पहली बार महिला गणितज्ञ को 'फील्ड्स मेडल'

  • 13 अगस्त 2014
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Image caption मरयम मिर्ज़ाख़ानी ने कॉलेज तक की शिक्षा ईरान में हासिल की और हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं

ईरान में जन्मी प्रोफेसर मरियम मिर्ज़ाख़ानी फील्ड्स मेडल जीतने वाली पहली महिला गणितज्ञ बन गई हैं.

मिर्ज़ाख़ानी को ज्यामिती में किए गए उनके शोध के लिए ये पुरस्कार दिया गया है. यह पुरस्कार हर चौथे साल दिया जाता है और मिर्ज़ाख़ानी को यह पुरस्कार दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ सम्मेलन में दिया गया.

पुरस्कार जीतने वाले अन्य गणितज्ञों में कनाडा में जन्मे अमरीकी प्रोफ़ेसर मंजुल भार्गव, ब्रिटेन की वारिक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्टिन हेयरर और ब्राज़ील के डॉक्टर आर्तुर अविला शामिल हैं.

इंटरनेशनल मैथेमेटिकल यूनियन (आईएमयू) फील्ड्स मेडल पुरस्कार देती है और इसे 'गणित का नोबेल पुरस्कार' माना जाता है.

नोबेल पुरस्कार के बराबर

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कनाडा के गणितज्ञ जॉन फील्ड्स ने 15 हज़ार कनाडाई डॉलर की पुरस्कार राशि से फील्ड्स मेडल देने की शुरुआत की थी.

पहला पुरस्कार 1936 में दिया गया था और फिर 1950 के बाद हर चौथे वर्ष यह पुरस्कार दो से चार शोधकर्ताओं को दिए जाते हैं. एक शर्त है कि पुरस्कार जीतने वाले की उम्र 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.

मेडल चयन समिति की सदस्य प्रोफेसर डेम फ़्रांसेस किरवान का कहना है कि गणित को पुरुषों के दबदबे वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता है, लेकिन महिलाएँ सदियों से गणित के क्षेत्र में सहयोग कर रही हैं.

उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में गणित की 40 प्रतिशत स्नातक महिलाएं हैं, लेकिन पीएचडी स्तर पर ये तादाद तेज़ी से घट जाती है.

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