कितना सुरक्षित है आपका मोबाइल बैंकिंग ऐप?

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आज हम-आप में से बहुत से लोग अपने रुपए-पैसे का प्रबंधन ऑनलाइन करते हैं. आज बैंक खाते के प्रबंधन के लिए कंप्यूटर होना भी ज़रूरी नहीं है. इसे आप अपने स्मार्टफ़ोन के जरिए भी संभाल सकते हैं.

ऑनलाइन बैंकिंग के ऐप आपको बिलों के भुगतान, पैसा ट्रांसफर करने और अपने ख़ाते पर नज़र रखने की सुविधा देते हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह सब करना सुरक्षित है?

क्या मोबाइल बैंकिंग जोख़िम भरा काम है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि ऐप कैसा है. इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने वाली अधिकांश कंपनियां अपने मोबाइल ऐप की सुरक्षा पर काफी खर्च करती हैं.

इस तरह के ऐप में ख़तरे को कम करने के लिए कंपनियां इसके जरिए होने वाली पैसे की लेनदेन की सीमा को नियंत्रित रखती हैं.

अधिक पैसों की लेन-देन को अधिकृत करने के लिए किसी कोड या कार्ड रीडर की जरूरत होती है.

कई बार स्मार्टफ़ोन के जरिए किया गया लेन-देन एक स्टैंडर्ड कंप्यूटर से होने वाले लेन-देन से अधिक सुरक्षित होता है. लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं.

इसके लिए सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप अपने बैंक का आधिकारिक ऐप ही प्रयोग करें और समय-समय पर उसे अपग्रेड भी करते रहें.

आप यह सुनिश्चित कर लें कि आपके बैंक का मोबाइल ऐप की सुरक्षा विधिमान्य है. इसके लिए पहले आपको अपने बैंक की वेबसाइट पर जाकर यह पता लगाना चाहिए कि उन्होंने अपने मोबाइल ऐप की सुरक्षा के लिए क्या किया है.

अगर वहाँ आपको इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो आप अन्य उपभोक्ताओं से इसकी जानकारी लें जो कि उस मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहे हैं. इसका एक अच्छा तरीका यह होगा कि आप अपने बैंक और मोबाइल ऐप के नाम को गूगल जैसे सर्च इंजन पर जाकर खोजें और यह पता लगाएं कि लोगों ने इस ऐप के बारे में क्या राय व्यक्त की है.

क्या सामान्य ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के ख़तरे अलग-अलग हैं ?

सामान्य रूप से कहें तो कंप्यूटरों की तुलना में स्मार्टफ़ोन पर ख़तरनाक़ चीजों का हमला बहुत कम होता है. इस तरह यह अधिक सुरक्षित है.

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कहा जाता है कि अभी साढ़े छह लाख से अधिक एंड्रायड मोबाइल बैंकिंग ऐप मौज़ूद हैं. इनमें से अधिकांश फर्ज़ी हैं, जो आधिकारिक होने का दावा करते हैं.

फ़ीसिंग या किसी प्रतिष्ठित कंपनी के नाम पर किसी व्यक्ति से उसके ख़ाते से जुड़ी जानकारियां मांगने के अभियान की ही तरह इस तरह के ऐप को विभिन्न ऐप स्टोर पर रख दिया जाता है, जहाँ वे इस बात का इंतज़ार करते हैं कि कोई ग्राहक आए और अपने बैंक के खाते से संबंधित जानकारियां उन्हें सौंप दे.

इसलिए यह ज़रूरी है कि आप आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप ही अपने स्मार्टफ़ोन में इंस्टाल करें.

इसके लिए आप अपने बैंक की वेबसाइट पर जाकर अपने स्मार्टफ़ोन के मुताबिक़ सही और ताज़ा बैंकिंग ऐप को डाउनलोड करने से संबंधित दिशा-निर्देशों को पढ़ें.

एक बार जब आप ऐप का उपयोग शुरू कर दें तो आप इस विकल्प की तलाश करें जिससे आपके खाते से होने वाली हर लेन-देन की जानकारी आपको एसएमएस के जरिए मिल सके.

अगर आपका बैंक आपको आपके खाते से होने वाले हर लेन-देन की जानकारी एसएमएस देने लगे तो, किसी तरह की गड़बड़ी होने पर आपको इसकी सूचना तुरंत मिल जाएगी.

आप अपने स्मार्टफ़ोन को पासवर्ड के जरिए सुरक्षित करें, ताकि उसका उपयोग केवल आप ही कर पाएं. जब भी आपको ऐप का प्रयोग करना हो तो केवल आप ही कर पाएं.

आपको अपने फ़ोन के ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) और ऐप को उसके नए संस्करण के साथ हमेशा अप-टू-डेट रखना चाहिए. इसे आप अपने फ़ोन सेटिंग में जाकर कर सकते हैं.

आप एक फ़ोन ट्रैकिंग ऐप भी ले सकते हैं, जो फ़ोन खो जाने की स्थिति में उसमें दर्ज आंकड़ों को मिटाने की इजाजत देता है.

क्या स्मार्टफ़ोन के लिए भी एंटीवायरस ज़रूरी है?

स्मार्टफ़ोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भर रहकर एंटीवायरस तकनीक का इस्तेमाल करना अच्छा विचार होगा.

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उदाहरण के लिए ऐपल के आईओएस में ऐसी व्यवस्था होती है, जिससे केवल विश्वसनीय ऐप ही उसमें इंस्टाल हो पाते हैं.

ऐसा हो सकता है कि उसमें कुछ वायरस हो. लेकिन ऐपल उसे हैंडसेट से अपने आप हटा देता है.

एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम को उपयुक्त सुरक्षा नियंत्रण की ज़रूरत होती है और यह सुरक्षा का बेहतर तरीका है.

ऐसे वायरस अक्सर ख़ुद को असली ऐप (या किसी व्यावसायिक ऐप के मुफ़्त संस्करण) के रूप में पेश करते हैं, इस पर विश्वास करके लोग उन्हें डाउनलोड कर अपने हैंडसेट में इंस्टाल कर लेते हैं.

किसी ऐप स्टोर से एंड्रायड के लिए मुफ़्त में एंटीवायरस लिया जा सकता है.

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