज़्यादा वजन सिर्फ़ आपको बेडौल ही नहीं बनाता इससे गुर्दे के रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है. अमरीकन सोसायटी ऑफ़ नेफ़्रोलॉजी के जरनल में छपे शोध में यह दावा दिया गया है.

यह पहले से ही माना जाता है कि ‘नाशपाती के आकार’ के बजाय ‘सेब के आकार’ के शरीर वालों को हृदयसंबंधी रोग होने की आशंका ज़्यादा होती है.

शोध में कहा गया है कि सामान्यतः स्वस्थ दिखने वाले मोटे लोगों में भी गुर्दे के रोग के लक्षण पाए गए हैं.

नीदरलैंड्स के ग्रोनिन्गेन विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र में शोधकर्ताओं के एक दल ने 300 से अधिक ऐसे लोगों को अध्ययन किया जिनका वजन या तो स्वास्थ्य के लिहाज से सही था या वे मोटे थे.

स्वस्थ लगते हैं, हैं नहीं

शोधकर्ताओं ने पाया कि कमर और कूल्हे का अधिक अनुपात रखने वाले मोटे लोगों के गुर्दे कम कुशलता से काम कर रहे थे. उनके गुर्दे रक्त के कम प्रवाह, और उच्च रक्त दाब से प्रभावित थे.

यह सब उन लोगों में भी पाया गया जो कि आम तौर पर स्वस्थ थे.

शोध प्रमुख अर्जन के वाकेरनाक कहते हैं, "हमें पता चला कि मोटे लोग जो कि सामान्य रूप से स्वस्थ हैं और जिनका रक्तचाप सामान्य है, उनके गुर्दों में भी उच्च रक्तचाप पाया गया है. जब वो थोड़े ज़्यादा या बहुत मोटे होते हैं तो स्थिति बदतर हो जाती है."

शोध के परिणामों के अनुसार ऐसे लोगों को गुर्दे के उच्च रक्तचाप वाले इलाज से लाभ मिल सकता है.

इसमें नमक का स्तर कम करना और आवश्यकतानुसार दवाएं देना शामिल है.

ब्रिटेन के गुर्दा शोध संस्थान के एक प्रवक्ता के अनुसार, "हम पहले से ही मानते हैं कि नाशपाती के आकार के मोटापे के बजाय सेब के आकार के मोटापे से हृदय संबंधी रोग होने की आशंका ज़्यादा होती है. इससे पता चलता है कि गुर्दा रोग के लिए भी यही सही है."

वह आगे कहते हैं, "यह इस बात का भी सबूत है कि मोटापे और बढ़ते गुर्दा रोगों के बीच संबंध है. लोगों को अपने गुर्दे को सही रखने के लिए ज़्यादा सचेत करने की ज़रूरत है."

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