बिना चाभी वाली कारों पर चोरों की नज़र

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अगर आप सोचें की आपकी महँगी, बिना चाभी वाली कार सुरक्षित है तो जान लें कि ऐसी कारें चोरों के निशाने पर ऊपर हैं.

बिना चाभी वाली (की-लेस) महँगी कारों के बाज़ार पर नज़र रखने वाली एक ब्रितानी संस्था के अनुसार आपराधी गिरोह तकनीकी उपकरणों की मदद से इन कारों के दरवाजे खोलने में काफ़ी कामयाब हैं.

सोसायटी ऑफ़ मोटर्स मैन्यूफैक्चर्स एंड ट्रेडर्स (एसएमएमटी) ने कार निर्माताओं से अपील की है कि वो कारों में अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें.

दरअसल रिमोट से चलने वाली कारों को निशाना बनाकर अपराधी ख़ास उपकरणों से कारों के रिमोट की प्रोग्रामिंग बदल देते हैं.

निर्माताओं की मुश्किल

जगुआर लैंड रोवर की ओर से कहा गया है, "रिमोट से खुलने वाले दरवाज़ों की सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग को बदल कर कार चोरी के मामले दुनिया भर में बढ़े हैं."

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इंग्लैंड में ऐसी कई चोरियों के मामले सामने आए हैं.

इन कार मालिकों को बीमा कंपनियों की ओर से कोई मुआवज़ा भी नहीं मिल रहा है.

अख़बार द टाइम्स की ख़बर के मुताबिक एआईजी बीमा कंपनी ने ऐसे ही एक मामले में कार मालिक को मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया.

हालांकि बीमा कंपनी ने कहा है कि वो हर मामले की अलग-अलग पड़ताल करती है.

बढ़ रही है समस्या

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बीमा कंपनियों से मिले आंकड़ों का अध्ययन करने वाली संस्था दैटकैम रिसर्च ने भी माना है कि समस्या लगातार बढ़ रही है.

दैटकैम रिसर्च ने कहा, "बीएमडब्ल्यू और ऑडी पर चोरों की नज़र सबसे ज़्यादा है. यूरोप में इन कारों को लेकर सबसे ज़्यादा चाहत है."

हालांकि ब्रिटेन में कार चुराना उतना भी आसान नहीं है. पुलिस-प्रशासन की सख्ती की वजह से कार चोरी पर काफ़ी हद तक अंकुश लगा है.

2002 में ब्रिटेन में हर साल तीन लाख से ज़्यादा कारों की चोरी होती थी, जो अब 77 हज़ार सालाना तक आ गई है.

हैरानी की बात यह है कि की-लेस कारों की चोरी की बढ़ती घटनाओं के बावजूद ज़्यादातर लोगों का मानना है कि ये कारें ज़्यादा सुरक्षित हैं.

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