सूरज की गर्मी सी, मुट्ठी में क़ैद

अमरीका में शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में अपने आप लगातार जारी रहने वाली नाभिकीय संलयन या फ़्यूज़न की प्रक्रिया में खपत से ज़्यादा ऊर्जा हासिल कर एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है.

फ़्यूज़न वो प्रक्रिया है जिसमें दो अलग- अलग परमाणु जुड़ कर एक अणु का निर्माण करते हैं, जबकि नाभिकीय विखंडन या फ़ीज़न में इसके विपरीत परमाणु टूट जाते हैं. लेकिन इन दोनों ही प्रकिया में समानता इसके परिणाम पर हैं जिसमें भरपूर ऊर्जा निकलती हैं.

ब्रह्मांड में ऊर्जा का सबसे बड़ा और असीमित स्रोत सूर्य है. सूर्य पर अनवरत फ़्यूज़न प्रकिया चलती रहती है, इससे निकलने वाली ऊर्जा से ही पृथ्वी को रोशनी और गर्मी मिलती है.

नेशनल इग्निशन फैसिलिटी (एनआईएफ़) के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में फ़्यूज़न को बढ़ाने वाली प्रक्रिया का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.

कैलिफ़ोर्निया में लिवरमोर में स्थित एनआईएफ़ के शोधकर्ताओं ने फ़्यूज़न की प्रक्रियाओं को परखने के लिए दुनिया की सबसे शक्तिशाली लेज़र किरणों का इस्तेमाल किया.

192 किरणों को कंप्रेस (संघनित) कर हाइड्रोजन ईंधन से भरे छोटे कक्ष में भर दिया, इसके बाद पाया गया कि फ़्यूज़न की प्रक्रिया होने लगी.

सितंबर के आख़िरी दिनों में किए गए इस परीक्षण के दौरान जितनी ऊर्जा निकली वो इस प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई ऊर्जा से कहीं ज़्यादा थी.

इस तरह फ़्यूज़न की प्रक्रिया से वैज्ञानिकों ने पहली बार कम खपत करके ज़्यादा ऊर्जा हासिल की है.

सफलता के मायने

हालांकि प्रयोगशाला के स्तर पर ये एक छोटी से ही सफलता है, लेकिन इसके मायने बड़े हैं क्योंकि इससे भविष्य की ऊर्जा का रास्ता खुलता है.

हाल के सालों में किए गए नाभिकीय प्रयोगों की श्रृंखला में ये सबसे सार्थक क़दम है.

शोघकर्ता इस तथ्य को प्रमाणित करने में सफल रहे और इसके आगे का रास्ता अपने आप जारी रहने वाली फ़्यूज़न प्रक्रिया की ओर जाता है.

2009 में एनआईएफ़ ने घोषणा की थी कि उनका मक़सद 30 सितंबर 2012 तक फ़्यूज़न से ज़्यादा ऊर्जा हासिल करना है.

लेकिन जब तारीख़ क़रीब आई तो वैज्ञानिकों ने जो सोचा था, नतीजा उसके उलट था. तकनीकी ख़ामी के चलते प्रयोग में पाया गया कि फ़्यूज़न से हासिल ऊर्जा प्रयोग में इस्तेमाल की गई ऊर्जा से कम थी.

परीक्षण से पहले वैज्ञानिकों ने गणितीय आधार पर ज़्यादा ऊर्जा मिलने का दावा किया था.

इस समय परंपरागत तरीक़े से परमाणु ऊर्जा नाभिकीय विखंडन से हासिल की जाती है, पर एनआईएफ़ संलयित ऊर्जा की वकालत करता रहा है.

इस सफलता के बाद शोधकर्ताओं को आगे के लिए उम्मीद की किरण नज़र आने लगी है.

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