ज़िंदगी की 'सेकेंड इनिंग' में रोबोट आएंगे काम

दुनिया में उम्रदराज़ लोगों की तादाद बढ़ रही है, आम तौर पर नौजवानों के पास उनके लिए वक़्त नहीं है. वैज्ञानिक कहते हैं कि भविष्य में रोबोट इन लोगों की देखभाल, मदद और उनके साथ गप्पें मारने की ज़िम्मेदारी संभाल सकते हैं.

ब्रिटेन में आज पुरुष की औसत उम्र 89 वर्ष और महिला की औसत उम्र 92 साल है.

एक अनुमान के मुताबिक़ दुनिया भर में सन 2050 तक 65 साल से अधिक उम्र के डेढ़ अरब लोग होंगे.

जापान में दुनिया की सबसे अधिक वृद्ध आबादी रहती है. वहां के प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने 2013 के बजट में घरेलू देखभाल करने में सक्षम रोबोट के विकास के लिए 2.39 अरब येन रखे हैं.

रोबोट करेंगे मालिश

टोयोटा कंपनी ऐसी डिवाइस बना रही है, जो वृद्धों के आने-जाने में मददगार है. इसी तरह टोली क्रॉप ने वायरलेस सेंसर वाली चटाई तैयार की है, जो वृद्ध लोगों के चलने-फिरने के दौरान उन पर निगाह रख सकता है और उन्हें फ़ीडबैक दे सकता है.

Image caption वृद्धों की देखभाल के लिए जापान में रोबोट का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

24 अंगुलियों वाले एक विशेष रोबोट का विकास किया गया है, जो बाल धो सकता है और सिर की मालिश कर सकता है. पैनासोनिक ने जापान के हेयर सैलून में ऐसे रोबोट का इस्तेमाल किया है.

वृद्ध लोगों की देखभाल के लिए रोबोट के इस्तेमाल से जुड़े परीक्षण सिंगापुर से लेकर साल्फोर्ड तक सभी जगह किए जा रहे हैं.

बर्मिंघम विश्वविद्यालय की रोबोटिक्स परियोजना स्ट्रैडस को यूरोपीय संघ से 80 लाख यूरो की मदद मिली है.

हर पल देंगे साथ

स्ट्रैडस रोबोट का परीक्षण इस साल मई में आस्ट्रियन सेवा प्रदाता के साथ किया जाएगा. शुरुआत में सामान्य काम करने की इसकी कुशलता परखी जाएगी.

डॉ. निक हॉ बताते हैं, "हम अपने स्टाफ़ के समय को काफ़ी हद तक बचाना चाहते हैं."

वह कहते हैं, "घरेलू सेवा कार्यों में लगे कर्मचारियों के साथ सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वो पर्याप्त समय नहीं देते."

उनका कहना है, "हम सामान उठाने और दूसरे सहायक कार्यों पर काम कर रहे हैं. अगर रोबोट दवाओं की ट्रे ला दे, जबकि घर के निवासी आपस में बातें करते रहें, तो इससे मेलजोल बढ़ेगा."

Image caption चिकित्सकीय देखभाल के लिए रोबोट के इस्तेमाल पर शोध किए जा रहे हैं.

इस परियोजना को उम्मीद है कि रोबोट अधिक सक्रिय और बेहतर देखभाल करने की भूमिका निभा सकते हैं.

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खानपान की सलाह

सेवा कंपनियों और आठ यूरोपीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त परियोजना मोबीसर्व प्रोजेक्ट के तहत शोध कार्य हाल में खत्म हुए हैं. इसका मक़सद ऐसा रोबोट तैयार करना है जो "दोस्त और साथी" हो.

ये वृद्ध लोगों को स्वास्थ्य देखभाल से लेकर उन्हें खानपान तक की सलाह दे सकता है.

शोधकर्ता एंटोनियो एस्पिंग्रेडेरियो के मुताबिक़ साल्फोर्ड परियोजना के तहत ऐसे रोबोट तैयार किए जा रहे हैं, जो लोगों की दिन में 24 घंटे देखभाल कर सकते हैं.

केयरबोट पी37 एस65 को बाक़ी चीज़ों के अलावा स्पीच थेरेपी के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है और पागलपन के शिकार लोगों का उपचार कर सकते हैं.

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साइंस फ़िक्शन हक़ीकत के क़रीब

एस्पिंग्रेडेरियो और उनकी टीम फिलहाल रोबोट के ज़रिए सेवा और इंसानों के ज़रिए की जाने वाली सेवा के बीच तुलनात्मक फ़ायदे और नुक़सान का आकलन कर रही है.

उनका मानना है कि मानवीय बातचीत के साथ ही रोबोट सार्थक संवाद के लिहाज़ से पूरक की भूमिका अदा कर सकते हैं.

Image caption जापान की सरकार घरेलू कामों के लिए रोबोट के इस्तेमाल पर विचार कर रही है.

तकनीकी विकास के साथ ही साइंस फ़िक्शन हक़ीकत के क़रीब पहुंच रही है. हाल में आई एक फिल्म रोबोट एंड फ्रैंक में एक वृद्ध व्यक्ति वृद्धाश्रम में जाने के बजाए एक रोबोट खरीदता है.

इसके उदाहरण मौजूद हैं कि वृद्धावस्था में रोबोट का साथ लोकप्रिय हो रहा है.

जापान के वृद्ध लोगों के बीच सबसे लोकप्रिय रोबोट पारो है. देखने में प्यारा सा यह रोबोट भारी सामान भी उठा सकता है.

जापान में एक केयर होम के निवासी काजुओ नाशिमुरा बताते हैं कि, "मैं इसे इसलिए पसंद करता हूं क्योंकि यह मानवीय भावनाओं को समझता है."

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मानवीय स्पर्श

लेकिन सिर्फ रोबोट की मदद से इंसानों का अकेलापन दूर नहीं किया जा सकता.

एज़ यूके का कहना है कि करीब आधे वृद्ध लोग टेलीविज़न देखना पसंद करते हैं और केयर होम में आने वाले स्वयंसेवकों के साथ बातें करना पसंद करते हैं.

एज़ यूके की चैरिटी डायरेक्टर कैरोलिन इब्राहीम कहती हैं कि लोगों की मदद के लिए तकनीकी के इस्तेमाल में कुछ ग़लत नहीं है.

उन्होंने कहा, "हालांकि यह सुनिश्चित करना हमेशा महत्वपूर्ण होगा कि तकनीकी का इस्तेमाल वहीं किया जाए, जहां उससे वास्तव में फ़ायदा मिल रहा हो और इसे मानना होगा कि मानवीय स्पर्श का कोई विकल्प नहीं है."

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