'ज़्यादा कार्बन सोखते हैं पौधे'

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एक ताज़ा शोध के मुताबिक़ ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स पौधों के कार्बन अवशोषित करने की मात्रा को कम करके आंकते हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि 1901 और 2010 के दौरान सजीव चीज़ों ने पूर्व में अनुमानित 16 प्रतिशत से ज़्यादा कार्बन अवशोषित किया.

इस शोध के लेखक कहते हैं कि यह शोध व्याख्या करता है कि क्यों ये मॉडल लगातार वातावरण में कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाकर दिखाते हैं.

कार्बन का अवशोषण

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई गणना का वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि की भविष्यवाणी पर असर नहीं पड़ेगा.

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यह शोध नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज के जर्नल में प्रकाशित हुआ.

वातावरण में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड की जानकारी ग्लोबल वार्मिंग से तापमान पर पड़ने वाले असर का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण है.

पर्यावरण में उत्सर्जित होने वाले कुल कार्बन की आधी मात्रा सागर सोख लेता है या सजीव वस्तुएं उसको अवशोषित कर लेती हैं.

उत्सर्जन में कमी

इस शोध में वैज्ञानिकों के एक दल ने पेड़ों और पौधों की कार्बन अवशोषित करने के तरीके का अध्ययन किया गया.

इससे वैज्ञानिकों को पता चला कि पत्तियां ज़्यादा गैस का अवशोषण करती हैं.

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Image caption वैज्ञानिकों का कहना है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी की दीर्घकालीन योजना में बदलाव की जरूरत नहीं है.

इस शोध से जुड़े अमरीका की ओक रिज नेशनल प्रयोगशाला के डॉक्टर लीआनहोंग गु कहते हैं, "आधारभूत प्रक्रिया का अध्ययन करने वाले और बड़े पैमाने पर इस प्रक्रिया को मॉडल से स्थापित करने वाले वैज्ञानिकों के बीच समय का अंतर होता है."

उन्होंने कहा कि वातावरण में कार्बन की मात्रा में 1950 के बाद तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है.

हालांकि कई विशेषज्ञ इस शोध को रोचक मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इससे कार्बन डाई ऑक्साइड के असर को कम करने के लिए उत्सर्जन में दीर्घकालीन कटौती में बदलाव की जरूरत नहीं है.

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