जानलेवा इबोला से बचने के 5 तरीके

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इबोला दुनिया के सबसे ख़तरनाक वायरसों में से एक है. इससे फ्लू के वायरस की तरह निपटा नहीं जा सकता. विशेषज्ञों का कहना है कि पांच आसान तरीके अपनाकर इस ख़तरनाक वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है.

पढ़िएः इतना ख़तरनाक क्यों है इबोला?

जानिए क्या हैं वो पांच तरीके

1. साबुन और पानी

अपने हाथों को हमेशा साबुन और साफ़ पानी से धोएं. हाथों को सुखाने के लिए साफ़ तौलिए का इस्तेमाल करें. वायरस को मारने का यह सबसे असरदार तरीका है. हाथ धोने के लिए किसी ख़ास साबुन की जरूरत नहीं होती है.

प्लान इंटरनेशनल के डॉक्टर उन्नी कृष्णन ने बीबीसी अफ़्रीका को बताया कि हाथ मिलाने से बचें क्योंकि यह वायरस शरीर के सीधे संपर्क से तेज़ी से फैलता है.

2. छूने से बचें

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अगर आपको किसी व्यक्ति पर इबोला से संक्रमित होने का संदेह है तो उन्हें न छुएं. यह वायरस पेशाब, मल, रक्त, उल्टी, पसीना, आंसू, शुक्राणु और योनि से होने वाले स्राव के संपर्क से फैलता है.

इस बीमारी के लक्षण हैं अचानक बुख़ार आना, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द, गले में ख़राश और थकान. जितनी जल्दी संभव हो सके डॉक्टरों को सूचित करें. मेडिसिंस सां फ़्रॉटियर्स का कहना है कि इबोला से संक्रमित मरीज के कपड़ों और इस्तेमाल होने वाले अन्य कपड़ों को भी जला देना चाहिए.

3. शवों से रहें दूर

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अगर आपको लगता है कि किसी व्यक्ति की मौत इबोला वायरस की वजह से हुई है, तो उसके शरीर को छूने से बचें. किसी बीमार व्यक्ति की तुलना में मृत व्यक्ति से वायरस के संक्रमण का ख़तरा अधिक होता है.

रिहायशी इलाक़े में किसी शव को छोड़ना ख़तरनाक है. इसलिए शवों को संभलाने के लिए बनी विशेषज्ञों की टीम को जल्दी बुलाएं.

4. मांस को कहें ना

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शिकार करने और जानवरों को छूने से बचें. बंदर, चिंपैंजी, चमगादड़ का मांस नहीं खाएं क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि मनुष्यों में इसका संक्रमण इन्हीं जानवरों के संपर्क में आने से हुआ.

इसके साथ यह भी सुनिश्चित करें कि खाने को ठीक से पकाया गया है.

5. घबराएं नहीं

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अफ़वाहें फैलने से दहशत बढ़ती है. इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों से डरें नहीं, वे आपकी मदद करने के लिए हैं.

अस्पताल किसी भी मरीज़ के लिए सबसे अच्छी जगह है. यहां उनको पानी की कमी से बचाया जा सकता है और दर्द निवारक दवा भी दी जा सकती हैं.

डॉक्टर कृष्णन कहते हैं, "इबोला से निपटने के लिए बचाव सबसे अच्छा तरीका है, इसलिए अफ़वाहें फैलने से रोकें और घबराएं नहीं. इससे तकलीफ को कम करना और लोगों की ज़िंदगी बचाना मुमकिन है."

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