भारत का स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन सफल

जीएसएलवी, उपग्रह

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का जीएसएलवी सफलतापूर्वक प्रक्षेपण हुआ है.

इसके साथ ही भारत उन देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास क्रायोजेनिक तकनीक है.

जीएसएलवी डी-5 को रविवार शाम 4.18 बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था.

स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन वाले जीएसएलवी डी-5 ने जीसैट-14 संचार उपग्रह को सफलतापूर्व उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया.

इसरो के चेयरमैन के राधाकृष्णन ने लॉन्च के बाद कहा, "ये एक बड़ी उपलब्धि है. मैं ये बताते हुए बहुत प्रसन्न और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि इसरो ने ये कर दिखाया है. हमें 20 सालों की मेहनत का फल मिला है."

असफलता से सफलता तक

इससे पहले तीन बार ये क्रायोजेनिक इंजन नाकाम रहा था.

पहली बार तो क्रायोजेनिक इंजन का एक बूस्टर पंप जाम हो गया था और दूसरी बार जब इसका लॉन्च हुआ था तो इसके कुछ कनेक्टर फेल हो गए थे. इस कारण रॉकेट को हवा में ही नष्ट करना पड़ा था.

लेकिन पिछली बार अगस्त 2013 में इसरो को तब एक बड़ा धक्का लगा था जब 74 मिनट पहले ही इसी रॉकेट में एक लीक की जानकारी मिली थी.

इस रॉकेट के सफल प्रक्षेपण से दूसरे देशों के संचार उपग्रह भी भारत के लॉन्च पैड से छोड़े जा सकेंगे. इसकी कामयाबी इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले "20 साल में कोई देश ऐसा नहीं है" जिसने क्रायोजेनिक तकनीक का विकास किया हो.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस लॉन्च के बाद इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा, "भारत ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है."

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