शादी का भविष्य जानना हो तो कराएं 'लव टेस्ट'

वैज्ञानिकों ने एक नए 'लव टेस्ट' का इजाद किया है जो उनके मुताबिक़ संबंधों में सफलता के लिए नवदंपति को बेहतर गाइड कर सकता है.

शोध में कहा गया है कि साथी की तस्वीर के बारे में एक अवचेतन प्रतिक्रिया शादी के परिणाम जानने में उपयोगी साबित हो सकती है.

जिन लोगों के मन में नकारात्मक बातें चलती हैं, कुछ साल बाद उनके संबंधों में दरार की संभावना बढ़ जाती है. यह अध्ययन जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है.

मुख्य शोधकर्ता फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जेम्स मैकनल्टी ने कहा कि इस नई जांच से नवदंपति की एक-दूसरे की प्रति सोच के बारे में सही अनुमान लगाया जा सकता है.

135 जोड़ों का साक्षात्कार

प्रो.जेम्स ने कहा कि मन की ये बातें, शादी के दौरान आप ख़ुश रहेंगे या नहीं, इस बारे में अनुमान लगाने में काफ़ी अहम साबित होती हैं. उनकी टीम ने शादी के तुरंत बाद ऐसे 135 जोड़ों का साक्षात्कार किया.

शोधकर्ताओं ने उनसे पूछा कि वे अपनी शादीका मूल्यांकन सकारात्मक, नकारात्मक, अच्छा, बुरा, संतुष्ट और असंतुष्ट किस तरह से करते हैं.

इसके बाद उन्होंने पहेलीनुमा 'लव टेस्ट' का इस्तेमाल करते हुए एक-दूसरे के प्रति उनके दिल की बातों का माप किया.

इसमें एक पार्टनर को दूसरे की एक तस्वीर एक सेकंड के तीसरे हिस्से तक के लिए दिखाई जाती है. इसके बाद उनको जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ''शानदार, आश्चर्यजनक, डरावना, और भयानक'' में कोई एक जवाब देना होता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरीक़े से और जिस आवाज़ में वे जवाब देते हैं उससे उनकी सही भावनाओं के बारे में पता चलता है.

यह टेस्ट संबंध बनने के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है. सिद्धांत के मुताबिक़ शादी के बंधन में बंधे लोगों में पार्टनर की तस्वीर क्षण भर के लिए देखने के बाद सकारात्मक या नकारात्मक विचार आता है.

Image caption नवदंपति जब सचेत होकर जवाब देती हैं तो वे संबंधों के बारे में सकारात्मक बात करते हैं.

शानदार या डरावना

शोधकर्ताओं के मुताबिक़ अगर उनके दिमाग़ में सकारात्मक चीज़ें भरी हैं तो निश्चित तौर पर वे ''शानदार'' शब्द का इस्तेमाल करेंगे. इस तरह नकारात्मक चीज़ें होने पर उनकी प्रतिक्रिया ''डरावनी'' होगी.

प्रो. जेम्स और उनकी टीम ने पाया कि नवदंपति जब सचेत होकर जवाब देती है तो वे अपने संबंधों के बारे में सकारात्मक बातें करती हैं.

शोधकर्ताओं ने इन जोड़ों का हर छह माह पर अगले चार साल तक साक्षात्कार किया. उन्होंने पाया कि जिन लोगों के मन में नकारात्मक सोच थी उनके वैवाहिक संबंध दिन बितने के साथ ख़राब होते गए. कुछ ने तो तलाक़ भी ले ली.

उन्होंने कहा कि हर कोई भरोसा करना चाहता है कि उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन मन की बात से पता चल जाता है कि लोग अपने संबंधों के बारे में तुरंत क्या महसूस करते हैं.

उन्होंने कहा कि इस टेस्ट से नकारात्मक या सकारात्मक लगाव का परीक्षण किया जाता है.

प्रो. जेम्स ने कहा कि लोगों के मन में एक ही समय प्यार और नकारात्मक भावनाएं दोनों आ सकती है और यह टेस्ट संभवतः दोनों स्थितियों पर नज़र रखता है.

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस शोध को शादी से पहले कराने को लेकर अभी पूरी तरह से विकसित नहीं किया गया है.

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