क्या आप भी गाने सुनने के लिए उठाते हैं मोबाइल?

  • 20 सितंबर 2013

इंटरनेट की दुनिया में भारत तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, वो भी तब जब देश के केवल दस फ़ीसदी लोगों तक इंटरनेट पहुंचा है.

जब देश की एक बड़ी आबादी डिजिटल बन रही है तो लाज़मी है कि इसका असर देश के सबसे प्रमुख उद्योगों में से एक, फ़िल्म और म्यूज़िक पर भी पड़ेगा.

रिसर्च कंपनी कॉम्सकोर के ताज़ा आंकड़ों पर नज़र डालेंगे तो पता चल जाएगा कि डिजिटल इंटरटेनमेंट यानी इंटरनेट या मोबाइल के ज़रिए वीडियो और ऑडियो देखने-सुनने का तौर-तरीक़ा कितना बदल चुका है.

कॉमस्कोर के आंकड़े कहते हैं कि बीते एक साल में क़ेरीब पांच करोड़ चालीस लाख वीडियो ऑनलाइन यानी इंटरनेट पर देखे गए.

भारत में ऑनलाइन वीडियो बाज़ार के 55 फ़ीसदी हिस्से पर यू-ट्यूब का क़ब्ज़ा है, जबकि फ़ेसबुक, याहू और डेली मोशन जैसी वेबसाइटों का हिस्सा बाक़ी के मार्केट शेयर में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के तौर पर सबसे ज्यादा है.

ऑनलाइन वीडियो

कॉमस्कोर के अनुसार ऑनलाइन वीडियो के भारत में दस सबसे बड़ी प्रदाताओं में सिर्फ़ एक भारतीय कंपनी है, टाइम्स ग्रुप.

भारत में इंटरनेट पर आने वाले लोगों की औसत उम्र भी बाक़ी ब्रिक्स (ब्रज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों से कम है, लिहाज़ा इंटरनेट पर उनके आकर्षण का भी एक बड़ा केंद्र बॉलीवुड है.

ऑनलाइन वीडियो-म्यूज़िक उद्योग के जानकार अभिषेक गुरेजा बताते हैं, "यूज़र अपनी दिनचर्या में व्यस्त है. सुबह गाड़ी से, बस से या जिस भी तरीक़े से ऑफ़िस जाता है, उसके पास यहीं ख़ाली समय है जिसे वो मोबाइल पर बिता सके, उसके पास और ज्यादा वक़्त नहीं है. तो ऐसे समय के लिए मोबाइल पर चल पाने वाला छोटा कंटेंट दिया जाए जो उसे भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा."

बीते एक वर्ष में इंटरनेट पर आने वालों में से 74 फ़ीसदी यूज़र्स कभी न कभी इंटरटेनमेंट वेबसाइटों पर गए हैं.

तो अगर ये कहा जाए कि, इंटरनेट ने ऑडियो-वीडियो देखे जाने का तरीक़ा बदल दिया है, तो ये ग़लत नहीं होगा.

इंटरनेट पर म्यूज़िक

नए फ़िल्मों के एमपी3 गाने हों या हाई डेफ़िनेशन वीडियो, सभी इंटरनेट पर मुफ़्त में उपलब्ध है.

गाना डॉट कॉम, सावन डॉट कॉम और इन डॉट कॉम जैसी वेबसाइटों पर फ़िल्मी संगीत मुफ़्त में ऑनलाइन सुना जा सकता है.

Image caption बीते कुछ वर्षों में मोबाइल गेमिंग का भी कारोबार काफ़ी फला-फूला है.

ऑनलाइन वीडियो की बात करें तो, यूट्यूब किसी अलाउद्दीन के चिराग़ से कम नहीं है. चाहे जिस भी विषय या फ़िल्म से संबंधित वीडियो ढूंढ रहे हों, यूट्यूब में उससे संबंधित कोई ना कोई वीडियो ज़रूर मिल जाएगा.

पिछले साल भर में इंटरनेट पर ऑनलाइन वीडियो देखने वालों की संख्या में 27 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है.

इंटरनेट यूज़र्स बढ़ने के साथ ही गानों की पायरेसी के उद्योग ने भी अपनी जड़ें मज़बूत की है.

कॉमस्कोर के अनुसार ज़्यादातर जगहों पर प्रतिबंधित वेबसाइट सॉन्ग्स डॉट पीके का भारत में इंटरनेट ऑडियो-वीडियो बाज़ार में क़रीब दस फ़ीसदी का हिस्सा है.

