इस साल क्या है विज्ञान की सबसे बड़ी खोज?

एक छुद्रग्रह

बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट के विज्ञान संपादक पॉल रिंकन बता रहे हैं कि साल 2013 में विज्ञान और पर्यावरण की दुनिया में क्या-क्या ख़ास हुआ, जिसे दुनिया याद रखेगी.

आसमान में आग

अंतरिक्ष पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों ने 15 फ़रवरी को एक छोटे से ग्रह को धरती के क़रीब आते देखा.

मगर इसके सुरक्षित गुज़रने के बाद दस हज़ार टन की एक अंतरिक्षीय चट्टान रूस के चेल्याविंस्क के ऊपर आसमान में जलकर राख हो गई. हालांकि उसके अवशेषों के ज़मीन पर गिरने से क़रीब एक हज़ार लोग घायल हो गए और आस-पास की कई इमारतों को नुकसान पहुंचा.

इस असाधारण घटना ने वैज्ञानिकों को क्षुद्र ग्रह के 'हमले' का अध्ययन करने का दुर्लभ संयोग दिया. इस जांच के लिए गाड़ियों के डैशबोर्ड पर लगे कैमरों को धन्यवाद देना चाहिए.

ये कैमरे रूसी चालकों ने बीमा कंपनियों और पुलिस का भ्रष्टाचार उजागर करने को लगाए थे. इस उल्कापिंड का एक बड़ा हिस्सा बाद में चेबराकुल झील की तली से बरामद किया गया.

तारों के प्रकार

मार्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान वॉयजर-1 अगस्त 2012 में हमारे सूर्य के बाहरी हिस्से हेलियोस्फ़ियर से बाहर चला गया है. मगर नासा के वैज्ञानिकों ने तुरंत ही इसका खंडन कर दिया.

सितंबर में यह दृष्टिकोण बदल गया और मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपने प्रमाण दिए. इसमें कुछ अतिरिक्त आंकड़े भी शामिल थे. इसमें तारों के बीच के इलाक़े की जांच की पुष्टि की गई थी.

वॉयजर-1 को 1977 में बाहरी ग्रहों का अध्ययन करने के लिए छोड़ा गया था. तारों के बीच अंतरिक्ष में पहुँचने वाला यह पहला मानवनिर्मित यान था.

ख़तरनाक डाउनलोड

मई में बीबीसी न्यूज़ ने सबसे पहले ख़बर दी कि दुनिया की पहली थ्रीडी प्रिंटेड बंदूक़ से अमरीका में फ़ायर किया गया है. एक विवादास्पद समूह ने टेक्सस के ऑस्टिन के पास इस हथियार का परीक्षण किया.

ख़ुद को साइबर अराजकतावादी बताने वाले डिज़ायनर कोडी विल्सन ने कहा,''यह एक ऐसी दुनिया में झांकना है, जहाँ तकनीक कहती है कि आप वह सब कर सकते हैं, जो आप करना चाहते हैं.'

प्लास्टिक की इस बंदूक़ को बनाने के लिए प्रयोग में लाए गए ब्लूप्रिंट के ऑनलाइन होने के पहले हफ़्ते में ही उसे क़रीब एक लाख बार डाउनलोड किया गया. बंदूक़ का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की आलोचना के बाद अमरीका ने इसे इंटरनेट से हटाने का निर्देश दिया.

आसमान की ओर देखो

इस साल सबूत मिला कि मौजूदा खगोल विज्ञान में एक नई शाखा को जन्म देने की क्षमता है. मई में बीबीसी न्यूज़ की वेबसाइट ने पहली बार दक्षिणी ध्रुव पर हुए आइस क्यूब परीक्षण की ख़बर दी थी. इसमें पहली बार अधिक ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो को हमारे सौरमंडल से बाहर से आता दिखाया गया था.

जबकि खगोल विज्ञान की मौजूदा शाखाएं ऑप्टिकल या इंफ्रारेड जैसी, अलग-अलग प्रकार के प्रकाश का प्रयोग करती हैं. इस प्रयोग से कणों का उपयोग करते हुए ब्रह्मांड की तस्वीर बनाना संभव हो सका. इसके अलावा खगोलविदों के लिए खुशी की एक बात और थी कि उनके पास अब तक प्रकाश का सबसे पुराना नक्शा प्लैंक नाम की दूरबीन से लिए गए आंकड़ों के आधार पर बनाया गया था.

जलवायु संकट

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के एक दल ने जलवायु परिवर्तन के भौतिक प्रमाणों के साथ अपनी रिपोर्ट जारी की. जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) के साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा कि वे इसे लेकर 95 फ़ीसदी आश्वस्त हैं कि साल 1950 से ग्लोबल वार्मिंग के लिए इंसान प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार है.

इस बात के और 2013 के सबसे अधिक गर्म साल रहने की आशंका जताने के बाद भी उत्सर्जन कम करने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दुविधा बनी हुई है.

नैनो ट्यूब से कंप्यूटर

स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस साल सितंबर में कार्बन के नैनोट्यूब से बना दुनिया का पहला कंप्यूटर पेश किया. इसे 'सेड्रिक' नाम दिया गया है. यह इस मशीन का बुनियादी प्रोटोटाइप है, पर इसे नए ज़माने के डिजिटल उपकरण के रूप में विकसित किया जा सकता है, जो आजकल के सिलिकॉन मॉडल की तुलना में छोटा, तेज़ और प्रभावशाली होगा.

