एक महिला, जिसने बेवजह दांत गंवाए

दातों का गिरना एक बात है, लेकिन ग़लत चिकित्सकीय जांच के कारण गिरना बिल्कुल अलग बात है. ऐन ईस्टमैन के साथ यही हुआ.

उन्हें एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझना पड़ा, जिसमें दात दर्द जैसी कष्टदायक पीड़ा होती है, लेकिन वास्तव में वह दर्द चेहरे की नसों से जुड़ा होता है.

इस बीमारी के चलते नसों का दर्द जान के लिए गंभीर ख़तरा तक बन जाता है. आमतौर पर यह दर्द चेहरे के दाएं हिस्से में जबड़े के निचले भाग में होता है.

ईस्टमैन बताती हैं, "मैं वहां खड़ी थी और चिल्लाए जा रही थी. दर्द अकल्पनीय था. मेरे पति ने कहा 'शांत रहो! पड़ोसी पुलिस को बुला लेंगे.'"

उस घटना को याद करके वह आज ज़रूर मुस्कुरा देती हैं, लेकिन जब उन्हें पहली बार चेहरे पर इस दर्द का अहसास हुआ था, तो वह एकदम बेहोश हो गईं थी.

Image caption जब तक असली कारण पता चलता ऐन के दो दांत निकाल दिए गए थे.

प्रोफ़ेसर जोआना जैकरज्वेस्का ने ईस्टमैन को बताया कि यह एक जैसी कहानी है. एक डरा हुआ रोगी, जो महीनों या वर्षों से ग़लत चिकित्सकीय जांच का शिकार होता है, यहां भयंकर दर्द के साथ मौजूद होता है.

बुज़ुर्गों में आम

लंदन स्थित अपने ईस्टमैन डेंटल हॉस्पिटल के क्लीनिक में वह रोगियों को देखती हैं और इस रोग के बारे में शोध करती हैं, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है.

ऐन 71 साल की हैं, जबकि ट्राईजेमिनल न्यूरॉल्जिया आमतौर पर 50 या 60 की उम्र में ही होता है. हालांकि बहुत कम उम्र में किशोरों और बच्चों में भी यह बीमारी हो सकती है.

चेहरे के दोनों ओर पाई जाने वाली ट्राईजेमिनल नाम की नस ही चेहरे में संवेदनाओं के लिए जिम्मेदार होती है. यह समझा जाता है कि जैसे-जैसे उम्र ढलती जाती है, धमनियां इन्हें आसपास का रक्त पहुंचाती हैं.

प्रोफ़ेसर जैक का कहना है कि जब इस नस पर दबाव पड़ता है, तो इसके चारों ओर एक किस्म का खोल बन जाता है. फलस्वरूप हल्के स्पर्श और दर्द जैसी संवेदनाओं की वाहक नसों में आर-पार संप्रेषण होने लगता है.

ऐन ने बताया कि उनकी डॉक्टर ने एक्स-रे देखकर बताया कि एक दांत के ऊपरी हिस्से के अलावा और कोई समस्या नहीं है और इसे तभी हटाया जाएगा जब इसके नीचे कुछ गड़बड़ हो.

दांत निकालना निदान नहीं

काफ़ी दिन बीतने के बाद भी उनका दर्द नहीं गया, तो ऐन को डॉक्टर ने ताक़तवर सूक्ष्मदर्शी रखने वाले एक अन्य डॉक्टर के पास जाने को कहा, जिसने जांच के बाद पाया कि नसों में दिक्कत है और दांत निकालने की ज़रूरत है.

ऐन ने बताया, ''मैंने दांत निकलवा दिया, फिर भी दर्द नहीं गया. दर्द वहीं हो रहा था जहां पहले हो रहा था. इसे समझने के लिए मैं इंटरनेट पर गई, जिसने मुझे ट्राईजेमिनल न्यूरॉल्जिया से परिचित कराया.''

Image caption कीथ को सर्दियों में दांत दर्द की शिकायत होती है.

दर्द का एक दौर उन्होंने झेला और दूसरा दांत भी निकलवाना पड़ा.

कुछ दवाएं कारगर

कुछ दिन बाद ऐन के डेंटिस्ट ने फोन कर उन्हें ईस्ट डेंटल हॉस्पीटल के विशेषज्ञ से मिलने को कहा. वहां डॉक्टर ने जांच करते ही इसे खास रोग का शुरुआती लक्षण बताया. इसके बाद ऐन को कार्बामाजेपाइन नामक दवा दी गई.

चूंकि इस दवा के कुछ गंभीर साइड इफेक्ट हैं, इसलिए मरीजों को धीरे-धीरे इसकी खुराक बढ़ाने की सलाह दी जाती है. जब दर्द नियंत्रित हो जाए, तो आप इसका इस स्तर पर दवा लेना जारी रख सकते हैं.

जब आपको लगे कि दर्द अचानक बंद हो गया है, तब भी कुछ दर्द बना रहता है, ख़ासकर कुछ चबाते समय. इसलिए खाने को चम्मच से मुंह में एक ओर रखें. असल में चबाने की क्रिया से दर्द बढ़ता है.

दर्द उभरने के और भी कारक हो सकते हैं जैसा ठंडा या गरम खाना या पेय पदार्थ.

कुछ लोगों को दांत दर्द का सीज़नल दौरा पड़ता है, जैसे कीथ आयरलैंड को जाड़ों में दांत का दर्द उभरता है. कीथ को कान के ठीक पास जबड़े में दर्द उभरा, लेकिन न्यूरोटिन गैबेपेंटीन दवा से यह नियंत्रित हुआ, हालांकि पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ.

प्रोफ़ेसर जैक के अनुसार, "शल्य चिकित्सा का विकल्प एक गंभीर मसला है. यदि एक विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन से शल्य चिकित्सा कराई जाए, तो दर्द से बिल्कुल छुटकारा पाया जा सकता है."

हालांकि वह कहते हैं कि दस साल बाद अगर शल्य चिकित्सा हो तो सफलता का प्रतिशत 70 प्रतिशत होता है. इसमें भी यदि प्रभावित सही नस का पता चल जाए, तो उपचार और आसान हो जाता है.

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