पूरी तरह बदल जाएगा आपका हवाई सफ़र!

जाली जैसी बनावट वाला हवाई जहाज़ यात्रा करने का सबसे अच्छा तरीका तो नहीं लगता लेकिन यह भविष्य में यात्रा करने के अनूठे विचारों में से एक है.

स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा में हुई टेडग्लोबल कांफ्रेंस में एयरबस द्वारा डिज़ाइन किए गए एक ऐसे ही हवाई जहाज़ के मॉडल को दिखाया गया.

इंसान के कंकाल से प्रेरित यह डिज़ाइन मजबूत तो है ही तुलनात्मक रूप से हल्का भी है.

इसका अर्थ यह हुआ कि सिद्धांत रूप में यह यात्रा का ईंधन खर्च चमत्कारिक रूप से कम कर सकता है.

मॉर्फ़िंग कुर्सियां

कंपनी का लक्ष्य जहाज़ के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मिश्रित पदार्थ को थ्रीडी प्रिंट लेकर तैयार करना है.

इस कांसेप्ट हवाई जहाज़ को एयरबस के स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की एक टीम ने तैयार किया है.

भविष्य के जहाज़ों को लेकर एक दूसरा विचार जहाज़ की पूंछ को ऊपर की तरफ़ मोड़ने का है जिससे इंजन का शोर ऊपर की ओर जाए. इससे ध्वनि प्रदूषण कम किया जा सकेगा.

जहाज़ के अंदर एयरबस के इंजीनियरों ने बैठने के पारंपरिक तरीकों की बजाय नए क्षेत्रों को तैयार किया है जिनमें “मॉर्फ़िंग” कुर्सियां होंगीं. यह कुर्सियां न सिर्फ़ बैठने वालों की ऊर्जा को संग्रहित कर सकेंगी बल्कि यात्री के शरीर के मुताबिक आकार भी बदल सकेंगी.

टीम का सुझाव है कि जहाज़ के आगे की तरफ़ कुर्सियों में ऐसे सेंसर लगाए जाएं जो यात्रियों के स्वास्थ्य पर भी नज़र रख सकें. इसके अलावा एक गेमिंग ज़ोन भी बनाया जा सकता है जिस पर यात्री आभासी खेलों का आनंद उठा सकें.

सुझाव यह भी है कि आजकल के छोटे दरवाज़ों के बजाय भविष्य के जहाज़ों में ज़्यादा चौड़े दरवाज़े हों जिनसे प्रवेश करते हुए लोग अपने हाथ के थैले वहीं छोड़ दें.

ये बाद में खुद-ब-खुद उनकी कुर्सियों तक पहुंचा दिए जाएंगे. इससे गलियारों में भीड़ होने की समस्या से निजात मिल सकेगी, जिससे समय बचेगा.

अन्य सुझाव

एयरबस के इंजीनियर शाफेर कहते हैं, “भविष्य में हवाई यात्रा आदमी और पर्यावरण दोनों के लिहाज से किफ़ायती होनी चाहिए.”

हालांकि वह स्वीकार करते हैं कि सिर्फ़ डिज़ाइन से ही उद्योग की सारी समस्याएं हल नहीं हो जाएंगी.

वह कहते हैं, “हमारे पास तेल ख़त्म हो रहा है और हमें इसका हल निकालना होगा.”

“समस्या का कुछ हल तो तकनीक की मदद से निकाला जा सकता है लेकिन इसके साथ ही हमें वैकल्पिक ईंधन भी ढूंढना होगा.”

अपने खुद के कांसेप्ट हवाई जहाज़ को विकसित करने के साथ ही कंपनी ने छात्रों से पर्यावरण-अनुरूप हवाई यात्रा के विचार भी आमंत्रित किए थे. इस हफ़्ते छात्रों की पांच टीमों को चुना गया.

इनके सुझाव थे:

एक विशेष प्रकार के आकार बदलने वाले पदार्थ द्वारा इंजन में बदलाव किए जाएं जिससे इंजन से हवा के गुज़रने की राह बदलकर ध्वनि प्रदूषण कम किया जा सके.

सामान को हवा पर तैराकर ले जाया जाए.

ऊर्जा के साधन के रूप में मीथेन का प्रयोग.

शाफेर कहते हैं, “दस साल पहले लिक्विड हाइड्रोजन को इस्तेमाल करने का सुझाव आया था लेकिन हम अब भी इंतज़ार कर रहे हैं कि कोई इसके संग्रहण के लिए अच्छा सा तरीका विकसित कर सके.”

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