क्या ज़िंदग़ी बदल देगा गूगल का चश्मा?

गूगल चश्मा
Image caption इस चश्मे पर एक छोटा कैमरा और एक डिस्प्ले लगा है

गूगल की बहुप्रतीक्षित स्मार्ट ग्लासेज परियोजना के बारे में तकनीकी दुनिया में पिछले कई महीनों से तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिरकार ये ग्लास कैसे होंगे और क्या ये अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे.

दुनियाभर में लगभग 1000 विशेषज्ञ इसके प्रोटोटाइप का परीक्षण कर रहे हैं और इनके अगले साल बिक्री के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है.

कुछ विशेषज्ञ इसे डिजिटल दुनिया में अगला कदम मानते हैं तो बाकी नेटवर्क से इतनी नजदीकी को भयावह मानते हैं.

बीबीसी ने उन लोगों के विचार जाने जो ये ग्लास आजमा चुके हैं और उनसे जानने की कोशिश की कि वे स्मार्ट ग्लासेज का क्या भविष्य देखते हैं.

डैन मैकलॉलिन, सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, एजिलेंट

मैं अमरीका के पश्चिमी तट पर ये ग्लास पहनने वाला पहला आदमी था. मैं पिछले कई हफ्तों से ये ग्लास पहन रहा हूं लेकिन अब भी इसे इस्तेमाल करने के बारे में बहुत कुछ सीखना बाकी है.

पहली बात जो मेरे दिमाग में आई वो ये थी कि ग्लास को पहनने से पहले जो बातें हमारे दिमाग में थी उनका कोई मतलब नहीं था. ये ग्लास अलग तरह का है और इसे सिर्फ ‘नया’ कहना पर्याप्त नहीं है.

व्यक्तिगत तौर पर मैं इतने कम समय में इतने अधिक लोगों से पहले कभी नहीं मिला. लोग इसे लेकर उत्सुक हैं. वे जानना चाहते हैं कि ये क्या चीज है और इसका भविष्य क्या है.

इस ग्लास से मेरा वास्ता तकनीकी था. मैं गैर पेशेवर फोटोग्राफर हूं और मुझे ये ग्लास कोई बहुत ज्यादा अलग नहीं लग रहा है. बल्कि इसे इस्तेमाल करना आसान है. मैं आसानी से फोन कॉल्स उठा सकता हूं, कैमरे से तस्वीर ले सकता हूं और ईमेल चेक कर सकता हूं. ये ऑफिस में कम्प्यूटर पर काम करने जैसा नहीं है.

मैं चाहता हूं कि भविष्य में ये मेरा काम आसान बनाए. जैसे मैं अपने कम्प्यूटर पर टास्क मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता हूं, तो क्या मैं ग्लास पर ऐसा ऐप विकसित कर सकता हूं जिससे मेरा काम आसान हो जाए? क्या मैं काम करते समय अपने किसी साथी की मदद कर सकता हूं? क्या मैं दूर रह रहे अपने परिजनों को अपनी जिंदगी के करीब ला सकता हूं? मुझे पता नहीं है कि इसकी परिणति क्या होगी लेकिन मैं इतना जानता हूं कि ये बेहद दिलचस्प होगा.

मार्क कैलिन, सीनियर एडीटर, सीबीएस इंटरेक्टिव

गूगल ग्लास को 2013 के अंत तक बिक्री के लिए तैयार होना है लेकिन मुझे अब भी इस पूरी परियोजना की सफलता पर संदेह है.

जो लोग गूगल ग्लास को लेकर उत्साहित हैं उनमें से अधिकांश मोबाइल डेवाइस के गुलाम हैं. ये ऐसे लोग हैं जो हर टेक्स्ट मैसेज का जवाब देना और हर ईमेल को पढ़ना जरूरी मानते हैं. उन्हें लगता है कि गूगल ग्लास ऐसा डेवाइस है जिसका निर्माण उनके लिए स्वर्ग में हुआ है.

सौभाग्य की बात ये है कि ऐसे लोगों की संख्या सीमित है. मेरे विचार से गूगल ग्लास एक भयावह रेसिपी की तरह है जो ऐसे लोगों की संख्या बढ़ा देगी जो सार्वजनिक स्थानों पर खुद से ही बातें करते रहते हैं. मेरा मतलब ऐसे लोगों से है जो दुनिया से बेखबर अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं लेकिन दूसरों का जीना दूभर कर देते हैं.

मुझे गलत मत समझिए. मेरा मानना है कि भविष्य में गूगल ग्लास का इस्तेमाल आम हो जाएगा. मुझे नहीं लगता है कि हर कोई रोजाना ऐसे ग्लास पहनेगा. कम से कम तब तक तो नहीं जब तक कोई मुझे ये समझा नहीं देता कि हमें ऐसा क्यों करना चाहिए.

निक पिकल्स, डायरेक्टर, प्राइवेसी कैंपेन ग्रुप बिग ब्रदर वॉच

हर ऑनलाइन सर्विस की तरह गूगल की भी कोशिश यही है कि हम खुद को गूगल का उपभोक्ता समझें. लेकिन असल में हम गूगल के उत्पाद हैं.

गूगल के उपभोक्ता ही उसका विज्ञापन करते हैं और इसी से कंपनी को 96 प्रतिशत राजस्व मिलता है.

हम गूगल की मुफ्त सेवाएं लेते हैं और अगर हम ऐसा नहीं करना चाहें तो हम कोई दूसरी सर्विस ले सकते हैं.

गूगल ग्लास में भी डेटा कलेक्शन का एक जरिया हैं. एक सेकेंड के लिए भी इस मुगालते में मत रहिए कि आपके गूगल ग्लास में जो डेटा है उस पर आपका नियंत्रण है.

आपके साथ सफर कर रहा आदमी अब कोई मुसाफिर नहीं है बल्कि वो गूगल एजेंट है.

इसके सामने सीसीटीवी कैमरा बेहद मामूली नज़र आता है. गूगल एजेंट जो कुछ देखेगा, गूगल उसे देख सकता है और उसका इस्तेमाल कर सकता है. उसके बाद क्या होगा कौन जाने?

प्रोफेसर थाड ई स्टारनर, जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी

पिछले 20 सालों से मैं हेड अप डिस्प्ले वाला कम्प्यूटर इस्तेमाल कर रहा हूं और ये मेरे दैनिक जीवन में काफी उपयोगी रहा है.

मेरी रिसर्च टीम ने यूजर्स की कम्युनिटीज बनाई हैं जहां हम ऐसे डेवाइसेज के सामाजिक और दूसरे पहलुओं पर चर्चा करते हैं.

हमने पाया कि हेड अप डिस्प्ले का इस्तेमाल करते समय कोई व्यक्ति अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर भी ध्यान दे सकता है जबकि लैपटॉप और मोबाइल फोन स्क्रीन के साथ ऐसा नहीं है.

इसे एक्सेस करने में दो सेकेंड से भी कम समय लगता है और आप किसी भी स्थिति में अहम सूचना हासिल कर सकते हैं.

भविष्य में ये तकनीक हमारी जीवन में भारी बदलाव लाएगी और हमें डेस्कटॉप जैसे डेवाइस से मुक्ति दिलाएगी.

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