किसने खोला मिट्टी के टीलों का राज़?

  • 19 दिसंबर 2013
मीमा माउंड

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी अजीबो-गरीब संरचनाओं में से एक मीमा माउंड्स यानी मिट्टी के टीलों के रहस्य पर से पर्दा उठाने का दावा किया है.

ये भौगोलिक संरचनाएं छोटी गोलकार टीले जैसी होती हैं जो एक विशाल भूभाग में फैली हैं. लेकिन वर्षों से वैज्ञानिक इनके रहस्य को समझने के लिए माथापच्ची कर रहे हैं.

अब एक नए शोध में दावा किया गया है कि बिल खोदने वाले बहुत छोटे जीव इसके वास्तुकार हैं.

शोध के नतीजों को सैन फ्रांसिस्को में 'अमरीकन जियोफिजिकल यूनियन फॉल मीटिंग' में पेश किया जाएगा.

मीमा माउंड्स का आकार सात फ़ीट तक ऊंचा और व्यास 160 फ़ीट तक होता है. ये पूरी दुनिया भर में पाए जाते हैं लेकिन ये उत्तरी अमरीका में बहुतायत में हैं.

फैलाव

कुछ इलाक़ों में तो ये लाखों की संख्या में पाए जाते हैं और कई किलोमीटर तक के फैले रहते हैं.

शोधकर्ताओं की टीम का नेतृत्व करने वाले और सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर मैनी गैबेट ने बीबीसी से कहा, ''मीमा माउंड्स का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया कि ये आख़िर बनते कैसे हैं?''

उन्होंने कहा, ''पिछली कई सदियों से लोग सोचते आए हैं कि ये स्थानीय अमरीकियों की कब्रें हो सकती हैं या फिर भूकंप या ग्लेशियर के कारण इन संरचनाओं का निर्माण हुआ है. यहां तक कि कुछ लोग इन्हें किसी दूसरे ग्रह की संरचनाएं तक मानते रहे हैं.''

हालांकि डॉक्टर गैबेट कहते हैं कि वो इस बात को लेकर निश्चित हैं कि इन रहस्यमयी टीलों को बिल बनाने वाले जीवों ने ही बनाया है.

कम्प्यूटर प्रोग्राम ने दिखाई राह

एक कम्प्यूटर प्रोग्राम की सहायता से शोधकर्ताओं ने दिखाया कि कैसे ये जीव सतह के नीचे खुदाई के दौरान मिट्टी को ऊपर फेंकते हैं.

डिजिटल जीवों द्वारा बनीं संरचनाएं वास्तविक संरचनाओं जैसी ही हैं.

उन्होंने पाया कि जल जमाव वाले इलाकों में नमी से बचने के लिए ये जीव मिट्टी को ऊपर की ओर ठेलते हैं.

सैकड़ों सालों को दौरान इन जीवों की कई पीढ़ियों की मशक्कत से ये टीले और विशाल होते गए.

लेकिन ये विशेष नस्ल के जीव केवल अमरीका में ही पाए जाते हैं जबकि इस तरह के टीले अंटार्कटिका को छोड़कर पूरी दुनिया में पाए जाते हैं.

गैबेट का कहना है कि छंछूदर जैसे भूमिगत स्तनपायी जीव इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार