आनुवांशिक शोध बताएगा दमे का ख़तरा किसको ज़्यादा

दमे के आनुवांशिक ख़तरे पर हो रहे शोध के अनुसार एक ऐसी जांच विकसित की जा सकती है जिससे यह पता चल सके कि कौन से बच्चे कभी इससे मुक्त नहीं हो पाएंगे.

मेडिकल जर्नल 'द लांसेट' में छपे एक शोधपत्र के अनुसार जिन लोगों को दमा होने का आनुवांशिक खतरा ज़्यादा होता है उन्हें कम आनुवांशिक खतरे वाले लोगों के मुकाबले जीवन भर दमे से परेशान होने की आशंका 36 प्रतिशत ज़्यादा होती है.

हालांकि शोध यह भी कहता है कि इसे एक विश्वसनीय क्लिनिकल टेस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाना जल्दबाज़ी होगी.

धर्मार्थ संस्था अस्थमा यूके का कहना है कि यह निष्कर्ष उन लोगों की पहचान में सहायक हो सकते हैं जिनका दमा गंभीर हो सकता है.

लंबा है सफ़र

उत्तरी केरोलिना के ड्यूक विश्वविद्यालय की एक टीम के इस शोध में इंसानी जीनों के समूह में 15 ऐसी जगहों की पहचान की गई जो दमे से जुड़ी हुई हैं.

इससे पहले न्यूज़ीलैंड स्वास्थ्य विभाग ने 1,000 लोगों के जन्म से ही अध्ययन किया था. उसके निष्कर्षों को ताजा अध्य्यन के साथ मिलाकर देखा गाय तो शोधकर्ता 880 लोगों पर दमे के आनुवांशिक खतरे की पहचान कर सके.

इसके बाद उन्होंने बचपन से लगभग चालीस साल तक इन लोगों के दमे की स्थिति और उसके विकास को देखा.

जिन लोगों को इस बीमारी का आनुवांशिक रूप से ख़तरा ज़्यादा था, उनका दमा बचपन से ही गंभीर था और अधिकतर मामलों में उन्हें फेफड़ों का संक्रमण भी हो गया था.

उन्हें दमे की वजह से स्कूल या काम से छुट्टी भी लेनी पड़ती थी और अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ता था.

अभी तक ऐसी कोई जांच नहीं है जो बता सके कि कौन सा बच्चा बड़ा होने पर दमे से छुटकारा पा सकेगा.

जीन विज्ञान और उससे जुड़ी नीति के ड्यूक संस्थान में वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ डेनियल बेल्स्की कहते हैं कि गंभीर दमे के पूर्वानुमान की जांच के बारे में कहना जल्दबाज़ी होगी.

वह कहते हैं, “हालांकि हमारे शोध से यह पता चलता है कि आनुवांशिक खतरों से यह अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन बच्चा दमे से मुक्ति पा सकता है और किसे पूरी ज़िंदगी इससे जूझना पड़ेगा.”

वह यह भी कहते हैं, “दमे को लेकर आनुवांशिक खतरों के अनुमान अभी शैशवावस्था में हैं. जैसे ही ख़तरा पैदा करने वाले अन्य जीन्स का पता चलता है, आनुवांशिक ख़तरों के अनुमान बेहतर होते जाएंगे.”

वह कहते हैं कि इलाज के लिए सामान्य इस्तेमाल में आने के लिए आनुवांशिक ख़तरों के अध्ययन को अभी लंबा सफ़र तय करना है.

हालांकि वह कहते हैं कि यह अध्ययन दमे को बेहतर ढंग से समझने और इलाज की राह प्रशस्त कर सकता है.

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