हर हाल में नुक़सानदेह है मोटापा

आमतौर पर माना जाता है कि अगर शरीर में ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप, शुगर का स्तर और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा संतुलित है तो ज़्यादा वज़न को लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है.

लेकिन, एक नए शोध में इस सोच को एक मिथक करार देते हुए कहा गया है कि सब कुछ ठीक रहने के बावजूद अधिक वज़न ख़तरनाक हो सकता है.

इस शोध में साठ हज़ार से अधिक लोगों के दिल की सेहत और उनके वज़न पर बराबर नज़र रखी गई.

'एनल्स ऑफ इंटर्नल मेडिसीन' में प्रकाशित इस शोध में इस विषय पर हुए 1000 से अधिक अध्ययनों को भी शामिल किया गया है.

टोरंटो के माउंट सिनाई हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने पाया कि वज़न का बढ़ना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि अधिक वज़न वाले जो लोग जांच में स्वस्थ पाए जाते हैं, वे ख़तरे के क़रीब होते हैं और समय बीतने के साथ यह ख़तरा बढ़ता जाता है.

दिल को ख़तरा

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. रवि रत्नाकरन ने बीबीसी से कहा कि इस अध्ययन के नतीज़े 'हेल्दी ओबेसिटी' यानी मोटापे के बावजूद सेहतमंद रहने की धारणा को लेकर संदेह पैदा करते हैं.

उन्होंने कहा, ''इस शोध से पता चलता है कि स्वस्थ दिखने वाले मोटे लोग और मोटापे की बीमारी से परेशान लोग, इन दोनों को हृदय संबंधी बीमारियों का ख़तरा बना रहता है.''

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि मोटोपा हृदय संबंधी बीमारियों का एक बड़ा कारण है और शोधकर्ताओं ने पाया है 'स्वस्थ मोटापे' जैसी कोई चीज नहीं होती.

वरिष्ठ नर्स डोईरीन मैडॉक का कहना है कि रक्त चाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर का स्तर ठीक रहने के बावजूद आपके दिल को खतरा हो सकता है.

उनका कहना है कि 'बेहतर होगा कि हम सेहत को होने वाले ख़तरे के बारे में सोचने की बजाय जीवन शैली को बेहतर करने के बारे में सोचें.'

उन्होंने कहा कि वज़न पर ऩजर रखने के साथ सिगरेट छोड़ने, नियमित कसरत करने और रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को ठीक रखने से हृदय संबंधी बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार