आपके क्रेडिट कार्ड पर किसकी है नज़र

इंटरनेट के जाल में आप कितना फंसते जा रहे हैं इसका शायद आपको अंदाज़ा भी नहीं हैं. हर दिन आप या तो इंटरनेट पर कुछ खरीदते हैं या फिर रेल और हवाई यात्रा के लिए टिकट आरक्षित कराते हैं.

ऐसा करते वक़्त आप अपनी क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की जानकारी भी वहाँ डालते हैं. पर ये कितना सुरक्षित है.

लूसिडस टेक के सह संस्थापक साकेत मोदी ने बताया कि भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली ट्रैवल वेब साइट (जिसका नाम उन्होंने नहीं लिया) के प्राधिकारियों ने उन्हें जब अपनी वेब साइट के निरीक्षण के लिए बुलाया तो साकेत और उनकी टीम ने इस वेब साइट को नैतिक रूप से हैक करके कुछ कमियाँ ढूंढ निकाली.

इस निरीक्षण के दौरान करीब 21 लाख लोगों के क्रेडिट कार्ड की जानकारी उनके सीवीवी नंबर सहित आसानी से निकाल ली गई थी.

इस समस्या को अगले तीन दिनों के अंदर ठीक कर दिया गया था लेकिन इससे ये बात साफ़ हो जाती है कि इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के लिए पहले असुरक्षा के बारे में पता करना अनिवार्य है.

हैकिंग और एथिकल हैकिंग

किसी भी वेब साइट या कम्प्यूटर को हैक करने का मतलब है उसमें अनाधिकृत प्रवेश करना और जो व्यक्ति ये काम करता है वो हैकर कहलाता है.

साकेत से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जिस तरह से पुलिस और चोर के बीच हुनर का फ़र्क नहीं होता, सिर्फ़ वर्दी और नीयत का फ़र्क होता है, ठीक उसी तरह हैकर और एथिकल हैकर के बीच भी यही अंतर है”.

जब भी कोई शख़्स अपनी वेब साइट की खामियों के बारे में जानने के लिए किसी व्यक्ति को अपनी वेब साइट हैक करने का अधिकार देता है और फिर वह व्यक्ति उस वेब साइट को उसके सुरक्षा साधनों की कमियों के बारे में पता करने के लिए उसे हैक करता है, तो प्रक्रिया को एथिकल हैकिंग कहते हैं.

साकेत के हिसाब से हैकिंग अपने आप ग़लत नहीं है, लेकिन अगर इसका दुरुपयोग किया जाए तो ये एक गुनाह में बदल जाता है.

उदाहरण के तौर पर अगर कोई शख्स अधिकारिक तरीके से किसी ई-कॉमर्स वेब साइट को हैक करके उसकी ख़ामियाँ निकालने में सक्षम है तो वो एथिकल हैकिंग है.

बच्चों को हैकिंग में दिलचस्पी क्यों

प्रियांशु कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के विद्यार्थी हैं और पढ़ाई के अलावा एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं.

एथिकल हैकिंग से ये “सेफ़ और सिक्योर कोडिंग” करना सीख रहे हैं. इनका मानना है कि आगे चलकर सॉफ्टवेयर डेवेलप्मेंट की नौकरी में से सहायक होगा.

बी.टेक. के छात्र आदित्य एथिकल हैकिंग इसलिए सीख रहे हैं क्योंकि वो मानते हैं कि बाकि क्षेत्रों में पहले से ही काफ़ी भीड़ है मगर इस क्षेत्र के बारे में लोगों को अभी ज़्यादा जानकारी नहीं है और एथिकल हैकिंग के क्षेत्र में में वो अपना भविष्य उज्जवल मानते हैं.

सितंबर 2013 में “फ़ोर्ब्स” नामक मैगज़ीन ने अपने एक लेख में भविष्य की 6 सबसे कमाऊ नौकरियों की बात की थी जिसमें एथिकल हैकिंग को दूसरा स्थान दिया गया है.

इसके अलावा जुलाई 2013 में भारत ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति जारी की थी जिसके मुताबिक आने वाले 5 सालों में 500,000 एथिकल हैकर्स तैयार करने की बात की गई है.

साकेत मोदी बताते हैं कि इस वक्त भारत में “क्लीन” एथिकल हैकर्स की संख्या 5000 भी नहीं है.

साकेत ने क्लीन पर ज़ोर देते हुए कहा कि हैकिंग सीखने के बाद अपने लालच पर काबू पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में जिसे काम आता है वो ग़लत तरीके से काफ़ी पैसे कमा सकता है. इस पतली रेखा को लांघने से जो बच जाता है वही एथिकल हैकर बनने में कामयाब होता है.

कहाँ चाहिए हैकर्स

कोई भी आदमी या कोई भी कम्पनी जो कम्प्यूटर के माध्यम से किसी वेब साइट या किसी क्रेडिट कार्ड से जुड़ी हुई है, उसे हैक होने का खतरा होता है.

ज़रूरी नहीं है कि हैक करने वाला आपका कोई दुश्मन या प्रतिद्वंदी हो, वो आपके दोस्त, माता-पिता, भाई-बहिन कोई भी हो सकते हैं.

आज के ज़माने में जहाँ लगभग हर घर में और कार्य-स्थल पर इंटरनेट की सुविधा है, ऐसे में हैक होने की संभावना बढ़ गई है. और इसीलिए एथिकल हैकर्स की मांग ज़्यादा हो रही है.

इंटरनेट एक ऐसा खज़ाना है जो हर पल कई गुना बढ़ रहा है, लेकिन इसके पहरेदारों का भी उसी रफ़्तार से बढ़ना ज़रूरी है. इस बात को जितनी जल्दी समझ लिया जाएगा उतना ही खज़ाने को बचाया जा सकेगा.

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