'अब मच्छर काट नहीं पाएंगे'

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मानव त्वचा में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला एक रसायन ही मच्छरों को दूर रखने का विकल्प साबित हो सकता है, ये कहना है शोधकर्ताओं का.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस रसायन को लगाने से इंसान कीड़ों के लिए "अदृश्य" हो जाता है.

अमरीकन केमकिल सोसायटी की बैठक में शोधकर्ताओं ने ऐसे पदार्थों के बारे में जानकारी दी जिनसे मच्छरों की अपने शिकार को सूंघने की क्षमता रुक जाती है.

जब इन रसायनों को लगाकर एक हाथ को मच्छरों से भरी जगह में रखा गया तो मच्छरों ने उसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया.

शोधकर्ताओं की इस टीम का कहना है कि उनके शोध से घातक बीमारियों का फैलाव रोकने में मदद मिल सकती है.

मच्छर बीमारी फैलाने वाले सबसे ख़तरनाक प्राणियों में से एक हैं और वे मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां फैलाते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक मलेरिया से साल 2010 में 6 लाख 60 हज़ार लोगों की मौत हुई थी.

यह शोध पेश करने वाले अमरीकी कृषि विभाग के अलरिच बर्नियर ने कहा कि उनकी टीम 'डीट' नाम के मच्छर रोधी रसायन का विकल्प ढूंढ़ रही है. कई लोग इस रसायन को लगाना पसंद नहीं करते.

डीट अपना प्रभाव छोड़ता जा रहा है

'भिनभिनाहट से मुक्ति'

इसी साल कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि 'डीट' अपना असर खो रहा है.

डॉक्टर बर्नियर कहते हैं, "मच्छरों के काटने से बचने के लिए मच्छर दूर भगाने वाले रसायन प्रमुख आधार रहे हैं, लेकिन हम मच्छरों की सूंघने की क्षमता को कमज़ोर करने वाले रसायनों का इस्तेमाल कर एक दूसरा रास्ता ढूंढ रहे हैं. "

ये बात लंबे समय से मालूम है कि मच्छरों को कुछ लोग दूसरे लोगों की तुलना में ज़्यादा लुभाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐसे रसायनों के समूह को निर्धारित किया है जिसका स्राव प्राकृतिक रूप से होता है और जो मच्छरों को इंसानों की गंध का पता नहीं चलने देते.

डॉक्टर बर्नियर ने बताया कि त्वचा पर सैकड़ों रसायन होते हैं जो किसी व्यक्ति में पाई जानेवाली गंध बनाते हैं.

ये पता करने के लिए कि मच्छरों को कौन-सी गंध आकर्षित करती है, उनकी टीम ने पिंजरे के एक ओर कई पदार्थों का छिड़काव किया.

Image caption रसायन लगाने पर मच्छरों से भरे एक पिंजरे में हाथ रखने पर भी मच्छर आकर्षित नहीं हुए.

जिन रसायनों ने मच्छरों को आकर्षित नहीं किया, उन पर वैज्ञानिकों ने और काम किया और जब इन रसायनों का छिड़काव इंसानों के हाथ पर किया गया तो मच्छरों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न काटने की कोशिश की.

मच्छरदानी भी बेकार साबित हुई

सूंघने की क्षमता पर असर

मेथिलपिपरज़ीन सहित ये रसायन मच्छरों की सूंघने की क्षमता पूरी तरह से रोक सकते थे.

डॉक्टर बर्नियर का कहना है कि ये रसायन कई तरह के लोशन और प्रसाधन सामग्रियों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

डॉक्टर बर्नियर कहते हैं, "अगर आप मच्छरों से भरे एक पिंजरे में हाथ डालें जिसमें हमने कुछ रसायनों का छिड़काव किया है तो सभी मच्छर पीछे की दीवार पर बैठे रहते हैं और उन्हें हाथ वहां होने का अंदाज़ा नहीं रहता. हम इसे इनोस्मिया या हाइपोस्मिया कहते हैं यानी गंध सूंघने की अक्षमता या गंध सूंघने में परेशानी होना."

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के जेम्स लोगन ने कहा कि वाकई ये पता करना काफ़ी रोमांचक था कि कौन से रसायन मच्छरों को दूर भगाते हैं.

जेम्स लोगन कहते हैं, "हालांकि बाज़ार में पहले ही मच्छर दूर भगाने वाले अच्छे रसायन हैं, लेकिन अब भी नए सक्रिय घटकों के लिए जगह है. चुनौती ये है कि पहले से मौजूद मच्छर दूर भगाने वाले रसायनों की गुणवत्ता कैसे बढ़ाई जाए."

हालांकि उनका कहना है कि किसी नए उत्पाद के बाज़ार में आने में कई साल लग सकते हैं.

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