स्तन कैंसर की गाज 'युवतियों पर ज़्यादा'

स्तन कैंसर की एक मरीज
Image caption अध्ययन में स्तन कैंसर का इलाज करा चुके तीन हज़ार महिलाओं को शामिल किया गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि स्तन कैंसर के युवा मरीजों के लंबे समय तक जीवित न रहने की समस्या के लिए कुछ हद तक क्लीनिकल परीक्षण की कमी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

ब्रिटेन में स्तन कैंसर का इलाज करा चुकी 40 साल से कम उम्र की तीन हज़ार महिलाओं का विश्लेषण किया गया. इस अध्ययन के लिए कैंसर रिसर्च यूके और वेसेक्स कैंसर ट्रस्ट ने वित्तीय सहायता दी थी.

अध्ययन में पाया गया कि कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के युवा मरीज़ों की हालत इलाज के पांच साल बाद पहले जैसी ही हो गई है.

पढ़िए: कैंसर के डर से एंजलीना ने हटवाए अपने स्तन

यह विरोधाभास इस तरह की बीमारियों के साथ आमतौर पर होता है.

जीवित रहने की दर

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के जर्नल में प्रकाशित आँकडों के मुताबिक़ इलाज के पांच साल बाद तक जीवित रहने की दर 80 फ़ीसदी और आठ साल तक जीवित रहने की दर 68 फ़ीसदी थी.

रजोनिवृत्ति के बाद की अधिकांश महिलाओं के स्तन कैंसर का इलाज़ तो हो जाता है. लेकिन ब्रिटेन में 40 साल से कम उम्र की केवल पाँच फ़ीसदी मरीज़ो का ही इलाज हो पाया.

अध्ययन में महिलाओं में पाए जाने वाले हार्मोन एस्ट्रोजन से बढ़ने वाले कैंसर पर भी ध्यान दिया गया. इस तरह के कैंसर में कैंसर कोशिकाएं एस्ट्रोजन ग्राही होती है.

इस तरह के कैंसर में एस्ट्रोजन ग्राही कोशिकाओं को आमतौर पर कीमोथेरेपी से ब्लॉक किया जाता है और टैमोक्सिफ़िन नामक दवा का भी उपयोग किया जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि टैमोक्सिफ़िन का लंबे समय तक उपयोग लाभदायक हो सकता है. वे कहते हैं कि मूल समस्या इस परीक्षण में और युवा मरीजों को शामिल करने की है.

अलग व्यवहार

अध्ययन की प्रमुख प्रोफ़सर डायना एलिक्स कहती है, ''यह अध्ययन इस बात के और प्रमाण देता है कि जब युवा महिलाओं के स्तन कैंसर का इलाज किया जाता है, तो यह अलग तरीके से व्यवहार करता है.''

वे कहती हैं,''उनके इलाज के लिए अलग नजरिए की ज़रूरत है, यह ज़रूरी नहीं हैं कि उन्हें कैंसर के उम्रदराज मरीज़ों के इलाज से समझा जा सके.''

कैंसर रिसर्च यूके के क्लीनिकल रिसर्च के निदेशक केट लॉ कहते हैं,''हाल के दशकों में स्तन कैंसर के इलाज के बाद जीवित रहने की दर में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है. 1970 के दशक की तुलना में इलाज के बाद कम से कम 10 साल तक जीवित रहने वाली महिलाओं की संख्या दो गुनी हो गई है. लेकिन ऐसा ही स्तन कैंसर की युवा मरीजों के बारे में नहीं कहा जा सकता है.''

(क्लिक करें बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार