फ़ेसबुक से पैसा 'वसूलने' में भारतीय दूसरे नंबर पर

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Image caption फ़ेसबुक वेबसाइट की त्रुटियों पर नजर रखने वालों को देता है ईनाम.

सोशल नेटवर्किंग कंपनी फ़ेसबुक ने बताया है कि पिछले दो साल में उसने अपनी प्रोग्रामिंग में खामियाँ बताने वाले शोधकर्ताओं को एक मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की राशि इनाम स्वरूप दी है.

फ़ेसबुक अपने 'बग बाउंटी प्रोग्राम' के तहत वेबसाइट की त्रुटियाँ बताने वालों को पैसा देता है. फ़ेसबुक की त्रुटियाँ बताकर पैसा 'वसूलने' के मामले में भारतीय दूसरे नंबर पर हैं.

भारत में करीब 7.8 करोड़ फ़ेसबुक यूजर हैं. फ़ेसबुक के बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत पैसा वसूलने वालो में भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

फ़ेसबुक के मुताबिक वेबसाइट को सुरक्षित और साफ़ रखने में मदद करने वाले शोधकर्ताओं को बढ़ावा देने के लिए दो साल पहले बग बाउंटी प्रोग्राम शुरू किया गया था.

बग (त्रुटि या वॉयरस) सॉफ्टवेयर को क्रैश कर देते हैं या अप्रत्याशित नतीज़े देने के लिए मजबूर कर देते हैं. कुछ बग सिस्टम में अनाधिकारिक प्रवेश भी कर लेती हैं.

फ़ेसबुक की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "यह कार्यक्रम हमारी उम्मीद से ज्यादा कामयाब रहा. हमने एक मिलियन डॉलर से अधिक राशि ईनाम स्वरूप दी है और हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम से बग खत्म करने के लिए दुनियाभर के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काम किया है."

एक बग ने कर दिया फ़ेसबुक को शर्मिंदा

13 साल का बच्चा

फ़ेसबुक के मुतबिक 329 लोगों को बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत ईनाम दिया गया. इनमें कुछ पेशेवर प्रोग्रामर, छात्र और पार्ट टाइम प्रोग्रामर शामिल थे. ईनाम पाने वाले में सबसे कम उम्र का एक 13 साल का बच्चा भी शामिल है.

सबसे ज्यादा पैसा पाने वाले देशों में क्रमवार अमरीका, भारत, ब्रिटेन, तुर्की और जर्मनी शामिल हैं.

51 देशों के लोगों ने बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत ईनाम राशि पाई लेकिन कुल ईनाम राशि की बीस प्रतिशत सिर्फ अमरीकी प्रोग्रामरों ने ही जीत ली.

हाल ही में फ़ेसबुक में एक सुरक्षा संबंधी त्रुटि बताने वाले को मोटी रकम चुकाई गई थी. इस व्यक्ति ने फ़ेसबुक के डाटा आर्काइव में आई एक गड़बड़ी के बारे में जानकारी दी थी.

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