चीन में अंतरिक्ष से दिया गया विज्ञान पर लेक्चर

  • 26 जून 2013

चीन की दूसरी महिला अंतरिक्ष यात्री वॉन्ग यापिंग अंतरिक्ष से वीडियो लेक्चर देने वालीं चीन की पहली व्यक्ति बन गई हैं.

लाइव वीडियो के ज़रिए छात्रों से बात करते हुए वॉन्ग ने लट्टू, बॉल, पानी और साथी अंतरिक्ष यात्रियों की मदद से गुरुत्वाकर्षण विहीनता में भौतिकी के बारे में पढ़ाया.

वह टियांगगोंग-1 अंतरिक्ष प्रयोगशाला से बात कर रही थीं जहां अंतरिक्षयान, शेनझ़ाऊ फ़िलहाल खड़ा है.

चीन का पांचवां अंतरिक्ष अभियान शेनझ़ाऊ-10 25 या 26 जून तक पूरा होना है.

पानी की झिल्ली

वॉन्ग ने अंतरिक्ष में वज़न और द्रव्यमान का सिद्धांत समझाने के लिए कई प्रयोगों का सहारा लिया.

यह दिखाने के बाद कि किस तरह अंतरिक्ष में सामान्य पैमाने काम नहीं करते उन्होंने अभियान दल प्रमुख कमांडर नी हैशेन्ग का द्रव्यमान मापने के लिए एक ख़ास पैमाने का इस्तेमाल किया.

इसके लिए उन्होंने न्यूटन के गति के दूसरे नियम का इस्तेमाल किया- किसी वस्तु का द्रव्यमान, दबाव और गतिवर्धन द्वारा मापना.

Image caption धरती के मापने के पैमाने अंतरिक्ष में काम नहीं करते

एक दूसरे उदाहरण में यह दिखाने के लिए कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में वस्तुएं किस तरह चलती हैं उन्होंने अपने दल के एक साथी से खुद को 90 डिग्री पर और फिर 180 डिग्री पर घुमाने को कहा.

अंतरिक्ष में घूर्णन (अपनी धुरी पर घूमने) के लिए लट्टू का इस्तेमाल किया गया और एक धागे से बॉल लटकाकर दोलन गति को दर्शाया गया.

कक्षा की समाप्ति से पहले वॉन्ग ने अंतरिक्ष में अधिक पृष्ठ तनाव को दिखाने के लिए धातु के एक छल्ले की मदद से पानी की एक झिल्ली बनाई.

फिर उन्होंने इस झल्ली में और पानी डालकर इसे पानी की एक बॉल में बदल दिया.

उधर चीन में यह देख रहे उनके छात्र तालियां बजा रहे थे.

करोड़ों ने देखा

सरकारी मीडिया के अनुसार बीजिंग में एक ख़ास कक्षा के ज़रिए 330 प्राथमिक और माध्यमिक कक्षा के विद्यार्थियों ने यह लेक्चर देखा. यहाँ वह लाइव वीडियो फीड के द्वारा सवाल भी पूछ सकते थे.

Image caption घूर्णन गति दिखाने के लिए यांग ने लट्टू का प्रयोग किया

एक छात्र के सवाल के जवाब में वॉन्ग ने बताया कि वह अंतरिक्ष में क्या देख सकती हैं.

उन्होंने कहा, “जो तारे हम देख रहे हैं वह कहीं ज़्यादा चमकदार हैं, लेकिन टिमटिमा नहीं रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि वातावरण के चलते धरती पर तारे टिमटिमाते दिखते हैं और ऐसी बाधा उत्पन्न करने वाले वातावरण की अनुपस्थिति के कारण उन्हें तारे चमकदार दिखते हैं.

उन्होंने बताया, “आसमान यहां से नीला नहीं बल्कि काला दिख रहा है और हम रोज़ सूरज को 16 बार उगते हुए देखते हैं क्योंकि हम हर 90 मिनट में पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हैं.”

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