मुफ़्त में संगीत की उपलब्धता के बीच इसे वैध तरीक़े से ऑनलाइन बेचे जाने की भी कोशिशें की गईं, हालांकि इनमें से कई अब बंद हो चुकी हैं.

ऑनलाइन म्यूज़िक सेल

ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट फ़्लिपकार्ट ने एमपी3 संगीत बेचने की एक सेवा, फ्लाइट शुरू की जिसे कुछ ही महीने पहले बंद कर दिया गया. लेकिन ऐपल की सेवा आईट्यून्स इस दौड़ में अभी तक बनी हुई है और तटस्थ दिख रही है.

अगर समूचे म्यूज़िक उद्योग की बात करें तो रिसर्च एजेंसी केपीएमजी के अनुसार अकेले भारत में ये उद्योग क़रीब साढ़े दस अरब रूपए का है. गेमिंग उद्योग इससे भी ज़्यादा 15.3 अरब रूपयों का है, जबकि एनिमेशन और ग्राफिक्स उद्योग का 35.3 अरब रूपयों का बाज़ार है.

ज़ाहिर है कि अगर इंटरनेट की मूलभूत सेवा और कंप्यूटर, डिवाइसेस का प्रसार भारत में सुनियोजित तरह से हुआ तो इन क्षेत्रों में भारत एक बड़ी शक्ति बनकर उभर सकता है.

इसके संकेत भी अभी से दिख रहे हैं. रिसर्च कंपनी कॉम्सकोर के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में इंटरनेट का दायरा पिछले साल के मुक़ाबले 31 फ़ीसदी बढ़ा है.

सिर्फ़ ऑनलाइन ही नहीं, मोबाइल पर भी डिजिटल मनोरंजन के लिए नए उत्पाद बनाए जा रहे हैं. हाल ही में मोबाइल कंपनी एयरटेल ने ग्राहकों को एक रूपए में वीडियो देखने का ऑप्शन दिया है. थोड़ी महंगी, लेकिन ऐसी ही सेवा लगभग बाक़ी सभी मोबाइल कंपनियां भी दे रही हैं.

रिसर्च कंपनी आईएएमएआई-आईएमआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वैल्यू ऐडेड सर्विसेस का बाज़ार साल 2013 में क़रीब साढ़े चार अरब डॉलर यानी लगभग 29 हज़ार करोड़ का आंकड़ा छू लेगा.

वैल्यू ऐडेड सर्विसेस

वैल्यू ऐडेड सर्विसेस में कॉलर ट्यून, शिक्षा, वीडियो, म्यूज़िक और वॉलपेपर डाउनलोड जैसी सेवाएं शामिल है.

इस क्षेत्र में ख़ासा दख़ल रखने वाली कंपनी हंगामा डिजिटल के प्रमुख, नीरज रॉय मानते हैं कि मोबाइल और स्मार्टफ़ोन यूज़र्स सिर्फ़ कॉल या एसएमएस ही नहीं बल्कि मनोरंजन और जानकारी के लिए भी इसका उपयोग करते हैं.

वो बताते हैं, "सारे डिवाइसे चाहे टैबलेट हो या स्मार्टफ़ोन, इनमें मोबाइल इंटरनेट की क़ाबिलीयत होती है. इससे आप गाने सुन सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं, गेम्स, एप्लिकेशन देख सकते हैं. पूरी दुनिया में ये क़रीब 60-65 अरब डॉलर का उद्योग है."

Image caption भारत के शहरी इलाकों में स्मार्टफ़ोन की बिक्री में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है.

स्मार्टफ़ोन्स के आने से डिजिटल एंटरटेनमेंट क्षेत्र को भारी फ़ायदा हुआ है.

नीरज रॉय बताते हैं, "स्मार्ट डिवाइसेस काफ़ी आसान हो गए हैं. दो साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुज़ुर्ग तक, आज कल सभी बड़ी आसानी से उसे इस्तेमाल करते है. आसान फ़ीचर आने से ये स्मार्टफ़ोन बहुपयोगी हो गए हैं."

स्मार्ट डिवाइसेस जितने ज्यादा लोगों के पास होंगे, डिजिटल मनोरंजन का क्षेत्र उतना ही फलेगा-फूलेगा. चुनने का अधिकार यूज़र्स के पास होगा कि वो क्या देखना-सुनना चाहता है और क्या नहीं.

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