आखिर नींद का क्या है माजरा

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सुबह-सवेरे अपनी नींद खोलना या फिर देर रात तक जगे रहने की आख़िर क्या वजह है?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रवृति के लिए जीन ज़िम्मेदार है.

हममें से कुछ लोग हर सुबह बड़े उत्साह से बिस्तर से बाहर निकलकर अपने दिन की शुरुआत करना चाहते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उठने के लिए अलार्म घड़ी का सहारा लेते हैं जिसमें एक स्नूज़ बटन हो ताकि उन्हें उठने और काम पर जाने में देरी न हो.

हममें से कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो बात करने के लिए देर तक जगे रह सकते हैं जबकि कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो लाइट बंद कर कुछ सुनते हुए सोना चाहते हैं.

ऐसे ही लोगों में से कुछ लोग तड़के चहचहाने वाली चिड़िया या फिर उल्लू की श्रेणी में शामिल हो सकते हैं.

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के न्यूरोजेनेटिसिस्ट डॉ लुइस प्टाचेक का कहना है कि वास्तव में हमारी यह प्रवृति हमारे जीन से निर्धारित होती है.

बूढ़ा शरीर, सुधरती नींद

वह कहते हैं, "हमें यह बात पसंद हो या न हो लेकिन हमारे माता-पिता हमें समय से बिस्तर पर जाने की ताक़ीद देते ही रहे हैं."

वैज्ञानिक एक व्यक्ति के जीन और दिन के किसी खास वक्त में उसकी सक्रियता को समझने की अहमियत को महसूस कर रहे हैं.

मिशिगन में फ़ार्माकोलॉजी के एक प्रोफ़ेसर रिक न्यूबिग कहते हैं, "यूरोप में मैं जिनसे संवाद करता हूं उन्होंने देखा होगा कि उन्हें सुबह-सुबह मेरा मेल मिलता है."

वह कहते हैं, "सुबह उठने की आदत से ही मैं पक्षियों को देख पाता हूं जो मेरा शगल है. दूसरे लोगों के मुकाबले सुबह उठना और चिड़ियों को देखना अब मेरे लिए आसान है."

आख़िर क्या है वजह

यह आदत उनके परिवार में भी है. वह कहते हैं, "मेरी मां हमेशा सुबह 4 बजे हम सबको जगा देती थीं और मेरी बेटी सुबह उठकर काम करती है."

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Image caption कुछ लोग नींद से जगने के लिए अलार्म घड़ी पर निर्भर रहते हैं.

डॉ लूइस प्टाचेक तड़के उठने वाले रिक और उनके जैसे परिवारों का अध्ययन कर रहे हैं जो एडवांस स्लीप फेज़ सिंड्रोम से ग्रस्त हैं.

वह उस शोध क्षेत्र में तब उतरे जब उनके सहयोगी डॉ क्रिस जोन्स 69 वर्ष के एक व्यक्ति से मिले जो जल्दी नींद खुल जाने की वजह से परेशान थे.

प्टाचेक और जोंस ने उनका ख़्याल रखा. लूइस प्टाचेक का कहना है, "हमने यह पाया कि यह एक आनुवंशिक लक्षण है और पता चला कि गुणसूत्र 2 के पास परिवर्तित जीन मौजूद है. "

वैसे उन्हें यह पहले से अंदाज़ा था कि फल पर लगने वाली मक्खियां और चूहे में समान जीन के उत्परिवर्तित होने से उनमें जैविक प्रक्रिया की रफ्तार तेज़ हो जाती है.

उत्परिवर्तित जीन से अलग तरह का प्रोटीन तैयार होता है जिससे शारीरिक घड़ी की लय प्रभावित होती है.

डायटिंग नहीं, नींद घटाएगी मोटापा

उन्होंने दिन में देर तक सोने और रात में जागने वाले परिवारों का अध्ययन भी किया जिन्हें डिलेड स्लीप फेज़ सिंड्रोम था. उनका मानना था कि ऐसा एक ही जीन में अलग उत्परिवर्तन के कारण था.

हम सब में आंतरिक जैविक प्रक्रिया वाली घड़ियां होती हैं. यह मास्टर घड़ी हज़ारों तंत्रिका कोशिकाओं से बनी होती है और यह दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से में मौजूद होता है.

