खाते समय बच्चों से बातें बढ़ाती है आत्मविश्वास

ब्रिटेन
Image caption अभिनेत्री नताली कसिदी अपनी बच्ची के लिए खाना बनाती हुई.

ब्रिटेन में राष्ट्रीय साक्षरता संगठन के अनुसार अगर खाते वक्त बच्चों के साथ बातचीत की जाए तो उनमें संवाद का कौशल विकसित होता है.

ब्रिटेन में करीब 35,000 बच्चों पर राष्ट्रीय साक्षरता संगठन ने एक अध्ययन किया है. इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो बच्चे परिवार के साथ बैठकर खाना खाते हैं और आपस में बातें करते हैं, वे आत्मविश्वास से भरे होते हैं.

अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि प्रत्येक चार में से एक से ज्यादा बच्चे खाना खाते वक्त अपने परिवार से संवाद करने से वंचित रह जाते हैं.

अभिनेत्री, मां और शिक्षा प्रचारक नताली कसीदी ने बताया, “जिस तरह खाना हमारे शरीर का ईंधन होता है. उसी तरह संवाद हमारे मस्तिष्क का.”

कसीदी प्रत्येक माता-पिता से गुजारिश करती हैं, “आपके पास अगर वक्त की कमी भी हो, तो भी अपने बच्चे के साथ कम से कम 10 से 15 मिनट जरूर बैठें और बातें करें.”

सार्थक संवाद

नताली कसिदी कहती हैं, “बातें करना और सुनना सीखने की ओर बढाया गया पहला कदम है.”

ब्रिटेन के 188 स्कूलों के आठ से 16 साल के बच्चों ने पिछले साल अध्ययन से जुड़े सवालों के जवाब अपनी कक्षा में दिए.

इस तरह के सवाल जवाब से जो जानकारियां जुटाई गईं उनमें कई बातें सामने आई. इसके अनुसार बच्चों के साथ बैठकर खाना नहीं खाने की अपेक्षा खाते समय चुप करना बच्चे के आत्मविश्वास पर ज्यादा बुरा असर डालती है.

Image caption चार में से एक से ज्यादा बच्चे खाना खाते वक्त अपने परिवार से संवाद करने से वंचित रह जाते है.

अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि खाते वक्त अपने परिवार के साथ बातचीत करने वाले 100 बच्चों में से 62 बच्चे किसी ग्रुप के सामने ज्यादा आत्मविश्वास से बोलते हैं. जबकि खाते समय चुप रहने वाले 100 बच्चों में से केवल 47 बच्चे और परिवार के साथ बैठकर खाना नहीं खाने वाले 100 में से 52 बच्चे ही ग्रुप के सामने बोलते वक्त आत्मविश्वास दिखा पाते हैं.

अगर कक्षा में आयोजित किए जाने वाले वाद-विवाद की बात करें तो, परिवार के साथ बैठकर भोजन करने और बातचीत करने वाले 100 में से 75 बच्चे बेहद आत्मविश्वास के साथ बहस में हिस्सा लेते हैं. वहीं साथ में बैठकर चुपचाप खाना खाने वाले केवल 57 बच्चे और अकेले खाना खाने वाले 64 बच्चे ही बहस में आत्मविश्वास के साथ बोल पाते हैं.

सफल और खुशहाल जीवन

शोध के अनुसार करीब 87 फीसदी बच्चे और युवा अपने परिवार के साथ बैठकर खाना तो खाते हैं, मगर हर दिन खाते वक्त केवल 74 फीसदी बच्चे ही बात करते हैं. 7 फीसदी बच्चे तो एकदम चुप होकर खाते हैं.

राष्ट्रीय साक्षरता संगठन अपने अभियान ‘शब्दों से जीवन है’ (वर्ड्स फॉर लाइफ) के जरिए माता पिताओं में इस बात की जागरुकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है कि वे बच्चों में बोलने और सुनने का कौशल जगाएं. वे उन्हें बताते हैं कि इसकी शुरुआत वे ‘खाना खाते समय हल्की-फुल्की बातचीत’ से करें.

संगठन प्रमुख जोनाथन डगलस ने कहा, “हमारे शोध का निचोड़ कहता है कि बच्चों और युवाओं की सफलता के लिए घर में उनके साथ किए जाने वाले संवाद बेहद महत्वपूर्ण होते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “खाते वक्त बच्चों के साथ बातचीत और संवाद उनमें सफल और खुशहाल जीवन के लिए जरूर प्रतिभा विकसित करने में बेहद कारगर साबित होते है.”

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