अच्छी सेहत के लिए सात बार खाएँ फल-सब्जी

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दिन में सात या सात से ज़्यादा बार फल और सब्ज़ियां खाना सेहत के लिए ज़्यादा बेहतर है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने 65,226 लोगों पर अध्ययन के बाद यह बात कही है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा करने से मौत का ख़तरा 42% कम हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन अब तक दिन में पांच बार फल और सब्ज़ी खाने पर ज़ोर देता रहा है.

दिन में सात बार फल और सब्जियां खाने से कैंसर और हृदय रोग का ख़तरा कम हो जाता है.

हालांकि ब्रिटेन सरकार का कहना है कि दिन भर में पांच बार ही सब्ज़ी और फल खाना पर्याप्त होता है, लेकिन हम में से कई लोगों को तो यह भी मुश्किल से मिलता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि मात्र फल और सब्जियां खाने से ही उम्र लंबी नहीं होती बल्कि इसका संबंध हमारी जीवनशैली, जैसे धूम्रपान और शराब पीने, से भी है.

उम्र का पड़ाव

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लोगों के भोजन और जीवनशैली पर निगाह रखने के लिए इंग्लैंड में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ता नेशनल हेल्थ सर्वे की मदद लेते हैं. यह सर्वे इंग्लैंड के लोगों से सवाल पूछ कर और नर्सों से जानकारियां जुटा कर तैयार किया जाता है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि दिन भर में सात बार फलों-सब्जियों के सेवन से मौत का ख़तरा 42% कम हो जाता है.

सब्जियों से फ़ायदे की बात की जाए तो ताज़ा सब्जियां के साथ सलाद और बाद में फल खाने से फ़ायदा सबसे अधिक होता है.

फल खाने की जगह यदि उसका रस या जूस पिया जाए तो कोई फ़ायदा नहीं होता, जबकि डिब्बाबंद फल खाने से मौत का ख़तरा बढ़ जाता है. शोधकर्ता बताते हैं कि ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि डिब्बाबंद फल चीनी के घोल में संग्रहित होता है.

फ़ायदा-नुकसान

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अग्रणी शोधकर्ता डॉ इनलोला बोडे कहती हैं, "मतलब साफ़ है कि चाहे आप उम्र के किसी भी पड़ाव पर हों, ज्यादा फल और सब्जियों का सेवन लंबी उम्र देता है."

वह कहती हैं कि फल-सब्जी की मात्रा का प्रभाव चौंका देने वाला है, लेकिन थोड़ा खाना भी कुछ न खाने से काफ़ी बेहतर है.

सवाल ये उठता है कि आखिर फल और सब्जियों में ऐसा क्या मौजूद है जो हमारी उम्र बढ़ाता है.

शोधकर्ता डॉ इनलोला बोडे बताती हैं कि ये हमें रोगों से लड़ने की ताक़त देते हैं क्योंकि इनमें ऐंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है जो कोशिकाओं को हुई क्षति की भरपाई करता है.

मुट्ठी-भर सात बार

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इसके अलावा इनमें फ़ाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो सेहत के लिए अच्छे होते हैं.

वे बताती हैं कि सात बार खाने का मतलब एक बार में 80 ग्राम की मात्रा यानी "एक मुट्ठी, फल या सब्जी का सेवन है."

लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध अंतिम नहीं कहा जा सकता क्योंकि संभव है कि इसके नतीजों पर जीवनशैली से जुड़े दूसरे कारकों ने भी प्रभाव हो सकता है.

ग्लासगो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नवीद सत्तर इस शोध पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि दिन भर में सात बार खाना चुनौतीपूर्ण है.

वह कहते हैं, "ऐसा करने के लिए सरकार की मदद की ज़रूरत पड़ेगी. जैसे कि फल और सब्जियों की क़ीमत में कटौती, चीनी बहुल खाद्य पदार्थों पर कर में कमी, और समाज के हर तबक़े के लिए उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ों को मुहैया करना."

अपरिपक्व सलाह

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इंग्लैंड पब्लिक हेल्थ के डॉ. अलीसन टेडस्टोन का कहना है कि ये शोध दिलचस्प है लेकिन फल और सब्जियों की ख़ास मात्रा की सलाह अपरिपक्व मालूम पड़ती है क्योंकि दो-तिहाई लोग तो दिन भर में पांच बार भी फलों और सब्जियों का सेवन नहीं करते.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ विक्टोरिया टाइलर का कहना है कि लोग अभी दिन भर पांच बार फल-सब्जी सेवन के मौजूदा लक्ष्य तक ही नहीं पहुंच पा रहे हैं.

विक्टोरिया कहती हैं, "जब हम पांच बार खाने के लक्ष्य तक ही नहीं पहुंच पा रहे तो इसे छोड़ एक क़दम और आगे का लक्ष्य निर्धारित करने की मुझे कोई वजह नहीं दिखती."

वहीं ऑस्ट्रेलिया की सरकार लोगों को दिन भर में दो बार से अधिक फल और पांच बार से अधिक सब्जियां खाने को प्रेरित कर रही है.

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