आख़िर कैसा स्वाद है लैब में तैयार हुए बर्गर का?

लैब में बना बर्गर

प्रयोगशाला में बना पहला बर्गर दुनिया के सामने पेश किया जा चुका है. प्रयोगशाला में तैयार किए गए इस बर्गर को अब दो विशेषज्ञों ने चखा है.

सबसे पहले तो एक टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले फ़ूड शो में इसे पकाया गया. शो की प्रस्तोता नीना हुसैन ने बहुत से सवाल भी पूछे.

शो में शेफ़ रिचर्ड मैकगोवान को पैटी को फ़्राई करने का काम सौंपा गया था. उसे फ़्राई करते हुए उन्होंने बर्गर के शानदार रंग और ज़ायकेदार खश्बू पर टिप्पणी की. लेकिन पत्रकारों ने कहा कि बर्गर की खुश्बू उनके नाक तक नहीं पहुँच रही है.

उन्होंने कहा,''यह वास्तव में किसी और बर्गर को पकाने जैसा ही है, जैसा कि मेरा पहले का अनुभव रहा है.एक अच्छी और ज़ायकेदार खुश्बू. लेकिन इस स्टेज पर बहुत तेज़ है.''

संवर्धित मांस

बर्गर को विकसित करने वाली टीम का कहना है कि यह गाय से लिए गए स्टेम सेल से तैयार किया गया संवर्धित मांस है और इस तरह हम लोगों को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मांस खिला सकते हैं.

लेकिन अब इसे पहली बार चख लिया गया है.ऐसे में यह मानना ग़लत नहीं होगा कि बर्गर की स्थानीय दुकान से चिप्स के साथ इसका आर्डर दे सकते हैं.

मास्ट्रिच विश्वविद्यालय के मार्क पोस्ट और इस पैटी को बनाने वाले ने पहले कहा था कि अगर यह वास्तविक चीज़ की तरह दिखा, लगा और स्वाद हुआ तो यह सफलता होगी.

यह ज़रूर कहा जाना चाहिए कि संवर्धित मांस सही बर्गर की तरह दिखने लगा. लेकिन एक पारंपरिक बर्गर की तुलना में इसका रंग ब्राउन होने में अधिक समय लगा. इसके ब्राउन होने के लिए कुछ हद तक फ़्राइंग पैन में डाले गए मक्खन को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

फ़्यूचर फूड स्टूडियो के खाद्य विशेषज्ञ हैनी रूट्जलर इसके एक टुकड़े को चखा, जबकि प्रोफ़ेसर पास्ट सवालों के जवाब दे रही थीं. उन्होंने पहले इसे सूंघा और फिर कांटे को उसमें धंसाया जैसे उसकी कठोरता को परख रही हों.

कुछ देऱ चबाने के बाद उन्होंने कहा कि वह इसके मुलायम होने की उम्मीद कर रही थीं. बाद में उन्होंने इसके कुरकुरेपन पर टिप्पणी की.

उन्होंने,''यह मेरे लिए मांस है. यह वास्तव में कुछ खाने वाला है. मुझे लगता है कि यह पूरी तरह समान दिखता है.''

वो कहती हैं,''लगता है कि इसका बाहरी हिस्सा मक्खन की तरह है. इसके अंदर मांस के तीव्र स्वाद जैसा कुछ नहीं है. यह मांस है, सोयाबीन के नकली मांस जैसा नहीं.''

पूरी तरह अलग

Image caption चखने के दौरान इस पत्रकारों ने भी टेस्ट के लिए मांगा

इस बर्गर को चखने वाले दूसरे व्यक्ति थे खानपान पर लिखने वाले जोश स्नोवाल्ड. उन्होंने कहा,''यह पूरी तरह अलग है. मसाले और वसा की कमी की वजह से, इसका स्वाद पारंपरिक हैमबर्गर की तरह है.''

लेकिन उनके लिए इसे टोमैटो कैचअप, प्याज़ और सूअर के गोश्त के बिना खाना थोड़ा मुश्किल है.

इसमें मिलाया गए ब्रेड के चूरे. अंडे के पाउडर और मसाले ने निश्चित रूप से इसके स्वाद को बढ़ाने में मदद की होगी. चुकंदर और केसर के जरिए इसे रंग प्रदान किया गया था, क्योंकि स्टेम सेल की वजह से इसका रंग अप्रिय नजर आता है.

बर्गर अभी आधा ही खाया गया था कि पत्रकारों ने इसका टुकड़ा मांगना शुरू कर दिया. लेकिन जो बचा हुआ था, वह उनमें बांटने के लिए काफी नहीं था. इसलिए प्रोफ़ेसर पास्ट ने उनसे कहा कि वे अपने बच्चों के लिए कुछ बचाकर रखना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि वे बर्गर को चखने वाले दोनों लोगों की टिप्पणियों से खुश हैं और उनकी टीम वसा की कमी पर काम कर रही है.

इसे शाकाहारी लोग खा सकते हैं या नहीं, यह तो अभी बहस का मुद्दा है.लेकिन प्रोफ़ेसर पास्ट ने कहा कि उनकी टीम ने इसे गाय का मांस खाने वालों के लिए बनाया है.

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