इंटरनेट: क्या था, क्या है और क्या होगा अभी

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12 मार्च 2014 को डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू यानी वर्ल्ड वाइड वेब को अस्तित्व में आए 25 साल पूरे हो गए हैं. वर्ल्ड वाइड वेब को बनाने का श्रेय सर टिम बर्नर्स ली को जाता है जिन्होंने इस अवधारणा को मूर्त रूप प्रदान किया.

वर्ष 1983 में एक सर्वेक्षण के दौरान में उन लोगों से बात की गई थी जिन्होंने कंप्यूटर के ज़रिए किसी को संदेश भेजा था. इनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोगों को यह तरीक़ा बहुत उपयोगी नहीं लगा था.

इसके बाद से प्यू रिसर्च सेंटर उन आंकड़ों को जुटाता रहा है जो बताते हैं कि गुजरे दशकों में अमरीकी इस तकनीक को किस तरह देखते रहे हैं.

आंकड़े बताते हैं कि 1983 में अमरीका में दस प्रतिशत लोगों के पास कंप्यूटर थे. लेकिन संदेश भेजने के लिए ज़्यादातर लोगों को यह तकनीक रास नहीं आई.

फिर लोगों को कंप्यूटर के ज़रिए ख़रीदारी का अनुभव हुआ.

सर्वेक्षण से पता चला था कि 1983 में कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे दस में से सात लोग इससे ख़रीदारी करना सुविधाजनक पाते हैं.

इस बारे में उन्होंने जो संदेश भेजा था वो यह था, ''ऐसी बहुत सारी चीज़ें ख़रीदना बहुत आसान है, जो परिवार के बजट में नहीं हैं.''

नंबर वन तकनीक

1995 में प्यू रिसर्च सेंटर ने एक और सर्वेक्षण किया. इसमें पाया गया कि 42 प्रतिशत अमरीकियों ने इंटरनेट शब्द कभी सुना ही नहीं.

लेकिन ज़्यादातर लोगों ने माना कि कंप्यूटर के बिना रहना उनके लिए बड़ा मुश्किल है.

और फिर जब 2014 के आंकड़े देखे गए तो पता चला कि प्रत्येक दस में से एक व्यक्ति ऑनलाइन नहीं है.

प्यू रिसर्च की मानें तो आज वर्ल्ड वाइड वेब ही वह नंबर एक तकनीक है जिसे लोग छोड़ना नहीं चाहते हैं.

सर्वेक्षण में शामिल 67 प्रतिशत लोगों का मानना है कि संबंधों को मज़ूबत बनाने के लिए इंटरनेट अच्छा ज़रिया है.

यह विचार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों में एक समान पाया गया है जिनमें स्त्री-पुरुष, बच्चे-बूढ़े, अमीर-ग़रीब सभी तरह के लोग शामिल हैं.

ज़्यादातर लोगों का कहना है कि उन्हें 'इंफोर्मेशन सुपरहाइवे' पर सवारी करना मज़ेदार लगता है.

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