हाइपोथैलेमस सभी तरह के शारीरिक कार्यों मसलन हार्मोन निकालने के साथ ही शरीर के तापमान और पानी की मात्रा को नियमित करता है.

यह आंतरिक घड़ी हर रोज़ रोशनी के आधार पर दोबारा सेट होती है. आपको यह लग सकता है एक दिन में अगर 24 घंटे ही होते हैं तो सभी के शरीर की घड़ियां एक जैसी ही चलनी चाहिए.

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Image caption नींद के जल्दी और देर से खुलने का संबंध जीन से है

लेकिन ऐसा नहीं होता, इसी वजह से किसी को जल्दी नींद आती है तो कोई देर तक जगा रहता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ सरी के स्लीप रिसर्च सेंटर के प्रमुख प्रोफ़ेसर दर्क-जान दिज्क का कहना है, "अगर आपकी घड़ी तेज़ है तो आप सब कुछ जल्दी करेंगे और अगर आपकी घड़ी धीमी है तो आप देर से कोई काम करेंगे।"

'दुनिया की नींद नक्शा'

हमारी घड़ियां जीवन भर निर्धारित नहीं रहती हैं. जिनके भी छोटे बच्चे होते हैं उन्हें यह अंदाज़ा है कि बच्चे सुबह जल्दी उठते हैं जैसे कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति में भी यही प्रवृति रहती है.

हालांकि हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी की चाहे जो भी रफ़्तार हो लेकिन हमें अपने समाज की बनाई हुई 9 से 5 बजे की रुटीन से तालमेल बिठाना पड़ता है.

आम तौर पर किशोरों के लिए सुबह उठना मुश्किल है.

लुडविग मैक्सिमिलियंस विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर टिल रोनेनबर्ग ने इस आयु वर्ग के नींद के रुझान पर नज़र डाली है.

एक कलाकार जो नींद में बनाता है स्केच

उनका कहना है, "किशोरों का हर काम देर से करना बेहद मशहूर है. बचपन से किशोर होने के चरण में जाते-जाते 19 साल की महिला और 21 साल के पुरुष में यह देरी चरम पर पहुंच जाती है. यह शोध आश्चर्यजनक होने के साथ ही स्पष्ट भी था."

"हमारे डेटाबेस में दो लाख से ज़्यादा प्रतिभागी हैं. हम दुनिया के एक नींद वाले नक्शे को तैयार करने की उम्मीद कर रहे हैं."

Image caption बड़ों के मुकाबले बच्चों की नींद खुलती है जल्दी

अमेरिका में ब्राउन विश्वविद्यालय में मनोरोग विज्ञान की एक प्रोफ़ेसर मैरी कार्सकाडॉन स्कूल देर से खोले जाने के लिए अभियान चला रही हैं.

वह कहती हैं, "स्कूल ग्रेड हमेशा अच्छा नहीं होता लेकिन मुझे लगता है कि किसी की नींद का कम होना एक बड़ी समस्या है और इसका ताल्लुक अवसाद, उदासी और बच्चों में प्रेरणा की कमी से जुड़ा है. जब स्कूल देर से खुलते हैं जो बच्चों के मिजाज़ में सुधार होता है."

अलार्म घड़ी

लेकिन दुनिया में बेहद कम स्कूल ही देर से खुलते हैं.

हालांकि कई लोग सुबह 9 बजे से 5 बजे तक काम करने को तरजीह देते हैं भले ही वे थक जाते हों.

प्रोफ़ेसर रोनेनबर्ग काम वाले हफ़्ते में नींद की कमी को मापने के लिए एक दिलचस्प तरीके का जिक्र करते हैं जिस दौरान हम बिस्तर पर से उठने के लिए अलार्म घड़ी पर निर्भर होते हैं.

उनका कहना है कि आमतौर पर लोग हफ़्ते के दौरान जल्दी सोते हैं जबकि छुट्टी के दिनों में देर से सोते हैं.

उनका कहना है, "हमें अपने काम करने के समय में बदलाव करना चाहिए. लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो हमें रोशनी के लिए रणनीति तय करनी चाहिए."

"हमें काम पर जाते वक्त किसी कवर किए गए वाहन के बजाए मोटर साइकिल पर जाने की कोशिश करनी चाहिए. सूरज के डूबने पर हमें वैसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें नीली रोशनी न हो मसलन कंप्यूटर स्क्रीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण."

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