इसके अलावा अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और गूगल क्वांटम भौतिकी का उपयोग कर रफ़्तार बढ़ाने वाले डेढ़ करोड़ डॉलर के कंप्यूटर का प्रयोग करने पर सहमत हो गए. यह कंप्यूटर नासा में लगाया जाएगा. क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों का ध्यान डी वेव मशीन ने अप्रैल में तब खींचा जब एक शोधपत्र में यह बताया गया कि यह क्वांटम स्तर पदार्थ के अजीब व्यवहार का पता लगाने में सक्षम है. हालांकि वास्तविक मशीन पर अभी असमंजस बरकरार है.

अतीत की तलाश

2013 में हुए परीक्षणों से पता चला कि आयरलैंड के लोइसी काउंटी में मिले जीवाश्म क़रीब चार हज़ार साल पुराने हैं और यह जीवाश्म सबसे पुराने कुत्ते के भी हो सकते हैं.

इस साल दुनिया ने इंसान के डीएनए के सबसे पुराने अनुक्रम के साथ-साथ निएंडरथल मानव के संपूर्ण जिनोम अनुक्रम को देखा. इन अध्ययनों ने मानव समूहों में अप्रत्याशित संबंधों का भी पता लगाया. इससे इंसान के प्रवासन की गुत्थी सुलझाने में भी मदद मिलेगी.

भविष्य का ईंधन

ब्रिटेन के चांसलर जॉर्ज ओसबॉर्न ने शेल गैस (एक तरह की प्राकृतिक गैस) के उत्खनन में लगी कंपनियों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है. इसका ऊर्जा क्षेत्र में नाटकीय प्रभाव पड़ा है. अमरीका ने 2013 में पहली बार शेल गैस का निर्यात शुरू किया. ज़मीन में मौजूद हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विकसित की गई तकनीकी में से एक फ्रीकिंग है.

ऊर्जा विश्लेषक जर्मनी में अक्षय ऊर्जा के तेज़ी से हो रहे पारगमन पर नज़र रखे हैं. अधिक संभावनाओं के बाद भी यह सवाल है कि इसका पर्यटन और इस अक्षय ऊर्जा के भंडारण पर आने वाले ख़र्च को कौन वहन करेगा?

नाभिकीय ऊर्जा जैसी संभावना वाले ऊर्जा स्रोतों को लेकर भी कुछ संशय है. कैलिफ़ोर्निया के भौतिकविद ने अपने प्रयास से लेज़र संलयन करने में सफलता हासिल की है.

हानिकारक जंगल

पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक इस बात पर नज़र रखे हैं कि यूरोप के जंगल किस तरह के संकट का सामना कर रहे हैं. इसमें ब्रिटेन में पेड़ों की पत्तियों या जड़ों का मरना भी शामिल है.

साल 2013 में यह पता चला कि एक महाद्वीप पर एक और ख़तरा आ गया है. विज्ञान पत्रिकाओं से पता चला कि जंगलों के इस विखंडन से वहाँ के प्राकृतिक आवास में रहने वाली प्रजातियों पर भी असर पड़ सकता है.

कैसे लुप्त हुआ जीवन?

पृथ्वी से जीवन लुप्त होने की छठवीं घटना को लक्ष्य कर शोधकर्ता ऐसी प्रजातियों की खोज में लगे हैं, जिनके बारे में विज्ञान को अब तक पता नहीं था. कोलंबिया और इक्वेडोर के घने जंगलों में मिलने वाले एक स्तनपायी ओलिंगिटो की खोज इस साल की बड़ी खोज थी.

माइंड मैपिंग

मार्च में अमरीका के नेतृत्व वाले एक दल ने इंसानी दिमाग़ की वायरिंग का पहला नक्शा जारी किया. द ह्यूमन कनेक्शन नाम की परियोजना इस पर प्रकाश डाल सकती हैं कि इंसान के दिमाग़ की संरचना किस तरह उसकी योग्यता और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है.

बीबीसी ने यह भी ख़बर दी कि एक किशोर के दिमाग़ के काम करने के तरीक़ों को समझने और आवेग और भावनात्मक व्यवहार के दौरान उसके दिमाग़ में होने वाले परिवर्तन का पता लगाने का प्रयास हो रहा है. वहीं जापान में वैज्ञानिकों ने एमआरआई स्कैनर का उपयोग कर स्वप्न में देखी गई तस्वीरों का पता लगाने में सफलता पाई है.

अंतरिक्ष में होड़

अंतरिक्ष में पहुँचने की होड़ भी 2013 में तेज़ हुई, जब भारत ने मंगल की ओर अपना मानवरिहत यान रवाना किया और चीन ने अपना यान चंद्रमा पर उतारा. यह पिछले 37 वर्षों में पहली सॉफ़्ट लैंडिंग थी.

इस बीच इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने बीबीसी के साथ मंगल पर मानवयुक्त यान की यात्रा दिखाने के लिए एक समझौता किया. अंतरिक्ष यात्री डेनिस टीटो ने घोषणा की कि वे एक ऐसे प्रौढ़ दंपति की तलाश में हैं, जो मंगल यात्रा पर जा सके. वहीं मार्स वन नाम की एक कंपनी ने मंगल ग्रह की एकतरफा यात्रा के लिए लोगों से आवेदन मांगे.

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