इबोला संक्रमित कितने लोग मरते हैं?

  • 10 अगस्त 2014
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ ख़तरनाक वायरस इबोला की चपेट में आने वालों में से 90 फ़ीसदी तक मौत के मुंह में चले जाते हैं.

क्या यह सच है?

मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी की जैव सांख्यिकी और महामारी रोग विशेषज्ञ मायमुना मजूमदार कहती हैं, "90 फ़ीसदी का आंकड़ा कांगो में 2002 और 2003 में फैले इबोला संक्रमण से आया है. कांगो में इस वायरस के चलते सबसे ज़्यादा मौतें हुईं थी."

मौत की दर को निकालने के लिए इलाज कराने वाले कुल संक्रमित लोगों की संख्या में मरने वाले लोगों की संख्या से भाग दिया जाता है.

पश्चिमी अफ़्रीकी देशों में फैले संक्रमण से होने वाली मौत पर मायमुना मजूमदार बताती हैं, " 1976 से अब तक इबोला संक्रमण से मौत की दर 60 से 65 फ़ीसदी तक पहुंचती है. पश्चिम अफ़्रीकी देशों में इस बार मौत की दर 54 फ़ीसदी के आसपास है. हालांकि इसमें बदलाव हो सकता है."

संक्रमण का सच

वैसे अलग-अलग देशों में मौत की दर भी भिन्न है. गिनी में 73 फीसदी, लाइबेरिया में 55 फ़ीसदी, सियरा लियोन में 41 फ़ीसदी और नाइजीरिया में यह 11 फ़ीसदी है.

एक ही संक्रमण से होने वाली मौत के आंकड़े इतने भिन्न क्यों हैं? मजूमदार के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और संक्रमण से निपटने की तैयारियों पर मौत की दर निर्भर करती है.

इसके अलावा यह संक्रमण भी कई तरह का होता है. अब तक पहचान में आए पांच तरह के इबोला संक्रमण में 'ज़ायर' और 'सूडान' सबसे ज़्यादा ख़तरनाक माने जाते हैं. इनमें 'ज़ायर' संक्रमण 79 फ़ीसदी मौत दर के साथ सबसे ज़्यादा ख़तरनाक है, जबकि 'सूडान' संक्रमण में मौत की दर 54 फ़ीसदी होती है.

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ऐसे में साफ़ है कि पश्चिम अफ़्रीकी देशों में इबोला संक्रमण से होने वाली मौत की दर 90 फ़ीसदी से काफ़ी कम है.

इतना ही नहीं इबोला का संक्रमण इंफ्लूएंज़ा और ख़सरा के मुक़ाबले कम तेज़ी से फैलता है.

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