ख़तरे में क्यों हैं हिम तेंदुए?

बर्फीला तेंदुआ
Image caption ख़ाने की कमी और शिकार की वजह से बर्फीले तेंदुए ख़तरे में हैं

दुनिया भर में कश्मीरी ऊन की बढ़ती मांग ने बर्फीले तेंदुओं को ख़तरे में डाल दिया है. वजह है कश्मीरी बकरियों का बर्फीले तेंदुओं के प्राकृतिक आवास और उनके शिकारों की जगह लेना.

कश्मीरी ऊन की बढ़ती मांग की वजह से मध्य एशिया में बीते 20 साल में कश्मीरी बकरियों की तादाद तीन गुना हो गई है.

कंजर्वेशन बायोलॉजी नाम के साइंस जर्नल में छपे पेपर के मुताबिक इससे उन जानवरों के लिए भी जोखिम बढ़ा है जो पहले ही ख़तरे में हैं.

असल में कश्मीरी बकरियां अपने ख़ाने के लिए दूसरे शाकाहारियों जैसे हिरण, तिब्बती चिरु और हिमालयी भराल से होड़ करती हैं. दूसरे शाकाहारियों की तादाद में गिरावट की वजह से हिमालयी तेंदुए कश्मीरी बकरियों का शिकार करने पर मजबूर हुए हैं.

आजीविका का स्त्रोत

कश्मीरी बकरियों के चरवाहे अपनी बकरियों को बचाने के लिए बर्फीले तेंदुओं का शिकार कर रहे हैं.

Image caption दुनिया भर में कश्मीरी बकरियों से मिलने वाले ऊन की मांग बढ़ी है

इस शोध के लेखक चारुदत्त मिश्रा का कहना है कि कश्मीरी ऊन मध्य एशिया में स्थानीय समुदायों के लिए जीविका का बड़ा स्रोत है.

चारुदत्त मिश्रा का मानना है कि चरवाहे अपनी रोज़ी-रोटी के लिए ये सब कर रहे हैं लेकिन कम अवधि का ये आर्थिक लाभ स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है.

चारुदत्त मिश्रा का कहना है कि कश्मीरी ऊन का उत्पादन नई बात नहीं है लेकिन बीते 20 सालों में इसकी मांग जबरदस्त तरीके से बढ़ी है.

चारुदत्त मिश्रा का कहना है कि कश्मीरी ऊन से बने कपड़ों को लेकर जागरुकता लाने और स्थानीय समुदायों और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों को साथ लाने की ज़रूरत है ताकि जंगली और पालतू जानवर साथ आ सकें.

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